बेंगलुरु की कॉर्पोरेट दुनिया में अच्छी सैलरी वाली नौकरी छोड़कर एक युवक ने ऐसा रास्ता चुना, जिसने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच लिया है। जहां ज्यादातर लोग बेहतर पैकेज और प्रमोशन की तलाश में शहरों में बने रहना चाहते हैं, वहीं इस युवक ने अपने गांव लौटकर खुद का कारोबार शुरू करने का फैसला किया। एक्स (X) पर शेयर की गई उसकी कहानी में दावा किया गया कि उसने ऑफिस की भागदौड़ छोड़कर पानी साफ करने का बिजनेस शुरू किया, जो अब अच्छी कमाई का जरिया बन चुका है। इस पोस्ट के बाद ऑनलाइन बहस शुरू हो गई कि क्या जरूरी समस्याओं को हल करने वाले छोटे बिजनेस, बड़ी कॉर्पोरेट नौकरियों से ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकते हैं।
घर की जमीन पर लगाया प्लांट
X यूजर अंकित पांडे के मुताबिक, उनके दोस्त ने अपनी ही जमीन पर वाटर प्यूरिफिकेशन प्लांट लगाया। शुरुआत भले ही साधारण थी, लेकिन धीरे-धीरे यह कारोबार आसपास की कई कॉलोनियों और दुकानों तक पहुंच गया। अब वह करीब 300 परिवारों और दुकानों को रोजाना पानी के कैन सप्लाई कर रहा है।
छोटे बिजनेस ने बदली कमाई की तस्वीर
पोस्ट के अनुसार, वह रोजाना करीब 300 पानी के कैन बेचता है और हर कैन की कीमत ₹30 रखी गई है। इस हिसाब से रोज की कमाई लगभग ₹9,000 और महीने का कारोबार करीब ₹2.7 लाख तक पहुंच जाता है। प्लांट खुद की जमीन पर है, इसलिए किराए का खर्च नहीं है। पानी शुद्धिकरण, बिजली और डिलीवरी जैसे खर्च निकालने के बाद उसकी मासिक कमाई लगभग ₹2.35 लाख बताई गई, जो सालाना करीब ₹28 लाख के आसपास बैठती है।
'बड़ी नौकरी ही सफलता नहीं होती'
अंकित पांडे ने अपनी पोस्ट में लिखा कि सफलता का मतलब हमेशा बड़ी कंपनी, ऊंचा पद या शानदार ऑफिस नहीं होता। कई बार ऐसा बिजनेस ज्यादा सफल हो सकता है, जो लोगों की रोज की समस्या का समाधान करता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या लोग ₹11 लाख सालाना वाली कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर ऐसा खुद का काम शुरू करने का जोखिम उठा पाएंगे?
सोशल मीडिया पर छिड़ी नौकरी बनाम बिजनेस की बहस
पोस्ट वायरल होते ही लोगों ने अपनी राय देनी शुरू कर दी। कई यूजर्स ने कहा कि साफ पानी जैसी जरूरी चीजों की मांग लगातार बढ़ रही है और ऐसे बिजनेस में लंबे समय तक कमाई की संभावना है।कुछ लोगों ने कहा कि जमीन से जुड़े और रोजमर्रा की जरूरत वाले कारोबार कई बार कॉर्पोरेट पद और टाइटल से ज्यादा मजबूत साबित होते हैं। उनके मुताबिक, असली मायने कैश फ्लो और समस्या के समाधान के होते हैं, न कि सिर्फ नौकरी के नाम के।
इस कहानी ने एक बार फिर यह चर्चा शुरू कर दी है कि करियर में सफलता का रास्ता हर किसी के लिए अलग हो सकता है। जहां कुछ लोग कॉर्पोरेट सीढ़ियां चढ़ना पसंद करते हैं, वहीं कुछ लोग अपनी जरूरत और अवसर को पहचानकर अपना कारोबार खड़ा करने का रास्ता चुनते हैं।