Snakebite in India: सांप के काटने में भारत नंबर-1, हर साल 13 लाख तक मामले; जानें क्यों बढ़ रहा खतरा
भारत में सांप के काटने का खतरा कितना गंभीर है, इसका खुलासा एक नए वैश्विक अध्ययन ने किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश में हर साल लाखों लोग सांप के जहर का शिकार होते हैं। खासकर ग्रामीण इलाकों और खेतों में रहने वाले लोगों पर इसका खतरा ज्यादा रहता है। बारिश में घटनाएं बढ़ने की आशंका रहती है
भारत में सांप काटने की घटनाओं का बड़ा हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ा है।
भारत में सांप के काटने का खतरा कितना बड़ा है, इसका अंदाजा एक नए वैश्विक अध्ययन से लगाया जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, हर साल देश में बड़ी संख्या में लोग सांप के जहर का शिकार होते हैं, जिससे यह समस्या गंभीर स्वास्थ्य संकट बनती जा रही है। खासकर गांवों और खेतों में रहने वाले लोगों के लिए इसका खतरा ज्यादा रहता है। बारिश के मौसम में सांपों के इंसानी इलाकों के करीब आने से घटनाएं बढ़ने की आशंका रहती है। सबसे चिंता की बात यह है कि कई मामलों में पीड़ित समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते। इलाज में देरी और ग्रामीण क्षेत्रों में मेडिकल सुविधाओं की कमी स्थिति को और गंभीर बना देती है।
वहीं, दुनिया के दूसरे देशों की तुलना में भारत में सांप के काटने के मामलों का आंकड़ा काफी ज्यादा बताया गया है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि किन इलाकों में खतरा ज्यादा है और कौन से जहरीले सांप सबसे ज्यादा जानलेवा साबित होते हैं।
भारत के बाद इन देशों में सबसे ज्यादा मामले
अध्ययन में दुनिया के उन देशों की पहचान की गई है जहां सांप के काटने का खतरा सबसे ज्यादा है। अनुमानित सालाना मामलों के हिसाब से भारत सबसे ऊपर है। इसके बाद नाइजीरिया, इंडोनेशिया और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो का नंबर आता है।
भारत: 13 लाख तक मामले
नाइजीरिया: करीब 6.66 लाख मामले
इंडोनेशिया: करीब 4.90 लाख मामले
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो: करीब 4.67 लाख मामले
रिसर्च के अनुसार, दुनिया के लगभग तीन-चौथाई सांप काटने के मामले सिर्फ 20 देशों में केंद्रित हैं।
किसानों और ग्रामीणों पर सबसे ज्यादा खतरा
भारत में सांप काटने की घटनाओं का बड़ा हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ा है। खेतों में काम करने वाले किसान और मजदूर खास तौर पर जोखिम में रहते हैं। मानसून के दौरान यह खतरा और बढ़ जाता है, क्योंकि बारिश के समय सांप अक्सर सुरक्षित जगह की तलाश में इंसानी बस्तियों और खेतों की ओर आ जाते हैं। बिना जूते खेतों में काम करना, जमीन पर सोना और कच्चे या खुले घरों में रहना भी जोखिम बढ़ा सकता है।
इलाज में देरी बनती है जानलेवा
सांप के काटने के बाद समय पर सही इलाज मिलना बेहद जरूरी है। लेकिन ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में अस्पताल दूर होने के कारण मरीज को इलाज मिलने में काफी समय लग सकता है। कई मामलों में लोग अस्पताल जाने से पहले पारंपरिक इलाज या झाड़-फूंक का सहारा लेते हैं। कुछ स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों में एंटीवेनम और गंभीर मरीजों के लिए जरूरी चिकित्सा सुविधाओं की कमी भी समस्या को बढ़ा सकती है।
भारत के ‘बिग फोर’ जहरीले सांप
भारत में गंभीर सांप काटने के मामलों के लिए चार प्रमुख जहरीली प्रजातियों को आमतौर पर ‘बिग फोर’ कहा जाता है।
Spectacled Cobra
यह कोबरा खेतों के अलावा कई बार इंसानी बस्तियों के आसपास भी दिखाई देता है। इसके जहर से शरीर के तंत्रिका तंत्र पर गंभीर असर पड़ सकता है।
Common Krait
कॉमन क्रेट रात में ज्यादा सक्रिय रहता है। इसके काटने की कई घटनाएं सोते समय होती हैं और पीड़ित को शुरुआत में काटने का पता भी नहीं चल पाता।
Russell’s Viper
रसेल वाइपर को भारत में गंभीर सांप काटने के प्रमुख कारणों में गिना जाता है। इसके जहर से रक्तस्राव, ऊतकों को नुकसान और किडनी से जुड़ी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
Saw-scaled Viper
आकार में छोटा होने के बावजूद यह बेहद जहरीला सांप है। इसके जहर से खून बहने और शरीर में रक्त के जमने की प्रक्रिया प्रभावित होने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
सांप का काटना बना ‘छिपा हुआ’ स्वास्थ्य संकट
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने snakebite envenoming को Neglected Tropical Disease यानी उपेक्षित उष्णकटिबंधीय बीमारी की प्राथमिकता वाली श्रेणी में रखा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सांप काटने के वास्तविक आंकड़े इससे भी ज्यादा हो सकते हैं, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में कई घटनाएं आधिकारिक रिकॉर्ड तक नहीं पहुंचतीं।
बचाव के लिए क्या कदम जरूरी?
विशेषज्ञों के अनुसार, ज्यादा प्रभावित इलाकों में पर्याप्त मात्रा में एंटीवेनम उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है। साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के कर्मचारियों को सांप काटने के मामलों के इलाज की बेहतर ट्रेनिंग देने की जरूरत है। ग्रामीण मजदूरों को सुरक्षित जूते उपलब्ध कराना, लोगों को सांप काटने के बाद सही प्राथमिक कदमों की जानकारी देना और समय पर अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत करना भी इस संकट से निपटने में अहम भूमिका निभा सकता है।