भारत में अभिवादन सिर्फ किसी से मिलने का तरीका नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और संस्कारों का भी हिस्सा माना जाता है। किसी से मुलाकात होते ही हम अक्सर ‘नमस्ते’, ‘नमस्कार’ या ‘प्रणाम’ कहकर अपना सम्मान जाहिर करते हैं। सुनने में ये तीनों शब्द एक जैसे लग सकते हैं, लेकिन इनके पीछे छिपा भाव और इस्तेमाल का तरीका अलग है। कभी ‘नमस्ते’ सहज बातचीत का हिस्सा बन जाता है, तो ‘नमस्कार’ किसी औपचारिक मौके पर ज्यादा उपयुक्त माना जाता है। वहीं ‘प्रणाम’ में आदर और श्रद्धा का भाव कहीं ज्यादा गहरा होता है।
