अमेरिका-ईरान की जंग के बाद, अब रूस-यूक्रेन युद्ध भी होगा खत्म! जेलेंस्की के अधिकारी बोले- अब हम समझौते की तरफ बढ़ रहे हैं

Russia Ukraine War: यूरोप में दूसरे विश्व युद्ध के बाद का सबसे खूनी युद्ध अब पांचवें साल में चल रहा है। सार्वजनिक रूप से बातचीत से अब तक ज्यादा नतीजे नहीं निकले हैं, लेकिन यूक्रेन के राष्ट्रपति कार्यालय के प्रमुख किरिलो बुदानोव ने उम्मीद जताई है कि बातचीत अब समझौते की तरफ बढ़ रही है

अपडेटेड Apr 10, 2026 पर 4:48 PM
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Russia Ukraine War: अमेरिका-ईरान की जंग के बाद, अब रूस-यूक्रेन युद्ध भी होगा खत्म!

दुनियाभर की नजर पाकिस्तान में 10-11 अप्रैल को होने वाली अमेरिका और ईरान की बातचीत पर टिकी है, लेकिन इस बीच एक अच्छी खबर रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भी आ रही है। यूक्रेन के रूस के साथ बातचीत करने वाले सबसे बड़े अधिकारी ने कहा है कि रूस के साथ शांति समझौते की दिशा में प्रगति हो रही है। उनका मानना है कि युद्ध खत्म करने का हल ज्यादा दूर नहीं है।

यूरोप में दूसरे विश्व युद्ध के बाद का सबसे खूनी युद्ध अब पांचवें साल में चल रहा है। सार्वजनिक रूप से बातचीत से अब तक ज्यादा नतीजे नहीं निकले हैं, लेकिन यूक्रेन के राष्ट्रपति कार्यालय के प्रमुख किरिलो बुदानोव ने उम्मीद जताई है कि बातचीत अब समझौते की तरफ बढ़ रही है।

बुदानोव: जेलेंस्की के बाद यूक्रेन के सबसे ताकतवार शख्स


बुदानोव पहले यूक्रेन की मिलिट्री इंटेलिजेंस एजेंसी के प्रमुख थे। उन्होंने 4 अप्रैल को Bloomberg को दिए इंटरव्यू में कहा, “सभी समझते हैं कि इस युद्ध को खत्म होना चाहिए। इसलिए ही बातचीत चल रही है। मुझे नहीं लगता कि यह ज्यादा समय लेगी।”

बुदानोव को रूसी सेना पर साहसिक हमलों की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने के लिए भी जाना जाता है। जनवरी में राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने उन्हें अपने राष्ट्रपति कार्यालय का प्रमुख बना दिया। अब वे यूक्रेन की बातचीत टीम में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। ये तीनों तरफा बातचीत अमेरिका, रूस और यूक्रेन के बीच चल रही है, जिसका मकसद युद्ध खत्म करना है।

वे रूस के साथ कैदियों की अदला-बदली की प्रक्रिया की भी देखरेख करते हैं, जिससे सैकड़ों यूक्रेनी कैदियों को घर वापस लाया जा चुका है। हालांकि अब वे सिविलियन पद पर हैं, लेकिन अभी भी लेफ्टिनेंट जनरल का रैंक रखते हैं। इससे उन्हें युद्ध की सैन्य और राजनीतिक दोनों चुनौतियों को समझने का अनोखा नजरिया मिला है।

अब तक दोनों पक्ष 'बहुत ज्यादा मांग' रख रहे थे

बुदानोव ने माना कि अब तक दोनों पक्ष 'बहुत ज्यादा' मांगें रख रहे थे, लेकिन उन्होंने कहा कि अब समझौता करने के लिए दोनों तरफ से रियायतें देने की दिशा में बात बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि रूस को समझौता करने का साफ फायदा है। “हमारे मुकाबले वे अपना खुद का पैसा खर्च कर रहे हैं। ये रकम बहुत भारी है- पहले से ही ट्रिलियनों में पहुंच चुकी है।”

हालांकि, उन्होंने ये नहीं बताया कि टेरिटरी के मुद्दे पर समझौता कैसा हो सकता है, क्योंकि ये बातचीत का सबसे मुश्किल मुद्दा है।

बुदानोव ने कहा, “अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। लेकिन सिद्धांत रूप में, अब हर कोई यह अच्छी तरह समझ गया है कि क्या स्वीकार्य है और क्या नहीं। यह बहुत बड़ी प्रगति है।”

युद्ध के शुरुआती सालों में बुदानोव अपनी आशावादी भविष्यवाणियों के लिए यूक्रेन में चर्चा में रहे थे। लेकिन उनकी इस आशावादी बात को कम से कम कुछ रूसी अधिकारियों ने नहीं माना है।

रूस कह रहा: ज्यादा प्रगाति नहीं हुई

क्रेमलिन के करीबी दो सूत्रों ने कहा कि बातचीत में असल में ज्यादा प्रगति नहीं हुई है। सुरक्षा की गारंटी के मुद्दे पर चर्चा लगभग अटकी हुई है। उन्होंने अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर यह बात कही, क्योंकि बातचीत सार्वजनिक नहीं है।

उनका कहना था कि युद्ध खत्म करने के लिए सिर्फ मॉस्को और कीव के बीच नहीं, बल्कि अमेरिका और यूरोप को भी शामिल करके व्यापक समझौता करना होगा। लेकिन इन देशों के नेता अभी इस बात पर एकमत नहीं हैं कि युद्ध का अंत कैसे होना चाहिए।

एक सूत्र ने कहा कि इस साल बातचीत का एकमात्र ठोस नतीजा यह है कि दोनों पक्षों ने खुलकर एक-दूसरे के सामने अपनी वे स्थितियां रख दी हैं, जिन्हें वे स्वीकार नहीं कर सकते।

दोनों पक्षों ने इस वीकेंड ऑर्थोडॉक्स ईस्टर के मौके पर युद्ध में थोड़ा सा आराम देने का फैसला किया है।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार देर रात आदेश जारी किया कि 11 अप्रैल को शाम 4 बजे से 12 अप्रैल तक रूसी सेना युद्ध रोक देगी। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने पहले ही ईस्टर पर युद्धविराम का प्रस्ताव दिया था। उन्होंने कहा कि यूक्रेन की सेना भी रूस की सेना के समान ही युद्ध रोक देगी।

शांति वार्ता में बड़ी उपलब्धि

यूक्रेन के मुख्य वार्ताकार किरिलो बुदानोव ने कहा कि शांति वार्ता की एक बड़ी सफलता यह है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार को मध्यस्थ के रूप में लगातार जोड़े रखना।

उन्होंने बताया कि यूक्रेन को उम्मीद है कि अमेरिका के टॉप दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर अगले हफ्ते कीव आ सकते हैं। अगर यह यात्रा हुई, तो युद्ध शुरू होने के बाद उनकी यूक्रेन की पहली यात्रा होगी।

हालांकि एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि कीव आने की चर्चा तो हुई है, लेकिन अभी तक कोई तारीख तय नहीं हुई है।

यूक्रेन किसी भी समझौते में अमेरिका से भविष्य में रूस के हमले रोकने के लिए मजबूत सुरक्षा गारंटी चाहता है। यह मुद्दा अमेरिकी दूतों के साथ होने वाली बातचीत में सबसे महत्वपूर्ण होने वाला है।

क्या हैं दोनों पक्षों की मांगें?

पुतिन चाहते हैं कि यूक्रेन अपनी सेना को देश के पूर्वी इलाके डॉनेट्स्क रीजन से पूरी तरह हटा ले, यहां तक कि उन इलाकों से भी जहां रूसी सेना 2014 से अब तक कभी नहीं पहुंची।

दूसरी तरफ यूक्रेन चाहता है कि मौजूदा फ्रंट लाइन, जहां दोनों सेनाएं आमने-सामने हैं, पर ही युद्ध रोक दिया जाए। अमेरिका ने वहां एक "फ्री इकोनॉमिक जोन" बनाने का प्रस्ताव दिया है।

कैसी है दोनों देशों की आर्थिक स्थिति?

यूक्रेन अभी भी यूरोपीय संघ समेत विदेशी सहयोगियों की सैन्य और आर्थिक मदद पर बहुत निर्भर है। अगर अगले दो महीनों में जरूरी फंडिंग नहीं आई, तो यूक्रेन के पास पैसे खत्म हो सकते हैं।

हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान के वीटो की वजह से यूरोपीय संघ की 90 अरब यूरो की मदद का पहला हिस्सा अभी तक नहीं आया है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की शर्तें भी पूरी नहीं हुई हैं।

रूस की अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ रहा है। सेना पर भारी खर्च और पश्चिमी प्रतिबंधों से प्रभावित कंपनियों की मदद से उसका बजट घाटा लगातार बढ़ रहा है।

लेकिन अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध की वजह से वैश्विक तेल की कीमतें बढ़ गई हैं, जिससे पुतिन को अचानक अच्छा आर्थिक फायदा हुआ है। इससे युद्ध चलाने में कुछ राहत मिली है।

बुदानोव ने कहा कि यह फायदा ज्यादा दिनों तक नहीं रह सकता क्योंकि ईरान का युद्ध जल्द खत्म होने के संकेत हैं। अमेरिका और तेहरान के बीच दो हफ्ते का युद्धविराम भी हो गया है।

सैनिकों की संख्या

बुदानोव ने माना कि रूस के पास सैनिकों की कोई कमी नहीं है। जरूरत पड़ने पर वह 2.35 करोड़ (23.5 मिलियन) सैनिकों का रिजर्व जुटा सकता है। यूक्रेन के पास इतनी क्षमता कहीं नहीं है, क्योंकि उसे खुद सैनिकों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा, “यह अनुमान मैंने सैन्य खुफिया प्रमुख रहते हुए 2025 के अंत में तैयार रिपोर्ट से लिया था। मैंने खुद मूल रिपोर्ट पढ़ी थी। रूस के पास सैनिकों की कोई समस्या नहीं है और आने वाले सालों में भी नहीं होगी।”

फिर भी रूस की इस बड़ी संख्या का फायदा मैदान में ज्यादा नहीं दिख रहा है। यूक्रेन ने ड्रोन युद्ध में नई-नई तकनीकें इस्तेमाल करके दोनों तरफ की ताकत को संतुलित रखा हुआ है। इस साल यूक्रेनी सैनिकों ने कई सफल ऑपरेशन भी किए हैं।

अगर बातचीत नाकाम हो गई तो?

जब बुदानोव से पूछा गया कि अगर रूस के साथ बातचीत नाकाम हो गई और युद्ध नहीं रुका तो क्या होगा, तो उन्होंने साफ जवाब दिया, “क्या आप सोचते हैं कि कोई जादू की छड़ी है? सिर्फ दो ही विकल्प हैं- या तो युद्ध या फिर शांति। सिर्फ युद्ध जारी रखना नहीं, बल्कि बातचीत भी जारी रखनी होगी। अगर वे (रूस) इसके लिए तैयार हुए- क्योंकि हो सकता है वे तैयार न हों।”

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