Weather News: ना चिलचिलाती धूप और ना लू के थपेड़े...मई रहा काफी ठंडा, जानें गर्मी में क्यों हो रही इतनी बारिश

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, 1901 से रिकॉर्ड शुरू होने के बाद यह मई का सबसे ज्यादा बारिश वाला महीना रहा। इस बार पूरे देश में औसतन 126.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो अब तक सबसे ज़्यादा है। बारिश और बादलों की वजह से दिल्ली में दिन का तापमान भी सामान्य से बहुत नीचे रहा

अपडेटेड Jun 03, 2025 पर 9:42 PM
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मई में लगभग सभी राज्यों में मई में बारिश देखने को मिली।

Weather News: देश में इस बार मई का महीना काफी अलग रहा। इस बार मई में ना ज्यादा चिलचिलाती धूप देखने को मिली और ना ही लू के थपड़े झेलने को मिले। दिल्ली-एनसीआर में इस साल मई का महीना पिछले साल की तुलना में ठंडा रहा और जून की शुरुआत भी आंधी-तूफान और बारिश के साथ हुई, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिली। दिल्ली के साथ लगभग सभी राज्यों में मई में बारिश देखने को मिली। अब सवाल उठता है कि ये कैसे संभव हुआ कि मई के महीने में जहां खूब गर्मी पड़ती है वहां तेज बारिश होना लगा

मई रहा काफी ठंडा

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, 1901 से रिकॉर्ड शुरू होने के बाद यह मई का सबसे ज्यादा बारिश वाला महीना रहा। इस बार पूरे देश में औसतन 126.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो अब तक सबसे ज़्यादा है। बारिश और बादलों की वजह से दिल्ली में दिन का तापमान भी सामान्य से बहुत नीचे रहा। औसत अधिकतम तापमान 35.08 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो 1901 के बाद से सातवां सबसे कम है। वहीं, रातों का तापमान भी नीचे रहा, जिससे यह रिकॉर्ड में 59वां सबसे ठंडा मई बन गया।


अप्रैल-मई में बारिश ने तोड़े पिछले रिकॉर्ड

मई 2025 के असामान्य मौसम ने पूरे देश में भारी बारिश लेकर आई। लगभग सभी राज्यों में तेज बारिश देखने को मिली, जिसमें कई जगहों पर भारी से बहुत भारी और अत्यधिक भारी बारिश हुई।

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, इस महीने भारी बारिश (64.5 से 115.5 मिमी) की 1053 घटनाएं, बहुत भारी बारिश (115.6 से 204.5 मिमी) की 262 घटनाएं, और अत्यधिक भारी बारिश (204.5 मिमी से अधिक) की 39 घटनाएं दर्ज की गईं। इन आंकड़ों के हिसाब से यह बीता महीना पिछले पाँच वर्षों में 2021 को छोड़कर सबसे अधिक बारिश वाला रहा।

मई में बारिश का कारण क्या था?

इस बार मई महीने में हुई असामान्य बारिश और ठंडी हवाओं के पीछे कई अहम वजहें रहीं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के वैज्ञानिक ओपी श्रीजीत ने इस मौसम में आई बड़ी बदलावों के लिए तीन मुख्य कारण बताए:

मानसून का समय से पहले आना

  • अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में दो दबाव क्षेत्र (डिप्रेशन) बनना
  • पश्चिमी विक्षोभ का लंबे समय तक सक्रिय रहना

क्या है पश्चिमी विक्षोभ?

पश्चिमी विक्षोभ आमतौर पर सर्दियों में, यानी दिसंबर से फरवरी के बीच, उत्तर भारत में बारिश और बर्फबारी लाते हैं। लेकिन इस बार मई के आखिरी हफ्ते तक ये सिस्टम सक्रिय रहे। आईएमडी के प्रमुख मृत्युंजय महापात्र के मुताबिक, अभी तक उत्तर-पश्चिम भारत में मानसून पूरी तरह से नहीं पहुंचा है, लेकिन पश्चिमी विक्षोभ अब भी मौसम को प्रभावित कर रहे हैं, जिससे दिल्ली और आसपास के राज्यों में बार-बार तेज बारिश और आंधी-तूफान देखने को मिल रहे हैं।

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