Kedarnath News: केदारनाथ जाने के लिए श्रद्धालुओं ने बुक की लग्जरी एंबुलेंस, गेट खोलकर देखा तो पुलिस के उड़े होश

Uttarakhand News: उत्तराखंड पुलिस ने दोनों गाड़ियां जब्त कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने जब इन दोनों एंबुलेंसों को रोककर जांच की तो चौंकाने वाला सच सामने आया। दोनों में कोई मरीज मौजूद नहीं था। बल्कि एंबुलेंस में आराम से बैठे कुछ तीर्थयात्री केदारनाथ धाम जा रहे थे। गाड़ी में मौजूद ड्राइवरों ने बताया कि चारधाम यात्रियों को तेजी से पहुंचाने और ट्रैफिक से बचने के लिए किराए पर लिया था

अपडेटेड Jun 17, 2025 पर 2:57 PM
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Uttarakhand News: पुलिस ने जब इन दोनों एंबुलेंसों को रोककर जांच की तो चौंकाने वाला सच सामने आया

Uttarakhand News: उत्तराखंड से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। केदारनाथ जा रहे कुछ श्रद्धालुओं ने ट्रैफिक जाम से बचने के लिए दो लग्जरी एंबुलेंस किराए पर ले ली। वे चाहते थे कि केदारनाथ धाम जाने समय उन्हें रास्ते में कोई जाम ना मिले। इसके लिए श्रद्धालुओं दो VVIP एंबुलेंस को किराए पर लिया था। उत्तराखंड पुलिस ने दोनों गाड़ियां जब्त कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने जब इन दोनों एंबुलेंसों को रोककर जांच की तो चौंकाने वाला सच सामने आया। दोनों में कोई मरीज मौजूद नहीं था। बल्कि एंबुलेंस में आराम से बैठे कुछ तीर्थयात्री केदारनाथ धाम जा रहे थे। गाड़ी में मौजूद ड्राइवरों ने बताया कि चारधाम यात्रियों को तेजी से पहुंचाने और ट्रैफिक से बचने के लिए किराए पर लिया था।

टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) के मुताबिक, सोनप्रयाग में भीड़ को चीरती हुई दो एंबुलेंस की चमकती हुई फ्लैशिंग लाइट्स और तेज सायरन ने केदारनाथ ट्रेक मार्ग के पास ड्यूटी पर तैनात एक पुलिस दल का ध्यान खींचा। गौरीकुंड की ओर तेजी से बढ़ते वाहन किसी अस्पताल की ओर भागते हुए दिखाई दे रहे थे। हालांकि शनिवार को पुलिस को ऐसी कोई कॉल नहीं मिली। किसी दुर्घटना की सूचना भी नहीं मिली। इस वजह से पुलिस को एंबुलेंस पर कुछ शक हुआ।

एंबुलेंस के अंदर क्या था?


जांच के दौरान एंबुलेंस के अंदर पुलिस को कोई स्ट्रेचर, कोई पट्टी बंधी हुई टांग या घरघराहट वाले मरीज नहीं मिले। इसके बजाय, उन्हें तीर्थयात्रियों की पोशाक पहने तीन लोग मिले, जो शांती से बैठे थे। उन्हें कोई चोट नहीं लगी थी। ड्राइवरों के नाम हरिद्वार के निखिल विल्सन मसीह और अमरोहा के कृष्ण कुमार थे। उन्होंने अधिकारियों को बताया कि इसे सुविधा के लिए किराए पर लिया गया था। एक एंबुलेंस को एक तीर्थयात्री द्वारा बुक की गई थी। जबकि दूसरी दो लोगों को ले जा रही थी।

किराए की टैक्सी की तरह चला रहे थे एंबुलेंस

हरिद्वार से ऊपर की ओर जाते समय ड्राइवरों ने तीन और यात्रियों को उसमें ठूंस लिया जैसे कि एंबुलेंस नहीं बल्कि वह कोई टैक्सी हों। सोनप्रयाग और गौरीकुंड के बीच का खंड आमतौर पर पैदल या तीर्थयात्रियों को लाने-ले जाने वाली साझा शटल सेवा द्वारा पार किया जाता है। गौरीकुंड से असली तीर्थयात्रा शुरू होती है। पुलिस ने कहा कि अधिकारियों को संदेह होने के बाद दोनों वाहनों को एक्रो ब्रिज के पास जब्त कर लिया गया। पुलिस अब यह बात खंगाल रही है कि क्या इस तरह की एंबुलेंस सेवाएं बड़े पैमाने पर किराए पर तो नहीं चलाई जा रही हैं।

पुलिस का बयान

सोनप्रयाग में एक पुलिसकर्मी ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, "असामान्य बात यह थी कि एंबुलेंस गौरीकुंड की ओर बढ़ रही थी। उसमें भी ऐसे लोग थे जो खुद को मरीज बता रहे थे। अगर कोई बीमार है, तो गौरीकुंड की ओर जाने और पैदल चलने का कोई मतलब नहीं है। अगर कोई मेडिकल इमरजेंसी होती, तो एंबुलेंस को सोनप्रयाग, रामपुर और रुद्रप्रयाग की ओर जाना चाहिए था। इसलिए, यह पुलिस टीम के लिए बहुत ही आश्चर्यजनक था।"

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सभी यात्री मौके से फरार

पूछताछ से पहले ही तीनों मूल यात्री सोनप्रयाग में भीड़ के बीच से पैदल ही भाग गए। पुलिस ने दोनों ड्राइवरों के चालान जारी किए और मोटर वाहन अधिनियम के तहत उल्लंघन दर्ज किए। ड्राइवरों ने कहा कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि कितने पैसे में इन्हें बुक किया गया। उन्होंने दावा किया कि वे गाड़ी मालिकों के निर्देशानुसार एंबुलेंस चला रहे थे। उनमें से एक ने कहा, "हमारा काम सिर्फ एंबुलेंस को गौरीकुंड तक ले जाना था।"

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