वैष्णो देवी मंदिर में 95% चांदी नकली! जांच के बाद कैंसर से खतरे की चेतावनी जारी

भक्तगण पूरी श्रद्धा के साथ माता वैष्णो देवी को चांदी की चीजें चढ़ाते हैं। अब इसमें मिलावट की जानकारी सामने आई है और ऐसी मिलावट जो परेशान करने वाली है। सरकारी मिंट के मुताबिक इसमें कैडमियम मिलाया जा रहा है जिससे कैंसर वाली गैस निकलती है। मिलावट का दायरा कितना बड़ा है, अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि ₹500-₹550 करोड़ की चांदी समझी जा रही थी, और निकली महज ₹30 करोड़। समझें पूरा मामला

अपडेटेड Apr 22, 2026 पर 3:41 PM
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माता वैष्णो देवी गलियारे के आस-पास स्थित ज्वैलर्स पर शक जा रहा है कि वह तीर्थयात्रियों को चांदी की मिलावटी चीजें बेच रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर में माता वैष्णो देवी के मंदिर में हर साल लाखों श्रद्धालु तीर्थयात्रा करते हैं और माता वैष्णो देवी को चांदी चढ़ाते हैं। हालांकि अब सामने आ रहा है कि ऐसे श्रद्धालुओं के साथ धोखाधड़ी हो रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि सरकारी टकसाल ने हाल ही में इस मंदिर में चढ़ाई गई कई टन चांदी की जांच की और पाया कि चांदी की इन चीजों में सिर्फ 5-6% ही चांदी है, बाकी कैडमियम और लोहा निकला। चांदी की तुलना में इनकी कीमत बहुत ही कम होती हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा टकसाल के सीनियर अधिकारियों के हवाले से किया गया है।

बता दें कि मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक तिरुपति, सिद्धिविनायक, गुरुवायुर देवस्वम या श्रीकालहस्ती मंदिर जैसे अन्य प्रमुख धार्मिक संस्थानों में इस प्रकार की मिलावट की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है। इससे माता वैष्णो देवी गलियारे के आस-पास स्थित ज्वैलर्स पर शक जा रहा है कि वह तीर्थयात्रियों को चांदी की मिलावटी चीजें बेच रहे हैं।

चांदी के नाम पर करोड़ों की धोखाधड़ी


श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने करीब 20 टन चांदी को स्टैंडर्ड मेल्टिंग और स्टोरेज के लिए सरकारी टकसाल में भेजा। श्राइन बोर्ड को चांदी के बाजार भाव के हिसाब से करीब ₹500-₹550 करोड़ की चांदी मिलने की उम्मीद थी लेकिन शुरुआती जांच से सामने आया कि इसमें तो मुश्किल से सिर्फ ₹30 करोड़ की ही चांदी हो सकती है।

चांदी अभी एक किलो ₹2.75 के भाव पर है तो इसके जैसी दिखने वाली कैडमियम सिर्फ ₹400-₹500 के भाव में मिल रही है। कैडमियम को नंगी आंखों से देने चांदी होने का भ्रम होता है। इसके चढ़ावे वाली चांदी की चीजों में मिले होने पर स्वास्थ्य का भी खतरा मंडरा रहा है। इसकी वजह ये है कि इससे कैंसर पैदा करने वाली गैस निकलती है जिसके चलते भारतीय मानक ब्यूरो ने आम लोगों से जुड़ी चीजों में इसके इस्तेमाल पर रोक लगाया हुआ है।

बता दें कि इसी कैडमियम के चलते टकसाल ने चढ़ावे वाली चांदी के चीजों की जांच करने से इनकार कर दिया था क्योंकि जब चांदी की चीजें पिघलती हैं तो कैडमियम होने पर इसमें कैंसर पैदा करने वाला जहरीला धुआं निकलता है। ऐसे में जब टकसाल को खास उपकरण मिलने, और अधिक चांदी वाली चीजों को सावधानी से अलग करके ही काम शुरू किया गया।

क्या हुई कार्रवाई?

गवर्नमेंट मिंट यानी सरकारी टकसाल ने पिछले एक साल में कई बार इस मुद्दे को औपचारिक रूप से उठाया है। टकसाल ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल और माता वैष्णो देवी मंदिर बोर्ड को पत्र लिखे हैं। हालांकि दोनों में से किसी भी तरफ से अभी तक कोई लिखित कार्रवाई नहीं हुई है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा को जो पत्र भेजा गया है, उसमें टकसाल ने चांदी की चीजों में कैडमियम की मिलावट को लेकर चिंता जताई है। टकसाल ने कैडमियम की अत्यधिक विषैली प्रकृति और इससे सेहत को होने वाले नुकसान के साथ वायु और जल प्रदूषण से पैदा हो रही स्वास्थ्य चिंताओं का भी जिक्र किया है।

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