Solar Eclipse 2026 date and time: 17 फरवरी को आसमान में बनेगा ‘आग का छल्ला’, जानिए भारत में नजर आएगा या नहीं और सूतक काल माना जाएगा या नहीं?

Solar Eclipse 2026 date and time: इस साल का पहला सूर्य ग्रहण बस कुछ दिन दूर है। 17 फरवरी को दुनिया के कई हिस्सों में ‘रिंग ऑफ फायर’ का दुर्लभ नजारा दिखाई देगा। लेकिन इस अद्भुत नजारे को भारत में देखा जा सकेगा या नहीं और सूतक काल मान्य होगा या नहीं? आइए जानें

अपडेटेड Feb 11, 2026 पर 6:59 PM
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यह खगोलीय घटना फाल्गुन माह की अमावस्या तिथि को होगी।

Solar Eclipse 2026 date and time: दुनिया बस कुछ ही दिनों में साल 2026 की सबसे बड़ी खगोलीय घटना की गवाह बनने जा रही है। ये साल का पहला सूर्य ग्रहण होगा, जो वलयाकार ग्रहण या ‘रिंग ऑफ फायर’होगा। 17 फरवरी को होने जा रही है इस बेहद दिलचस्प खगोलीय घटना ने दुनिया भर के खगोलविदों और खगोल प्रेमियों का ध्यान खींचा है। हालांकि, हम भारतीयों को थोड़ी निराशा होगी, क्योंकि वे इस दुर्लभ नजारे का दीदार करने से चूक जाएंगे। आइए जानें क्या यह सूर्य ग्रहण हमारे आसमान में दिखाई देगा और क्या सूतक काल के पारंपरिक धार्मिक नियम लागू होंगे?

पहले सूर्य ग्रहण की तारीख और समय

साल का पहला सूर्य ग्रहण मंगलवार, 17 फरवरी, 2026 को होगा। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, यह खगोलीय घटना फाल्गुन माह की अमावस्या तिथि को होगी। यह ग्रहण कई घंटों तक चलेगा। इसका समय इस तरह है :

  • ग्रहण शुरू : दोपहर 03:26
  • ग्रहण खत्म : शाम 07:57

क्या भारत में सूर्य ग्रहण दिखेगा?


दुनिया के कई हिस्सों ‘रिंग ऑफ़ फायर’ का नजारा जहां देखने लायक होगा, वहीं भारत के लोगों के लिए ये निराशा की खबर है। 17 फरवरी, 2026 को होने वाला ये वलयाकार सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा। इस ग्रहण का ज्यादातर हिस्सा दक्षिणी गोलार्ध में नजर आएगा। इसका मतलब है कि चांद की छाया भारतीय उपमहाद्वीप से नहीं गुजरेगी।

सूतक काल के नियम लागू होंगे या नहीं?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल ग्रहण से पहले और उसके दौरान मनाया जाने वाला एक अशुभ है। इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और पूजा-पाठ रोक दी जाती हैं। लेकिन, धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि सूतक के नियम तभी लागू होते हैं जब ग्रहण किसी क्षेत्र में दिखाई दे। चूंकि यह सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा, इसलिए सूतक काल मान्य नहीं होगा।

  • मंदिर खुले रहेंगे।
  • नियमित पूजा-अनुष्ठान बिना किसी रोक-टोक के की जा सकती हैं।
  • खास तौर पर ग्रहण के लिए कोई व्रत रखने की जरूरत नहीं है।

कुंभ राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में होगा ग्रहण

भले ही सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, लेकिन वैदिक ज्योतिष में इसका महत्व है। यह घटना कुंभ राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में होगी। ग्रहों की ये स्थितियां ज्योतिषीय गणनाओं के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।

यहां नजर आएगा ‘रिंग ऑफ फायर’

भारत को छोड़कर दुनिया के कई दूसरे हिस्सों में चांद सूरज के केंद्र को ढकता हुआ नजर आएगा। इससे बाहरी किनारे एक चमकदार रिंग के रूप में दिखाई देंगे। यह वलयाकार सूर्य ग्रहण इन जगहों पर थोड़ा-बहुत दिखेगा :

  • दक्षिणी अफ्रीका में जिम्बाब्वे, नामीबिया और तंजानिया
  • दक्षिण अमेरिका के सुदूर दक्षिणी हिस्से में
  • मॉरिशस
  • अंटार्कटिका का ज्यादातर हिस्सा

भारतीय ‘रिंग ऑफ फायर’ को देखने के क्या करें?

भारत में जो लोग इस अद्भुत और दुर्लभ खगोलीय घटना को देखना चाहते हैं, वे नासा जैसी स्पेस एजेंसियों के लाइव स्ट्रीम के जरिए इसे देख सकते हैं।

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