NEET UG paper leak: नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट-अंडरग्रेजुएट (NEET-UG) पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच ने राजस्थान के सीकर शहर को सुर्खियों में ला दिया है। CBI अब एक ऐसे छात्र की मार्कशीट और एजुकेशनल बैकग्राउंड की जांच कर रही है, जिसके पिता पर आरोप है कि उन्होंने लीक हुआ नीट पेपर हासिल करने के लिए लाखों रुपये खर्च किए थे। NDTV की एक रिपोर्ट के अनुसार, CBI ने सीकर के एक ही परिवार के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इनमें दो भाई दिनेश बीवाल और मांगीलाल बीवाल एवं मांगीलाल का सबसे बड़ा बेटा विकास शामिल है।
जांचकर्ताओं का दावा है कि आरोपियों ने एक 'गेस पेपर' (अनुमानित पेपर) का इंतजाम किया था, जो असल NEET-UG एग्जाम के पेपर से काफी मिलता-जुलता था। उन्होंने इसे शहर के कोचिंग नेटवर्क के जरिए फैलाया था। जांच अब दिनेश बीवाल के बेटे ऋषि बीवाल पर केंद्रित हो गई है, जो फिलहाल फरार है। अधिकारियों को शक है कि परीक्षा से पहले ही उसे लीक हुआ पेपर मिल गया था। हालांकि, इस कथित मदद के बावजूद ऋषि को NEET में 720 में से सिर्फ 107 नंबर ही मिले।
10 लाख रुपये किया था खर्च
अधिकारियों ने बताया कि दिनेश बीवाल ने कथित तौर पर अपने बेटे के लिए लीक हुआ नीट पेपर हासिल करने के लिए सीकर में लगभग 10 लाख रुपये दिए थे। पूछताछ के दौरान, उसने यह बात कबूल कर ली है कि यह सारा इंतजाम खास तौर पर ऋषि की मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए ही किया गया था।
चांज के दायरे में मार्कशीट
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी अधिकारियों ने ऋषि के एजुकेशनल रिकॉर्ड की जांच शुरू की। इससे पता चला कि उसका प्रदर्शन काफी कमजोर रहा था। जांच के दौरान मिले दस्तावेजों के अनुसार, उसने राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) की 12वीं कक्षा की परीक्षा में 500 में से सिर्फ 254 नंबर हासिल किए थे। इसके अलावा उसे 50.80 फीसदी अंकों के साथ सेकंड कैटेगरी (सेकंड डिवीज़न) मिली थी। बताया जाता है कि यह भी उसे 'ग्रेस मार्क्स' (अतिरिक्त अंकों) की मदद से मिली थी।
युवक की मार्कशीट में विज्ञान के मुख्य विषयों में काफी कम नंबर दिखे। उसे हिंदी में 32, अंग्रेजी में 51, भौतिकी (Physics) में 51, रसायन विज्ञान (Chemistry) में 58 और जीव विज्ञान (Biology) में 62 नंबर मिले थे। अधिकारियों ने जांच में पाया कि भौतिकी और रसायन विज्ञान में उसके 'थ्योरी' (लिखित परीक्षा) के नंबर खास तौर पर बहुत कम थे। जांचकर्ताओं को यह भी पता चला कि इससे पहले उसने 10वीं क्लास लगभग 44 फीसदी अंकों के साथ पास की थी।
MBBS कराने पर अड़ा था परिवार
एजुकेशनल रिकॉर्ड कमजोर होने के बावजूद, परिवार कथित तौर पर उसे मेडिकल सेक्टर में भेजने पर अड़ा हुआ था। इसी वजह से परिवार पर शक है कि उन्होंने मदद के लिए पेपर लीक करने वाले गिरोह का सहारा लिया। CBI ने सीकर में एक फ्लैट की भी पहचान की है, जिसका कथित तौर पर लीक हुए पेपर बांटने और उम्मीदवारों के साथ संपर्क साधने के लिए एक समन्वय केंद्र के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था।
जांचकर्ताओं के अनुसार, इस पेपर लील नेटवर्क के सदस्य कूरियर का काम करते थे। परीक्षा से पहले छात्रों तक पेपर तथा संबंधित सामग्री खुद पहुंचाते थे। दिनेश बीवाल और उनके कुछ रिश्तेदारों पर इस पूरी कड़ी में भूमिका निभाने का शक है। इस बीच, CBI ने इस परिवार से लंबी पूछताछ की है। जल्द ही बेटे से भी सवाल-जवाब किए जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक अब एजेंसी उन सभी अभिभावकों को नोटिस भेज रही है जिन्होंने इस अवैध नेटवर्क के जरिए परीक्षा पास करने की कोशिश की थी।