Religion Conversion Gang in UP: उत्तर प्रदेश पुलिस के आतंकवाद रोधी दस्ते (ATS) ने कथित अवैध धर्मांतरण मामले में फरार एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। एक बयान में कहा गया कि लखनऊ के गोमतीनगर के ATS थाने में दर्ज एक मामले में 50,000 रुपये के इनामी आरोपी जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा और सह आरोपी नीतू उर्फ नसरीन निवासी बलरामपुर को गिरफ्तार कर लिया गया है। जांचकर्ताओं ने बताया कि मुंबई निवासी घनश्याम रोहेरा, उसकी पत्नी नीतू और बेटी समाले ने नवंबर 2015 में दुबई में इस्लाम धर्म अपना लिया था। फिर उन्होंने अपना नाम क्रमश: जलालुद्दीन, नसरीन और सबीहा रख लिया था।
बयान में कहा गया कि जलालुद्दीन के खिलाफ एक अदालत ने गैर-जमानती वारंट जारी किया था। जबकि पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए 50,000 रुपये का कैश इनाम घोषित किया था। दोनों को अदालत में पेश किया गया। फिर रिमांड प्राप्त करने के बाद लखनऊ जिला जेल भेज दिया गया। आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने हिंदू और गैर-मुस्लिम समुदायों के व्यक्तियों को इस्लाम में परिवर्तित करने के लिए संगठित तरीके से काम किया।
बयान में कहा गया कि दर्ज मामले में आरोप है कि "आरोपियों द्वारा संगठित रूप से हिंदू और गैर मुस्लिम समुदाय के गरीब, असहाय मजदूर एवं कमजोर वर्ग के लोगों, विधवा महिलाओं को प्रलोभन देकर, आर्थिक मदद करके तथा शादी का झांसा देकर, डरा धमका करके और बल पूर्वक धर्म परिवर्तन कराया जा रहा था।"
10 करोड़ की बना ली प्रॉपर्टी
ADGP (कानून व्यवस्था) अमिताभ यश ने टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) को बताया, "स्वयंभू आध्यात्मिक नेता जलालुद्दीन ने धर्म परिवर्तन का नेटवर्क तैयार किया। STF ने समूह की गतिविधियों की जांच शुरू की, जिसमें एक बड़ा खुलासा हुआ। इसमें लोगों को रोमांटिक रिश्तों, बल पूर्वक या पैसे का प्रलोभन के माध्यम से धर्म परिवर्तन के लिए लुभाया जाता था। जांच में यह भी पता चला कि गैंग नाबालिगों का धर्म परिवर्तन करने में शामिल था। इसके संचालन की वित्तीय जांच से पता चला कि कथित तौर पर धर्म परिवर्तन के लिए विदेशी स्रोतों से 40 बैंक अकाउंट्स में 100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा की गई थी।
अधिकारी ने आगे कहा, "इन निष्कर्षों के आधार पर STF ने एक मामला दर्ज किया, जिसकी वर्तमान में एटीएस द्वारा जांच की जा रही है।" पुलिस ने कहा कि जलालुद्दीन के ठिकाने से बरामद एक डायरी में 100 से अधिक लोगों के नाम थे, जिन्हें धर्म परिवर्तन के लिए लुभाया जा सकता था। मामले के नेशनल और इंटरनेशनल प्रभावों को देखते हुए यूपी पुलिस ने NIA और ED को शामिल करते हुए मामले की जांच की मांग की है। जांच बलरामपुर निवासी अरविंद कुमार की शिकायत पर शुरू की गई थी, जिन्होंने जिले के माधपुर गांव में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना दी थी।
एक ATSअधिकारी ने कहा, "जांच में पता चला है कि पिछले 3-4 सालों से जलालुद्दीन और उनका परिवार चांद औलिया दरगाह के पास रह रहे थे। वह खुद को सूफी संत हजरत बाबा जलालुद्दीन 'पीर बाबा' के रूप में पेश करता था। उसने इस्लाम का प्रचार करने के लिए 'शिजरा-ए-तैयबा' नामक किताब भी लिखी थी।" धर्म परिवर्तन करने के बावजूद उनके आधिकारिक भारतीय दस्तावेजों पर अभी भी उनकी हिंदू पहचान को दर्शाते हैं।
40 बार अरब देशों का किया दौरा
पुलिस अधिकारी ने कहा, "एक मामले में लखनऊ की एक महिला को कथित तौर पर एक मुस्लिम व्यक्ति ने हिंदू पहचान का इस्तेमाल करते हुए रिश्ते में फंसाया था। उसे नीतू और अन्य लोगों ने धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया।" उन्होंने आगे कहा, "जलालुद्दीन एक गैंग चलाता था। इसके लिए ब्राह्मण, सिख या क्षत्रिय महिलाओं के धर्म परिवर्तन के लिए 15-16 लाख रुपये, OBC के लिए 10-12 लाख रुपये और अन्य जातियों के लिए 8-10 लाख रुपये तय किए गए थे।" जलालुद्दीन गैंग के सदस्यों ने कथित तौर पर लगभग 40 बार इस्लामिक देशों की यात्रा की थी। फिलहाल, पुलिस मामले में आगे की जांच कर रही है।