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नेपाल के स्नो लेपर्ड भारत और चीन में घूमते मिले! इस नई स्टडी ने चौंकाया और GPS ट्रैकिंग में हुआ बड़ा खुलासा

रिसर्चर्स ने पाया कि स्नो लेपर्ड का होम रेंज पुराने वैज्ञानिक अनुमानों की तुलना में 97 गुना तक बड़ा है। इस स्टडी से यह भी साफ हो गया है कि सीमाओं और राष्ट्रीय उद्यानों के निश्चित दायरों तक सीमित मौजूदा संरक्षण नीतियां इस लुप्तप्राय जीव को बचाने के लिए काफी नहीं हैं।

Moneycontrol Hindi Newsअपडेटेड Aug 03, 2026 पर 2:39 PM
नेपाल के स्नो लेपर्ड भारत और चीन में घूमते मिले! इस नई स्टडी ने चौंकाया और GPS ट्रैकिंग में हुआ बड़ा खुलासा
भले ही यह स्टडी सिर्फ चार स्नो लेपर्ड्स पर आधारित थी और डेटा 2013-2017 के बीच का है, लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि यह कोई छिटपुट मामला नहीं है।

हिमालय की रहस्यमयी और दुर्गम चोटियों पर रहने वाले स्नो लेपर्ड (हिम तेंदुए) को लेकर हुई एक नई स्टडी ने वैज्ञानिकों को चौंका दिया है। नेपाल में ट्रैक किए गए चार स्नो लेपर्ड्स के जीपीएस डेटा से खुलासा हुआ है कि ये दुर्लभ वन्यजीव नेपाल, भारत और चीन के बीच की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को नियमित रूप से पार करते हैं। रिसर्चर्स ने पाया कि स्नो लेपर्ड का होम रेंज पुराने वैज्ञानिक अनुमानों की तुलना में 97 गुना तक बड़ा है। इस स्टडी से यह भी साफ हो गया है कि सीमाओं और राष्ट्रीय उद्यानों के निश्चित दायरों तक सीमित मौजूदा संरक्षण नीतियां इस लुप्तप्राय जीव को बचाने के लिए काफी नहीं हैं।

जीपीएस कॉलर से खुला हिमालय के 'पहाड़ के प्रेत' का राज

नेपाल के पूर्वोत्तर कोने में स्थित कंचनजंगा संरक्षण क्षेत्र में यह स्टडी की गई है। यहां नेपाल, भारत का सिक्किम राज्य और तिब्बत क्षेत्र आपस में मिलते हैं। वर्ष 2013 से 2017 के बीच शोधकर्ताओं ने हफ्ते की कड़ी मेहनत के बाद चार जंगली स्नो लेपर्ड्स के गले में जीपीएस कॉलर लगाए थे। इन कॉलर से कुल 4707 जीपीएस लोकेशन्स रिकॉर्ड की गईं। एक स्नो लेपर्ड का कॉलर 20 दिनों बाद खराब हो गया। एक दूसरे स्नो लेपर्ड से रिकॉर्ड 659 दिनों तक लगातार डेटा मिलता रहा। ट्रैकिंग में शामिल तीन प्रमुख स्नो लेपर्ड्स का नाम लापछेंबा, यालुंग और घांगजेनज्वेंगा रखा गया था।

बार-बार पार की भारत और चीन की अंतरराष्ट्रीय सीमाएं

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