Australia Election Results: ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने देश के राष्ट्रीय चुनावों में शानदार जीत दर्ज की है और वे लगातार दूसरी बार बहुमत के साथ सत्ता में लौटने जा रहे हैं। अल्बनीज की अगुआई में लेबर पार्टी ने इस चुनाव में जबरदस्त प्रदर्शन किया है और विपक्षी गठबंधन को करारी शिकस्त दी है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यह जीत अल्बनीज के लिए ऐतिहासिक बन गई है, क्योंकि वे 2004 के बाद पहले ऐसे ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री बन गए हैं, जिन्होंने लगातार दूसरी बार चुनाव जीतकर सत्ता बरकरार रखी है।
दूसरी ओर विपक्ष के नेता और लिबरल-नेशनल गठबंधन के प्रमुख पीटर डटन को खुद उनके गढ़ माने जाने वाले ब्रिसबेन स्थित डिक्सन सीट से हार का सामना करना पड़ा। उन्हें लेबर पार्टी की अली फ्रांस ने हराकर बड़ा राजनीतिक झटका दिया। ऑस्ट्रेलिया की राष्ट्रीय प्रसारक ABC ने भी विपक्षी लिबरल-नेशनल गठबंधन चुनाव हारने का ऐलान कर दिया है।
यह पराजय विपक्षी गठबंधन के लिए एक बड़ी राजनीतिक हार है, क्योंकि किसी पार्टी के मुख्य नेता का अपनी ही सीट से हार जाना 2007 के बाद पहली बार हुआ है। इससे पहले 2007 में डटन के राजनीतिक गुरु और पूर्व प्रधानमंत्री जॉन हॉवर्ड भी सिडनी में अपनी सीट हार गए थे। अब 17 साल बाद डटन को भी उसी प्रकार की शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा है।
लेबर पार्टी की आक्रामक रणनीति
चुनाव के दिन 62 वर्षीय अल्बनीज ने स्पष्ट रूप से विश्वास जताया था कि जनता उन्हें और उनकी पार्टी को बहुमत के साथ फिर से चुनेगी। पांच हफ्तों के चुनाव प्रचार अभियान में उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी डटन की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया। कुछ महीने पहले तक गठबंधन जनमत सर्वे में आगे था, लेकिन धीरे-धीरे उसे समर्थन खोना पड़ा।
अल्बनीज ने चुनाव प्रचार के दौरान लगातार पीटर डटन की डटन की परमाणु ऊर्जा योजना, मेडिकेयर पर संभावित खतरे और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों से समानता जैसे मुद्दों पर हमला बोला। दूसरी ओर, विपक्ष की ओर से स्पष्ट नीति की कमी, मतदाताओं में असमंजस और ट्रंप जैसी शैली अपनाने की आलोचना ने गठबंधन को नुकसान पहुंचाया।
चुनावी नतीजे आने के बाद अल्बनीज ने जनता का आभार जताते हुए कहा, "यह लोकतंत्र की जीत है और हम एकजुट ऑस्ट्रेलिया की दिशा में आगे बढ़ते रहेंगे।"
पीटर डटन की रणनीति हुई विफल
62 वर्षीय डटन ने खुद को एक शांत और अनुभवी नेता के रूप में पेश करने की कोशिश की थी, जो ऑस्ट्रेलिया को ग्लोबल अस्थिरता के दौर से निकाल सके। लेकिन उनके प्रयास उस समय विफल हो गए जब जनता ने उनके नेतृत्व को नकार दिया। उनके चुनाव प्रचार की शैली की तुलना अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से की गई, जिसने उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया।