Corporate Failure: पद्मश्री से संम्मानित बीआर शेट्टी ने एक ऐसा हेल्थकेयर और फाइनेंस साम्राज्य खड़ा किया, जिसकी कीमत अपने चरम पर करीब ₹12 हजार करोड़ थी। लेकिन कुछ ही महीनों में इस साम्राज्य के कुछ हिस्से इतनी बुरी तरह ढह गए कि इसे मात्र ₹74 में बेचना पड़ा। अदालत के फैसलों और फ्रीज की गई संपत्तियों के साथ कॉरपोरेट विफलता का यह एक क्लासिक उदाहरण है। उनकी कंपनी अब भी चल रही लेकिन उसका मालिक बदल चुका है। वहीं शेट्टी अभी भी कानूनी लड़ाइयों में उलझे हुए हैं, उनकी संपत्तियां अब भी फ्रीज़ हैं और कई जांच चल रही हैं।
उडूपी में 1 अगस्त 1942 को जन्मे बीआर शट्टी का जन्म तुलु बोलने वाले एक बंट फैमिली में हुआ था। उन्होंने कन्नड़ मीडियम के एक स्कूल में पढ़ाई की और बाद में मणिपाल से फार्मा की पढ़ाई पूरी की। घर की आर्थिक दिक्कतों के चलते वर्ष 1973 में वह यूएई चले गए।। उस समय यूएई तेजी से उभर रहा था। यूएई पहुंचने पर, शेट्टी ने सबसे पहले एक मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (एमआर) के रूप में काम किया जो देश के पहले एमआर थे। फिर 1975 में उन्होंने “न्यू मेडिकल सेंटर (NMC)” नाम से एक छोटा क्लीनिक शुरू किया। उस क्लीनिक में सिर्फ उनकी पत्नी चंद्रकुमारी शेट्टी डॉक्टर के तौर पर थीं। धीरे-धीरे एनएमसी सऊदी अरब, ओमान, यूरोप और लैटिन अमेरिका तक फैल गई और यह मल्टी-बिलियन डॉलर हेल्थकेयर ब्रांड बन गया।
हेल्थकेयर के बाहर आकर बीआर शेट्टी ने वर्ष 1980 में प्रवासी वर्कर्स के लिए मनी ट्रांसफर सर्विस यूएई एक्सचेंज शुरू की। वर्ष 2003 में उन्होंने अबू धाबी में नियोफार्मा (Neopharma) नाम से एक फार्मा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट बनाई। फिर 2014 में उन्होंने इंटरनेशनल फॉरेन एक्सचेंज कंपनी ट्रैवेलैक्स (Travelex) को खरीद लिया। ये सभी ब्रांड्स होल्डिंग कंपनी फिनाब्लर (Finablr) के तहत चलने लगे।
एनएमसी हेल्थ की बात करें तो वर्ष 2012 यह लंदन स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होने वाली यूएई की पहली हेल्थकेयर कंपनी बनी। शुरुआत में कंपनी की वैल्यू $100 करोड़ से अधिक थी, और अपने चरम पर यह $1000 करोड़ से भी ऊपर पहुंच गई। शेट्टी की व्यक्तिगत संपत्ति $350-$400 करोड़ पहुंच गई। उन्हें भारत का पद्मश्री पुरस्कार मिला और बुर्ज खलीफा में अपार्टमेंट्स के अलावा कई लग्जरी संपत्तियां थीं।
बीआर शेट्टी के लिए मामला तब बिगड़ना शुरू हुआ, जब दिसंबर 2019 में अमेरिका की शॉर्ट-सेलिंग फर्म मडी वाटर्स रिसर्च (Muddy Waters Research) की रिपोर्ट में दावा किया गया कि एनएमसी हेल्थ ने अपने कैश बैलेंस को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया है और कर्जों को निवेशकों से छिपाया है। साल 2020 की शुरुआत तक एनएमसी हेल्थ ने $400 करोड़ से अधिक के ऐसे कर्ज को स्वीकार किया, जिसका खुलासा पहले नहीं किया गया था। बाद की जांच में जाली दस्तावेज़, बिना अनुमति के लिए गए कर्ज और कमजोर कॉर्पोरेट गवर्नेंस सामने आए। फरवरी 2020 में शेट्टी ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया और दावा किया कि उन्हें धोखाधड़ी की जानकारी नहीं थी। हालांकि सबूतों से पता चला कि दिक्कतें इतनी बड़ी थी कि सीनियर लीडरशिप की नजरों से इसका बचा रहना संभव नहीं था।
एनएमसी हेल्थ का संकट जल्दी ही यूएई एक्सचेंज और फिनाब्लर तक फैल गया। 8 अप्रैल 2020 को यूके की एक हाईकोर्ट ने NMC हेल्थ को एडमिनिट्रेशन में डाल दिया। 80 से अधिक बैंकों और लेनदारों को भारी नुकसान हुआ। अकेले अबू धाबी कमर्शियल बैंक को करीब $100 करोड़ का नुकसान झेलना पड़ा। वर्ष 2020 से वर्ष 2023 के बीच शेट्टी की संपत्तियां फ्रीज कर दी गईं, उनके खिलाफ कई मुकदमे दायर हुए और कई जगहों पर वित्तीय हेरफेर का मामला सामने आया। अक्टूबर 2025 में दुबई डीआईएफसी कोर्ट ने शेट्टी से एसबीआई को $4.6 करोड़ चुकाने का आदेश दिया। यह $5 करोड़ के कर्ज पर दिए गए व्यक्तिगत गारंटी के बकाया के लिए था।