Tarique Rahman: बांग्लादेश की सियासत के लिए आज यानी 25 दिसंबर 2025 का दिन ऐतिहासिक होने जा रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे और 'बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी' (BNP) के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान करीब 17 साल के निर्वासन के बाद लंदन से वतन लौट रहे हैं। आज करीब 11:20 बजे उनका विमान ढाका एयरपोर्ट पर लैंड होगा। इसे BNP के लिए किसी 'संजीवनी' से कम नहीं माना जा रहा है, क्योंकि अगले साल 12 फरवरी 2026 को होने वाले आम चुनावों में वे प्रधानमंत्री पद के सबसे बड़े दावेदार हैं।
लंदन में क्या कर रहे थे तारिक रहमान?
2008 में इलाज के बहाने लंदन गए तारिक ने वहां से अपनी पार्टी की कमान संभाले रखी। निर्वासन के बावजूद वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पार्टी के हर छोटे-बड़े फैसले लेते रहे। उन्होंने BNP को टूटने से बचाया और उसे संगठित रखा। 2015 में उन्होंने लंदन में एक पब्लिक रिलेशंस कंपनी खोली। दिलचस्प बात यह है कि शुरुआत में दस्तावेजों में उनकी नागरिकता 'ब्रिटिश' दर्ज थी, जिसे बाद में सुधारकर 'बांग्लादेशी' किया गया।
उन पर मनी लॉन्ड्रिंग और हत्या की साजिश जैसे दर्जनों केस थे, लेकिन हाल ही में यूनुस सरकार के तहत उन्हें लगभग सभी मामलों में बरी कर दिया गया, जिससे उनकी वापसी का रास्ता साफ हुआ।
स्वागत को लेकर हो रही भव्य तैयारी
BNP ने अपने नेता के स्वागत के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। पार्टी का दावा है कि ढाका के बाहरी इलाके पुरबाचल (300-फुट रोड) पर होने वाले स्वागत समारोह में 20 लाख से ज्यादा लोग जुटेंगे। कुछ रिपोर्ट्स में यह संख्या 50 लाख तक होने का अनुमान है। भारी भीड़ की आशंका को देखते हुए ढाका एयरपोर्ट पर 24 घंटे के लिए बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। सिर्फ टिकट वाले यात्रियों को ही अंदर जाने की अनुमति है। एयरपोर्ट से सीधे वे अपनी मां खालिदा जिया से मिलने 'एवरकेयर अस्पताल' जाएंगे, जो लंबे समय से बीमार हैं।
भारत के लिए क्या हैं मायने?
तारिक रहमान की वापसी भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिए एक नया मोड़ साबित हो सकती है। तारिक ने साफ किया है कि उनकी विदेश नीति दिल्ली या रावलपिंडी (पाकिस्तान) के पक्ष में होने के बजाय 'बांग्लादेश के हितों' को प्राथमिकता देगी।जानकारों का मानना है कि तारिक की मौजूदगी से BNP और मजबूत होगी, जो कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए भारत के लिए एक बेहतर लोकतांत्रिक ऑप्शन हो सकता है।
वैसे 60 वर्षीय तारिक रहमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती बिखरे हुए राष्ट्र को एकजुट करने और 2026 के चुनावों में अपनी पार्टी को जीत दिलाने की है। शेख हसीना के पतन के बाद खाली हुई सत्ता की कुर्सी पर क्या तारिक कब्जा कर पाएंगे? यह आने वाले कुछ महीने तय करेंगे।