जब भी आप हवाई सफर करते हैं, तो आपने कभी न कभी एक छोटी-सी लेकिन दिलचस्प बात जरूर देखी होगी। फ्लाइट अटेंडेंट पानी या जूस की बोतल देने से पहले उसका प्लास्टिक रैपर हटा देते हैं, ढक्कन थोड़ा खोलते हैं और फिर उसी रैपर को बोतल के गले में गांठ लगाकर बांध देते हैं।
कई यात्रियों को लगता है कि यह कोई सुरक्षा नियम या एयरलाइन की अनिवार्य प्रक्रिया होगी, लेकिन असल वजह कुछ और ही है। यह दरअसल केबिन क्रू का एक आसान और काम को तेज बनाने वाला तरीका है।
बोतल तैयार है या नहीं, तुरंत हो जाता है पता
फ्लाइट में कम समय के अंदर बड़ी संख्या में यात्रियों को सर्विस देनी होती है। ऐसे में हर बोतल को बार-बार जांचना मुश्किल हो सकता है। रैपर में लगी छोटी-सी गांठ क्रू के लिए एक संकेत की तरह काम करती है। इससे उन्हें तुरंत पता चल जाता है कि कौन-सी बोतल पहले से तैयार है और कौन-सी नहीं। इससे सर्विस के दौरान गलती की संभावना कम हो जाती है और काम तेजी से पूरा होता है।
बोतल पकड़ना हो जाता है आसान
हवाई जहाज की संकरी गलियों में चलते हुए यात्रियों को सामान और ड्रिंक्स सर्व करना आसान काम नहीं होता। रैपर को गांठ लगाकर बांधने से बोतल पकड़ने के लिए एक अतिरिक्त ग्रिप मिल जाती है। इससे बोतल हाथ से फिसलने का खतरा कम होता है और व्यस्त समय में फ्लाइट अटेंडेंट्स को काम करने में सुविधा मिलती है।
प्लास्टिक फैलने से रोकने का आसान तरीका
विमान के अंदर एयर कंडीशनिंग सिस्टम लगातार चलता रहता है, जिससे हल्के प्लास्टिक रैपर हवा में उड़ सकते हैं। इससे केबिन में गंदगी फैल सकती है। रैपर को बोतल से बांध देने पर वह इधर-उधर नहीं उड़ता और बाद में उसे आसानी से कचरे के रूप में इकट्ठा किया जा सकता है।
कम समय में ज्यादा काम करने की तरकीब
खासकर छोटी दूरी की उड़ानों में क्रू के पास यात्रियों की सेवा पूरी करने के लिए सीमित समय होता है। ऐसे में छोटी-छोटी तकनीकें काम को काफी आसान बना देती हैं।
बोतल पर लगी गांठ एक तरह के "रेडी टू सर्व" संकेत की तरह काम करती है, जिससे क्रू बिना समय गंवाए तेजी से सर्विस पूरी कर पाता है।
क्या यह कोई एयरलाइन नियम है?
कई लोगों को लगता है कि बोतल के रैपर में गांठ लगाना विमानन नियम का हिस्सा है, लेकिन ऐसा नहीं है। दुनिया भर में ऐसा कोई आधिकारिक नियम नहीं है जो फ्लाइट अटेंडेंट्स को ऐसा करने के लिए मजबूर करता हो।