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क्या AI तय करेगा अगली महाशक्ति? मार्क जुकरबर्ग ने चीन को लेकर ऐसा बता दिया जिसने उड़ाई दिग्गजों की नींद

AI Decide Superpower: मेटा के CEO मार्क जुकरबर्ग ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने एनर्जी सप्लाई और डेटा-सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार में तेजी नहीं दिखाई, तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के मामले में वह चीन से पिछड़ सकता है

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Aug 11, 2026 पर 11:20 PM
क्या AI तय करेगा अगली महाशक्ति? मार्क जुकरबर्ग ने चीन को लेकर ऐसा बता दिया जिसने उड़ाई दिग्गजों की नींद
AI Decide Superpower: मार्क जुकरबर्ग ने कहा है कि AI ही तय करेगा कि कौन सा देश महाशक्ति बनेगा

AI Decide Global Superpower: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर दुनिया की दो बड़ी महाशक्तियों अमेरिका और चीन के बीच मुकाबला लगातार तेज हो रहा है। इसी बीच Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि अगर उसने AI के लिए जरूरी एनर्जी और डेटा सेंटर का इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से नहीं बढ़ाया, तो वह इस क्षेत्र में चीन से पिछड़ सकता है। एक नोट में जुकरबर्ग ने कहा कि जो देश एडवांस्ड AI के डेवलपमेंट और इस्तेमाल में आगे रहेंगे, उनका दुनिया में ताकत के संतुलन पर बड़ा असर होगा। इसका असर लोकतंत्र, आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ेगा।

जुकरबर्ग के मुताबिक, आने वाले समय में जो देश अत्याधुनिक AI को विकसित करने और बड़े पैमाने पर अपनाने में सबसे आगे रहेंगे, वे दुनिया के शक्ति संतुलन को प्रभावित करने की स्थिति में होंगे। इसका असर सिर्फ टेक्नोलॉली सेक्टर तक सीमित नहीं रहेगा। बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों, आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। उन्होंने कहा, "जो देश एडवांस्ड AI के डेवलपमेंट और इस्तेमाल में आगे रहेंगे, वे एक नए जियोपॉलिटिकल पावर बैलेंस में योगदान देंगे। यही भविष्य में लोकतांत्रिक मूल्यों, समृद्धि और सुरक्षा की स्थिति तय करेगा।"

क्या अमेरिका को चीन के AI बूम से टेंशन लेनी चाहिए?

सिलिकॉन पर अमेरिका के एक्सपोर्ट कंट्रोल का समर्थन करते हुए जुकरबर्ग ने कहा कि AI को सपोर्ट करने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में चीन की तेजी से हो रही तरक्की वॉशिंगटन के लिए खास चिंता का विषय है। उन्होंने माना कि सिलिकॉन डिजाइन में अमेरिका को बढ़त हासिल है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि एनर्जी कैपेसिटी बढ़ाने और AI के लिए जरूरी फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के मामले में वह पिछड़ रहा है। उन्होंने कहा, "चीन जैसे देश हर दूसरे हफ्ते 1GW से ज्यादा न्यूक्लियर कैपेसिटी शुरू कर रहे हैं। इसलिए कॉम्पिटिशन में बने रहने के लिए हमें एनर्जी और डेटा सेंटर बनाने की रफ़्तार बढ़ानी होगी।"

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