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Ngogo Chimp War: अपनों के खून के प्यासे हुए चिंपैंजी, युगांडा के जंगलों में छिड़ा खूनी 'सिविल वॉर', दोस्त ही बने जान के दुश्मन

Ngogo Chimp War: युगांडा के किबाले नेशनल पार्क में न्गोगो चिंपैंजी समुदाय के बीच एक दुर्लभ और भीषण गृहयुद्ध छिड़ा हुआ है, जिसमें कभी साथ रहने वाले दो गुट अब एक-दूसरे के जानी दुश्मन बन गए हैं। संगठित हमलों और खूनी संघर्ष की इस कड़वी जंग में अब तक 28 से अधिक चिंपैंजियों की जान जा चुकी है, जिसने वैज्ञानिकों को भी सामाजिक बिखराव के इस भयानक स्तर से हैरान कर दिया है।

Shradha Tulsyanअपडेटेड Apr 10, 2026 पर 2:43 PM
Ngogo Chimp War: अपनों के खून के प्यासे हुए चिंपैंजी, युगांडा के जंगलों में छिड़ा खूनी 'सिविल वॉर', दोस्त ही बने जान के दुश्मन

कल्पना कीजिए एक ऐसे परिवार की जो दशकों से एक साथ खाना खाता था, एक-दूसरे के दुख-सुख बांटता था और साथ खेलता था। लेकिन आज, वही भाई एक-दूसरे की गर्दन के प्यासे हैं। युगांडा के किबाले नेशनल पार्क का न्गोगो समुदाय, जो कभी अपनी अटूट एकता के लिए मिसाल था, आज नफरत की आग में जल रहा है।

रिश्तों की बलि और नफरत का उदय

न्गोगो का यह कुनबा करीब 200 सदस्यों के साथ दुनिया का सबसे बड़ा और सुखी चिंपांजी परिवार माना जाता था। लेकिन वक्त बदला और रिश्तों की गर्माहट, ठंडी नफरत में बदल गई। साल 2018 के आसपास इस कुनबे की नींव हिलने लगी और यह दो गुटों में बंट गया: 'वेस्टर्न' और 'सेंट्रल'। जो हाथ कभी एक-दूसरे की सफाई करते थे, अब वही हाथ पत्थर और दांतों से जान लेने पर उतारू हैं।

एक अनुशासित सेना जैसा हमला

वैज्ञानिकों को सबसे ज्यादा हैरान जिस बात ने किया, वह है इन चिंपांजियों की रणनीति। 'वेस्टर्न' गुट के चिंपांजी किसी ट्रेंड कमांडो फोर्स की तरह व्यवहार कर रहे हैं। वे खामोशी से, एक ही कतार में चलते हुए दुश्मन के इलाके में घुसते हैं। वे घात लगाकर बैठते हैं और मौका मिलते ही हमला कर देते हैं। यह सिर्फ जानवरों की लड़ाई नहीं, बल्कि एक सोची-समझी सैन्य कार्रवाई जैसी लगती है।

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