Iran vs USA Israel Tension: मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच युद्ध और तनाव ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है। दुनिया भर के बाजार परेशान हैं और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में ब्लॉकेड ने कई देशों की एनर्जी सिक्यॉरिटी के लिए खतरा पैदा कर दिया है। इस बीच सीजफायर के ऐलान ने शांति की ओर कुछ कदम तो बढ़ाए हैं पर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में ईरानी नेवी और अमेरिकी नेवी के बीच चल रहे छद्म युद्ध रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। ऐसे में दूसरे देशों के मालवाहक जहाज निशाने पर आ रहे हैं। इसी बीच न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के एक नए खतरे की ओर सबकी नजर खींची है। आपको बता दें कि हाल ही में ईरान ने दो विशाल कंटेनर जहाजों को जब्त करने के लिए 'फास्ट बोट स्वार्म्स' (तेज नावों का झुंड) का इस्तेमाल किया। इस घटना ने अमेरिकी दावों की पोल खोल दी है, जिसमें कहा गया था कि ईरान की नौसैनिक शक्ति को पंगु बना दिया गया है।
क्या है ईरान की 'स्वार्म टैक्टिक' (Swarm Tactic)?
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) इन छोटी नावों को अपना 'बैकबोन' मानती है। ये कुछ ऐसी ही हैं जैसा कवि बिहारी ने लिखा था कि सतसैया के दोहरे ज्यों नाविक के तीर, देखन में छोटन लगै, घाव करे गंभीर। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ये नावें इतनी छोटी और तेज होती हैं कि रडार की नजर से बचकर 'हिट एंड रन' (हमला करो और भाग जाओ) स्टाइल में ऑपरेशन को अंजाम देती हैं। ये केवल साधारण नावें नहीं हैं। इनमें भारी मशीनगनें, रॉकेट लॉन्चर और कुछ मामलों में एंटी-शिप मिसाइलें भी लगी होती हैं। आमतौर पर एक जहाज को घेरने के लिए एक दर्जन या उससे अधिक नावें एक साथ हमला करती हैं। इससे बड़े जहाज के चालक दल को संभलने का मौका नहीं मिलता।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की चेतावनी और जमीनी हकीकत में फर्क
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में कहा था कि ईरान की पारंपरिक नौसेना लगभग नष्ट हो चुकी है और ये छोटी नावें उनके लिए कोई बड़ा खतरा नहीं हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ये नावें अमेरिकी नाकेबंदी के करीब आईं, तो इन्हें तुरंत खत्म कर दिया जाएगा। दूसरी ओर रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन छोटी नावों को ट्रैक करना और नष्ट करना बड़े युद्धपोतों की तुलना में कहीं अधिक कठिन है। ये नावें तटीय सुरंगों, नौसैनिक अड्डों या नागरिक जहाजों के बीच छिपी रहती हैं, जिससे हवाई हमले के लिए सटीक निशाना लगाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
ईरान की 'लेयर्ड' युद्धनीति
रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में मैरीटाइम सिक्योरिटी कंपनी 'डिप्लुस' के हवाले से बताया है कि ईरान केवल नावों पर निर्भर नहीं है। उसने एक 'लेयर्ड थ्रेट सिस्टम' तैयार किया है। इसमें तटीय मिसाइलें और ड्रोन, समुद्री माइंस और इलेक्ट्रॉनिक इंटरफेरेंस (नेविगेशन में बाधा डालना) जैसी चीजें शामिल हैं। इस सिस्टम का उद्देश्य दुश्मन के निर्णय लेने की क्षमता को धीमा करना और अनिश्चितता पैदा करना है।
फास्ट बोट्स की चुनौतियां और कमियां
वैसे ईरान की ये नावें खतरनाक तो हैं, लेकिन इनकी अपनी सीमाएं भी हैं। गर्मियों में समुद्र की ऊंची लहरों और तेज हवाओं के बीच ये नावें स्थिर नहीं रह पातीं, जिससे निशाना लगाना असंभव हो जाता है। अगर ये नावें किसी आधुनिक युद्धपोत से सीधे टकराती हैं, तो इन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। हवाई सहायता मिलते ही ये नावें बेहद कमजोर साबित होती हैं। युद्धपोतों के मुकाबले इनमें रक्षात्मक कवच (Armor) की भारी कमी होती है।
8 अप्रैल को हुए संघर्ष विराम के बाद उम्मीद थी कि हॉर्मुज का रास्ता सुरक्षित हो जाएगा, लेकिन वाशिंगटन द्वारा ईरान की समुद्री नाकेबंदी के बाद तनाव फिर बढ़ गया है। ईरान की इस नई आक्रामकता से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग उद्योग में डर का माहौल है। इसी का असर है कि जहाजों का बीमा खर्च काफी बढ़ गया है। पूर्व ब्रिटिश रॉयल नेवी वाइस एडमिरल डंकन पॉट्स का कहना है कि अमेरिका भले ही कहे कि उसने ईरान की नौसेना डुबो दी है, लेकिन वह यह भूल रहा है कि ईरान ने 'असममित युद्ध' (Asymmetric War) में महारत हासिल कर ली है। वे छोटी नावों को मिसाइलों की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं, जिन्हें रोकना बेहद मुश्किल है।