जब बारिश होती है, तो सांप अपने बिलों से बाहर निकल आते हैं। उनके रहने की जगहें पानी में भर जाती हैं। यही वजह है कि वे खेतों, सड़कों और घरों के पास दिखने लगते हैं। बारिश का मौसम उनके लिए नया ठिकाना खोजने का समय होता है।Photo credit: Canva
इंडियन कोबरा
इस सांप की पहचान इसकी फैली हुई फन से होती है। बारिश में ये खेतों, नालियों और गीली जगहों पर पाया जाता है। बारिश में मेंढक और चूहे ज्यादा दिखते हैं, जिनका पीछा करते हुए कोबरा भी इंसानी बस्तियों के पास आ जाता है। Photo credit: Canva
कॉमन करैत
करैत रात में निकलता है और बहुत शांत होता है। बारिश की रातों में यह कभी-कभी घरों में भी घुस जाता है। इसका डंक बहुत खतरनाक होता है, लेकिन दर्द नहीं होता, जिससे लोग देर से इलाज कराते हैं। Photo credit: Canva
रसेल्स वाइपर
मोटा, भारी और फुर्तीला यह सांप बारिश के बाद तेजी से बढ़ी घास में छिपा होता है। ये हमला नहीं करता, लेकिन अगर डर गया तो पीछे नहीं हटता। खेतों में काम करने वाले इसे अक्सर देख लेते हैं। Photo credit: Canva
सॉ-स्केल्ड वाइपर
यह छोटा सांप शुष्क इलाकों में रहता है, लेकिन बारिश होने पर बाहर निकल आता है। अगर इसकी हल्की खड़खड़ाहट सुनाई दे, तो सतर्क हो जाएं। ये अपने शरीर को रगड़कर आवाज करता है, जो चेतावनी होती है। Photo credit: Canva
इंडियन रॉक पायथन
यह विशाल अजगर बारिश के समय जंगलों से बाहर निकल कर सड़कों या गांवों की सीमा तक आ जाता है। ज़्यादातर शांत रहता है और तभी हमला करता है जब उसे छेड़ा जाए। Photo credit: Canva
रैट स्नेक
यह सांप कोबरा जैसा दिखता है लेकिन ज़हरीला नहीं होता। बारिश में यह चूहों और मेंढकों का शिकार करता है, जिससे खेतों और घरों को फायदा होता है। अक्सर बगीचों और घरों के पास दिखता है। Photo credit: Canva
चेकर्ड कीलबैक
ये अर्ध-जलसांप है और बारिश में खूब दिखाई देता है। नहरों, तालाबों और गीले खेतों के पास दिखता है। ज़हरीला नहीं होता, लेकिन डिस्टर्ब किया जाए तो फुफकार सकता है। Photo credit: Canva
ब्रॉन्ज-बैक ट्री स्नेक
यह सांप आमतौर पर पेड़ों में रहता है। लेकिन तेज़ बारिश के समय नीचे उतर आता है और कभी-कभी इमारतों के पास दिख जाता है। यह फुर्तीला होता है और इंसानों से दूर रहना पसंद करता है। Photo credit: Canva
पिट वाइपर
बांस पिट वाइपर और मलबार पिट वाइपर दोनों ही बारिश में ज्यादा एक्टिव हो जाते हैं। ये ज़हरीले होते हैं और पेड़ों या पत्तों में इतने अच्छे से छिपते हैं कि दिखाई नहीं देते। खासकर साउथ इंडिया और वेस्टर्न घाट्स में मिलते हैं। Photo credit: Canva
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