ईरान से युद्ध के खतरे के बीच इजरायल में नेतन्याहू की कुर्सी पर मंडराया खतरा, बचेंगे या जाएंगे?

विशेषज्ञों का कहना है कि यह नया गठबंधन अभी शुरुआत भर है। चुनाव से पहले और भी गठबंधन बन सकते हैं, जिससे तस्वीर बदल सकती है। इजरायल की राजनीति अभी भी अनिश्चित है। बेनेट-लापिड साथ आ गए हैं, लेकिन नेतन्याहू को चुनौती देना आसान नहीं होगा

अपडेटेड Apr 28, 2026 पर 9:13 PM
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ईरान से युद्ध के खतरे के बीच इजरायल में नेतन्याहू की कुर्सी पर मंडराया खतरा, बचेंगे या जाएंगे?

इजरायल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट और विपक्ष के नेता याइर लापिद ने मिलकर फिर से गठबंधन बनाने का ऐलान किया है। यही दोनों नेता 2021 में साथ आए थे और उन्होंने बेंजामिन नेतन्याहू की 12 साल पुरानी सत्ता को खत्म कर दिया था।

इस बार दोनों नेताओं ने कहा है कि वे “Together” नाम से नई पार्टी बनाकर चुनाव लड़ेंगे और देश में एक “नई शुरुआत” करेंगे। लेकिन शुरुआती सर्वे बता रहे हैं कि यह नया गठबंधन उतना मजबूत नहीं दिख रहा- अलग-अलग लड़ने पर जितनी सीटें मिलतीं, उससे भी कम मिलने का अनुमान है, और नेतन्याहू की पार्टी से भी पीछे रह सकते हैं।

पहले क्या हुआ था?


2021 में जब बेनेट और लापिड साथ आए थे, तब उन्होंने एक अलग तरह की सरकार बनाई थी, जिसमें दाएं, केंद्र और बाएं- सभी विचारधाराओं के दल शामिल थे। पहली बार एक ऐसी पार्टी भी सरकार में शामिल हुई थी, जो इजरायल के फिलिस्तीनी नागरिकों का प्रतिनिधित्व करती है।

उस समय तय हुआ था कि पहले बेनेट प्रधानमंत्री बनेंगे और एक साल बाद लापिड यह जिम्मेदारी संभालेंगे। सरकार ने कुछ काम किए भी- जैसे बजट पास करना और राजनीतिक स्थिरता लाना। लेकिन अंदरूनी झगड़ों और मतभेदों की वजह से 2022 में यह सरकार गिर गई।

अब क्या बदला है?

इस बार बेनेट ने साफ कर दिया है कि वे “अरब पार्टियों” के साथ गठबंधन नहीं करेंगे और सिर्फ “जायोनिस्ट” पार्टियों को साथ रखना चाहते हैं। इससे फिलिस्तीनी नागरिकों को राजनीति से बाहर करने की आलोचना भी हो रही है।

फिलिस्तीन मुद्दे पर रुख

दोनों नेता फिलिस्तीन के मुद्दे पर ज्यादा नरम नहीं माने जाते। लापिड कभी-कभी “दो देशों के समाधान” की बात करते हैं, लेकिन बेनेट खुले तौर पर फिलिस्तीनी देश के खिलाफ हैं

इस वजह से गाजा और वेस्ट बैंक के लोगों के लिए इस गठबंधन से कोई बड़ा बदलाव आने की उम्मीद कम ही मानी जा रही है।

नेतन्याहू अभी भी मजबूत

हालांकि कई लोग नेतन्याहू से नाराज हैं, खासकर उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों और हाल की घटनाओं को लेकर, लेकिन फिर भी उनकी पकड़ पूरी तरह कमजोर नहीं हुई है। उनकी राष्ट्रवादी छवि अभी भी काफी लोगों को पसंद आती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह नया गठबंधन अभी शुरुआत भर है। चुनाव से पहले और भी गठबंधन बन सकते हैं, जिससे तस्वीर बदल सकती है।

इजरायल की राजनीति अभी भी अनिश्चित है। बेनेट-लापिड साथ आ गए हैं, लेकिन नेतन्याहू को चुनौती देना आसान नहीं होगा। आने वाले समय में और राजनीतिक चालें इस मुकाबले को और दिलचस्प बना सकती हैं।

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