स्वाद के लिए फेमस मुरथल में नॉनवेज क्यों नहीं मिलता? जानें इसके पीछे का राज

Amazing Facts: इंटरनेट पर आपने भारत की कई रहस्यमयी जगहों के किस्से देखे होंगे, लेकिन दिल्ली के पास बसे मुरथल के ढाबों का राज थोड़ा अलग है। यहां का नाम सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि एक खास मान्यता के कारण भी लिया जाता है, जो इसे और भी दिलचस्प बना देती है

अपडेटेड Apr 14, 2026 पर 1:34 PM
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आज मुरथल के ढाबे सिर्फ खाने की जगह नहीं, बल्कि एक एहसास बन चुके हैं।

दिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाकों में ढाबा कल्चर आज के समय में तेजी से लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है। जो ढाबे कभी सिर्फ ट्रक ड्राइवरों के लिए बनाए गए थे, अब वही जगहें फैमिली, दोस्तों और रोड ट्रिप करने वालों की पसंदीदा स्पॉट बन चुकी हैं। यहां का देसी माहौल, खुला बैठने का इंतजाम और ताजा बना खाना लोगों को खास आकर्षित करता है। खासकर जीटी रोड और पंजाब-हरियाणा रूट पर बने ढाबों की बात करें, तो यहां का स्वाद और सादगी का मेल लोगों को बार-बार खींच लाता है।

महंगे रेस्टोरेंट्स की बजाय अब लोग इन ढाबों का रुख कर रहे हैं, जहां कम कीमत में भरपूर और स्वादिष्ट खाना मिलता है। ढाबे अब सिर्फ खाने की जगह नहीं, बल्कि एक एक्सपीरियंस बन चुके हैं, जहां लोग स्वाद के साथ-साथ सुकून और नॉस्टैल्जिया का भी आनंद लेते हैं।

मुरथल


इन सभी में हरियाणा का मुरथल सबसे ज्यादा चर्चित है। यहां के ढाबों में मिलने वाला देसी पंजाबी खाना लोगों को बार-बार खींच लाता है। ताजे पराठे, तंदूरी नान और दाल मखनी का स्वाद इतना लाजवाब होता है कि महंगे रेस्टोरेंट भी इसके आगे फीके लगते हैं।

प्लेट में क्या-क्या खास?

मुरथल के ढाबों पर आपको आलू, प्याज, गोभी, मूली और पनीर के पराठे मिलते हैं, जिन्हें सफेद मक्खन, अचार, प्याज और ठंडी छाछ के साथ परोसा जाता है। इसके अलावा दाल-रोटी, सरसों का साग, छोले-भटूरे, पनीर की सब्जी और मलाईदार लस्सी यहां की खास पहचान हैं। सस्ता, ताजा और भरपूर खाना यहां की सबसे बड़ी खासियत है।

नॉनवेज क्यों नहीं मिलता?

दिलचस्प बात यह है कि मुरथल के कई ढाबों में नॉनवेज नहीं बनाया जाता। इसके पीछे एक मान्यता जुड़ी है कि संत बाबा कलीनाथ ने श्राप दिया था कि अगर यहां नॉनवेज बनाया या बेचा गया तो वह ढाबा नहीं चलेगा। इसी वजह से आज भी कई ढाबे इस परंपरा का पालन करते हैं।

दुनिया में भी मिला नाम

मुरथल के ढाबों की लोकप्रियता सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। साल 2025 में जारी टेस्टएटलस की सूची में अमरीक-सुखदेव ढाबा दुनिया के टॉप 100 प्रतिष्ठित रेस्टोरेंट्स में शामिल हुआ, जिसने मुरथल को ग्लोबल पहचान दिलाई।

स्वाद के साथ नॉस्टैल्जिया

आज मुरथल के ढाबे सिर्फ खाने की जगह नहीं, बल्कि एक एहसास बन चुके हैं। यहां का देसी स्वाद, खुला माहौल और पुरानी यादों जैसा अनुभव हर किसी को बार-बार यहां आने के लिए मजबूर कर देता है।

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