दुनिया पर मंडरा रहा है खाद्य संकट! IMF और वर्ल्ड बैंक की चेतावनी- ईरान युद्ध से आसमान छुएगी खाने-पीने की चीजों की कीमत

Global Food Crisis: बढ़ती कीमतों का सबसे बड़ा असर दुनिया की सबसे कमजोर आबादी और उन देशों पर पड़ेगा जो अपनी खाद्य जरूरतों के लिए दूसरे देशों से इंपोर्ट पर निर्भर हैं। कई 'लो इनकम' वाले देश पहले से ही भारी कर्ज के बोझ तले दबे हैं अब युद्ध की वजह से उन पर और मार पड़ सकती है

अपडेटेड Apr 09, 2026 पर 10:33 AM
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तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने न केवल परिवहन को महंगा बनाया है, बल्कि पूरी सप्लाई चेन को प्रभावित किया है

IMF Warning On Food Crisis: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच दुनिया के लिए एक बुरी खबर सामने आई है। वर्ल्ड तीन सबसे बड़ी संस्थाओं अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक और विश्व खाद्य कार्यक्रम ने एक संयुक्त बयान जारी कर गंभीर चेतावनी दी है। इन संस्थाओं का कहना है कि ईरान युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में जो हलचल मची है, उसका बेहद खतरनाक असर अब दुनिया की खाद्य सुरक्षा पर पड़ेगा।

एनर्जी मार्केट में भारी उथल-पुथल

तीनों संस्थाओं के प्रमुखों ने बुधवार को हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद कहा कि यह युद्ध आधुनिक इतिहास में ऊर्जा बाजारों के लिए सबसे बड़े व्यवधानों में से एक साबित हुआ है। तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने न केवल परिवहन को महंगा बनाया है, बल्कि पूरी सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। युद्ध क्षेत्र में खाद उत्पादन प्रभावित होने और इसके दाम बढ़ने से खेती की लागत बढ़ गई है, जिससे भविष्य में अनाज की पैदावार और उपलब्धता पर संकट खड़ा हो गया है।


गरीब और कम आय वाले देशों पर सबसे ज्यादा मार

बयान में स्पष्ट किया गया है कि बढ़ती कीमतों का सबसे बड़ा असर दुनिया की सबसे कमजोर आबादी और उन देशों पर पड़ेगा जो अपनी जरूरतों के लिए इंपोर्ट पर निर्भर हैं। कई लो इनकम वाले देश पहले से ही भारी कर्ज के बोझ तले दबे हैं। ऐसे में ईंधन और भोजन के बढ़ते दाम सरकारों की उन क्षमताओं को खत्म कर देंगे, जिनसे वे अपने गरीब नागरिकों को सब्सिडी या सुरक्षा प्रदान करते हैं। आयात पर निर्भर देशों में खाद्य असुरक्षा और भुखमरी का जोखिम बढ़ गया है।

'अभी खतरा टला नहीं है'

अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के संघर्ष विराम का ऐलान हो चुका है, लेकिन IMF और वर्ल्ड बैंक का मानना है कि खतरा अभी टला नहीं है। तीनों संगठनों ने अपनी क्षमताओं के बल पर प्रभावित लोगों की मदद करने की बात कही है। वे संकट से प्रभावित अर्थव्यवस्थाओं को स्थिरता और विकास की राह पर वापस लाने के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करने पर काम कर रहे हैं।

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