भारत में लंबे समय से रियल एस्टेट यानी किराये की प्रॉपर्टी को सबसे सुरक्षित निवेश और आसान “पैसिव इनकम” का तरीका माना जाता रहा है। लोगों की सोच होती है कि एक बार फ्लैट खरीद लिया तो हर महीने बिना ज्यादा मेहनत के किराया आता रहेगा और समय के साथ प्रॉपर्टी की कीमत भी बढ़ जाएगी। लेकिन हाल ही में मुंबई के एक मकान मालिक की कहानी ने इस सोच पर सवाल खड़ा कर दिया है। उनका कहना है कि किराये की कमाई जितनी आसान दिखाई देती है, असल में उतनी ही परेशानियों से भरी हो सकती है।
किरायेदार से विवाद, बिल भुगतान की दिक्कतें और लगातार मेंटेनेंस की जिम्मेदारियां कई बार मानसिक तनाव का कारण बन जाती हैं। यही वजह है कि अब लोग रेंटल इनकम के असली अनुभव को लेकर अलग नजरिया रखने लगे हैं और इस पर बहस तेज हो गई है।
ये पैसिव इनकम नहीं, मानसिक तनाव है
सोशल मीडिया पर शेयर किए गए अपने अनुभव में मकान मालिक ने कहा कि लोग रेंटल इनकम को बहुत आसान समझ लेते हैं, जबकि हकीकत इससे काफी अलग है। उनके अनुसार किराये की कमाई को अक्सर जरूरत से ज्यादा “साफ-सुथरा और आसान” दिखाया जाता है, जबकि असल में इसमें कई परेशानियां जुड़ी होती हैं।
बिजली बिल ने बढ़ा दिया पूरा विवाद
पूरा मामला तब बिगड़ा जब बिजली विभाग ने मकान मालिक को बताया कि किरायेदार ने बिल जमा नहीं किया है और कनेक्शन काटा जा सकता है। यह बकाया करीब ₹7,000 का था।
इसके बाद मकान मालिक और किरायेदार के बीच बहस शुरू हो गई। किरायेदार ने मीटर खराब होने की बात कही, जबकि मकान मालिक ने कहा कि AC और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के कारण बिल बढ़ना सामान्य है।
इतना बिल कैसे आया? से शुरू हुआ झगड़ा
मकान मालिक के अनुसार, किरायेदार लगातार इस बात पर अड़ा रहा कि उसने ज्यादा बिजली इस्तेमाल नहीं की। इसी बात को लेकर दोनों के बीच तनाव बढ़ता गया और छोटी सी बात बड़ा विवाद बन गई।
“अब यह फुल-टाइम स्ट्रेस जॉब लगने लगा है”
इस पूरे अनुभव के बाद मकान मालिक ने कहा कि अब उन्हें लगता है कि किराये की प्रॉपर्टी से कमाई करना उतना आसान नहीं है, जितना लोग सोचते हैं।
उन्होंने बताया कि किरायेदार से जुड़े झगड़े, मेंटेनेंस और सोसायटी की समस्याएं लगातार मानसिक तनाव बढ़ाती हैं।
मकान मालिक ने ये भी सुझाव दिया कि ₹80 लाख को प्रॉपर्टी में लगाने के बजाय अगर इसे इंडेक्स फंड या SWP जैसे विकल्पों में निवेश किया जाए, तो ज्यादा स्थिर और शांतिपूर्ण रिटर्न मिल सकता है। उनका कहना है कि निवेश में सिर्फ पैसा ही नहीं, मानसिक शांति भी बहुत जरूरी है।
अंत में उन्होंने सवाल उठाया कि क्या आज के समय में रेंटल इनकम वाकई उतनी फायदेमंद है, जितनी मानी जाती है? या फिर यह सिर्फ एक ऐसा सौदा बन चुका है जिसमें पैसा तो है, लेकिन साथ में तनाव भी भरपूर है।