अली लारिजानी ने मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सुप्रीम लीडर बनाए जाने का किया था विरोध! इजरायल के हमले में बेटे की भी गई जान

अली लारिजानी लंबे समय तक ईरान की राजनीति का अहम चेहरा रहे। उन्हें ऐसे नेता के रूप में जाना जाता था जो कट्टरपंथी और मध्यमार्गी गुटों के बीच संतुलन बना सकते थे। सरकार और सेना के बीच तालमेल बैठाने में उनकी बड़ी भूमिका मानी जाती थी, इसी वजह से उन्हें सिस्टम का “ब्रिज” भी कहा जाता था

अपडेटेड Mar 18, 2026 पर 2:04 PM
Story continues below Advertisement
US Iran War: अली लारिजानी ने मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सुप्रीम लीडिर बनाए जाने का किया था विरोध!

ईरान के दिग्गज नेता अली लारिजानी की इजरायल के हवाई हमले में मौत हो गई है। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, इस हमले में उनके बेटे की भी जान चली गई। ईरान की सर्वोच्च सुरक्षा संस्था सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने बयान जारी कर इस खबर की पुष्टि की। हालांकि, हमले की पूरी जानकारी साझा नहीं की गई। इससे पहले इजरायल ने दावा किया था कि उसने रात में किए गए हमले में लारिजानी को निशाना बनाया।

ईरान की राजनीति में मजबूत पकड़

अली लारिजानी लंबे समय तक ईरान की राजनीति का अहम चेहरा रहे। उन्हें ऐसे नेता के रूप में जाना जाता था जो कट्टरपंथी और मध्यमार्गी गुटों के बीच संतुलन बना सकते थे। सरकार और सेना के बीच तालमेल बैठाने में उनकी बड़ी भूमिका मानी जाती थी, इसी वजह से उन्हें सिस्टम का “ब्रिज” भी कहा जाता था।


यूरोपियन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस की वरिष्ठ नीति फेलो एली गेरानमायेह ने कहा, "लारीजानी लंबे समय से सेना और राजनीतिक व्यवस्था के बीच पुल का काम करते रहे हैं। वाशिंगटन के साथ राजनीतिक समझौता करने के उद्देश्य से हाल ही में हुई बातचीत में वे अग्रणी भूमिका निभा रहे थे।"

रणनीतिक फैसलों के केंद्र में थे

लारिजानी देश के बड़े रणनीतिक फैसलों में अहम भूमिका निभाते थे। 2025 में उन्हें दोबारा शीर्ष सुरक्षा पद पर नियुक्त किया गया था। इस पद पर रहते हुए वह अलग-अलग एजेंसियों से सुझाव लेकर नेतृत्व के सामने विकल्प रखते थे और फिर फैसलों को लागू करवाने में भी अहम भूमिका निभाते थे।

ऐसा माना जाता था कि लारीजानी अली खामेनेई उत्तराधिकारी के रूप में उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सुप्रीम लीडर बनाए जाने के विरोधी थे, क्योंकि उनका मानना ​​था कि वंशवाद शासन इस्लामी गणराज्य के सिद्धांतों के साथ खिलवाल करने जैसा है।

परमाणु वार्ता में निभाया अहम रोल

ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी बातचीत में भी लारिजानी का बड़ा योगदान रहा। 2005 में उन्हें मुख्य परमाणु वार्ताकार बनाया गया था। उन्होंने अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ बातचीत में हिस्सा लिया और अपनी व्यवहारिक सोच के कारण एक प्रैक्टिकल नेता की छवि बनाई।

खामेनेई के करीबी माने जाते थे

लारिजानी, ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के करीबी माने जाते थे। उन्होंने ईरान के सरकारी टीवी और रेडियो नेटवर्क का भी नेतृत्व किया, जो देश का प्रमुख प्रचार माध्यम है और जिसका सुरक्षा एजेंसियों से भी गहरा संबंध माना जाता है।

विवाद और अमेरिकी प्रतिबंध

इस साल जनवरी में अमेरिका ने लारिजानी पर प्रतिबंध लगाए थे। उन पर आरोप था कि उन्होंने सरकार विरोधी प्रदर्शनों को दबाने के लिए सुरक्षा बलों का इस्तेमाल किया। हालांकि, लारिजानी ने इन आरोपों पर कभी सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

आखिरी बार कब दिखे थे?

लारिजानी को आखिरी बार 13 मार्च को तेहरान में एक बड़े सरकारी कार्यक्रम में देखा गया था। उस दौरान उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थीं, जिनमें वह लोगों के बीच नजर आ रहे थे।

उससे भी पहले 1 मार्च को ईरान के सरकारी टीवी को दिए इंटरव्यू में अली लारिजानी ने कहा था कि इजरायल ईरान जैसे बड़े और मजबूत देश पर सीधे कब्जा नहीं कर सकता। इसलिए उसका मकसद देश को तोड़ना और कमजोर करना है।

उन्होंने कहा कि इजरायल चाहता है कि ईरान को छोटे-छोटे हिस्सों में बांट दिया जाए, ताकि उसकी ताकत खत्म हो जाए और उसे आसानी से नियंत्रित किया जा सके।

लारिजानी का यह भी कहना था कि इस योजना में अमेरिका भी फंस गया है और वह इजरायल की रणनीति का हिस्सा बन गया है। उनके मुताबिक, अमेरिका और इजरायल दोनों मिलकर ईरान की व्यवस्था को अस्थिर करना चाहते हैं, लेकिन वे इलाके की हकीकत को ठीक से समझ नहीं पा रहे।

क्षेत्र में बढ़ सकता है तनाव

अली लारिजानी की मौत ऐसे समय में हुई है जब ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है। ऐसे में उनकी मौत को बड़ा झटका माना जा रहा है और इससे क्षेत्र में हालात और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।

Ali Larijani: हमले के वक्त अपनी बेटी के घर थे अली लारीजानी, ईरान ने दिया 'शहीद' का दर्जा; सेना ने दी जवाबी हमले की चेतावानी

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।