दुनियाभर में इस समय हंता वायरस का प्रकोप जारी है। इसी बीच एक नई रिसर्च में पता चला कि हंता वायरस बीमारी ठीक होने के कई साल बाद तक भी शरीर में रह सकता है। स्विट्जरलैंड की स्पीज लैबोरेटरी की एक नई रिसर्च में पता चला कि हंता वायरस का एंडीज स्ट्रेन बीमारी ठीक होने के कई साल बाद तक पुरुषों के सीमेन में रह सकता है। स्टडी के मुताबिक, ये वायरस करीब छह साल तक शरीर में बना रह सकता है।
“वायरस” जर्नल में छपी इस स्टडी के बाद हेल्थ एक्सपर्ट्स के बीच इस बात को लेकर चर्चा तेज हो गई कि क्या ठीक हो चुके मरीजों को भी इबोला मरीजों की तरह सेफ-सेक्स संबंधों से जुड़ी सावधानियां अपनानी चाहिए।
रिसर्चर्स ने अपनी रिसर्च में 55 साल के एक व्यक्ति का स्टडी किया, जिसे साल 2016 में साउथ अमेरिका की यात्रा के दौरान एंडीज हंता वायरस हुआ था। जांच में पाया गया कि कुछ महीनों बाद वायरस उसके खून, यूरिन और सांस के सैंपल से पूरी तरह खत्म हो गया था, लेकिन करीब 71 महीने बाद भी उसके सीमेन में वायरस से जुड़े RNA के निशान मौजूद थे। साइंटिस्ट्स ने कहा कि शरीर के टेस्टिस ऐसे स्थान की तरह काम कर सकते हैं, जहां कुछ वायरस लंबे समय तक छिपे रह सकते हैं, भले ही शरीर के बाकी हिस्सों से संक्रमण खत्म हो चुका हो।
एंडीज स्ट्रेन को हंता वायरस का सबसे खतरनाक प्रकार माना जाता है। ये वायरस मुख्य रूप से चिली और अर्जेंटीना के कुछ इलाकों में पाया जाता है और संक्रमित चूहों के पेशाब, लार या मल के संपर्क में आने से फैल सकता है। शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य फ्लू जैसे लगते हैं, लेकिन बाद में मरीज को सांस लेने में गंभीर परेशानी और शरीर के अंगों के काम करना बंद होने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। पहले की कई स्टडी में ये भी सामने आया है कि हंता वायरस कार्डियोपल्मोनरी सिंड्रोम के कुछ मामलों में मौत का खतरा 40 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।
केवल एक मरीज पर हुआ स्टडी
एक्सपर्ट्स ने साफ कहा है कि अभी तक एंडीज हैन्टावायरस के सेक्सुअल ट्रांसमिशन के जरिए फैलने का कोई पक्का मामला सामने नहीं आया है। उन्होंने ये भी बताया कि ये रिसर्च केवल एक मरीज पर की गई थी, इसलिए किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले और बड़े स्तर पर स्टडी की जरूरत है। रिसर्च के दौरान वैज्ञानिक सीमेन सैंपल से जीवित वायरस को अलग नहीं कर पाए, लेकिन लंबे समय तक वायरल जेनेटिक मटीरियल मिलने से ये संकेत जरूर मिला कि वायरस पुरुषों के रिप्रोडक्टिव ट्रैक्ट में सालों तक रह सकता है।
हेल्थ एक्सपर्ट्स ने इस रिसर्च की तुलना इबोला और ज़ीका वायरस से की है, जो ठीक होने के बाद भी लंबे समय तक शरीर में रह सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, कुछ वायरस सालों तक छिपे रह सकते हैं, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है।