Bangladesh Election 2026: महीनों तक चले राजनीतिक घमासान और हिंसा के दौर के बाद आज, 12 फरवर को बांग्लादेश अपनी नई सरकार चुनने के लिए मतदान कर रहा है। यह देश का 13वां संसदीय चुनाव है, जो न केवल सत्ता का भविष्य तय करेगा बल्कि एक ऐतिहासिक राष्ट्रीय जनमत संग्रह के जरिए यह भी तय करेगा कि देश के संविधान की दिशा क्या होगी। आम चुनाव के मद्देनजर पूरे देश में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं और चुनाव आयोग ने शांतिपूर्ण मतदान के लिए पुख्ता इंतजाम किए है।
12.77 करोड़ मतदाता तय करेंगे बांग्लादेश का मुस्तकबिल
बांग्लादेश के आम चुनाव में इस बार करीब 12.77 करोड़ मतदाता वोट करेंगे। इनमें 6.48 करोड़ पुरुष और 6.28 करोड़ महिला मतदाता शामिल हैं। समावेशी लोकतंत्र की ओर कदम बढ़ाते हुए इस बार 1,220 थर्ड-जेंडर मतदाता भी पंजीकृत है। देश भर के 42,000 से अधिक मतदान केंद्रों पर सुबह 7:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक वोट डाले जाएंगे। मतदान के लिए पारदर्शी मतपेटियों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो बांग्लादेशी चुनावी प्रक्रिया की एक पुरानी पहचान रही है।
किसके-किसके बीच है टक्कर?
बांग्लादेश में आज हो रहे 13वें संसदीय चुनाव में मुख्य मुकाबला दो बड़े राजनीतिक गुटों के बीच माना जा रहा है, क्योंकि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी 'अवामी लीग' को इस चुनाव में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया गया है। चुनावी दौड़ में सबसे आगे बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) है, जिसका नेतृत्व पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान कर रहे हैं, जो 17 साल के निर्वासन के बाद स्वदेश लौटे हैं और प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं।
तारिक रहमान को कड़ी टक्कर बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी दे रही है, जिसके नेता शफीकुर रहमान हैं। जमात ने 11 दलों का एक मजबूत गठबंधन बनाया है जिसमें छात्र आंदोलन से निकले युवा नेताओं की 'नेशनल सिटीजन पार्टी' (NCP) भी शामिल है। इसके अलावा गुलाम मोहम्मद कादर के नेतृत्व वाली जातीय पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व वाला वामपंथी लोकतांत्रिक गठबंधन भी मैदान में हैं, लेकिन असली जंग तारिक रहमान और शफीकुर रहमान के गुटों के बीच ही सिमटी नजर आ रही है।
क्यों खास है इस बार का चुनाव?
इस बार की चुनावी जंग सिर्फ सीटों तक सीमित नहीं है। संसदीय चुनाव के साथ-साथ मतदाता एक महत्वपूर्ण जनमत संग्रह में भी भाग ले रहे हैं। यह वोटिंग प्रस्तावित संवैधानिक सुधारों पर हो रही है, जो भविष्य में बांग्लादेश के राजनीतिक ढांचे और शासन व्यवस्था की रूपरेखा बदल सकते हैं। शाम 4:30 बजे वोटिंग खत्म होते ही मतगणना शुरू हो जाएगी और उम्मीद जताई जा रही है कि 13 फरवरी तक संसद और जनमत संग्रह, दोनों के परिणाम स्पष्ट हो जाएंगे।
कैसे चुनी जाती है बांग्लादेश की सरकार?
बांग्लादेश में एक सदनीय विधायिका है जिसे 'जातीय संसद' कहा जाता है। इसमें कुल 350 निर्वाचन क्षेत्र होते हैं, जहां 'फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट' सिस्टम यानी जिस उम्मीदवार को सबसे ज्यादा वोट मिले, वही विजेता होता है। इस प्रणाली की खास बात यह है कि कभी-कभी कम मार्जिन से मिली जीत भी किसी पार्टी को सीटों के मामले में भारी बढ़त दिला देती है। आज होने वाली यह वोटिंग न केवल अगली सरकार का चेहरा तय करेगी, बल्कि यह भी दिखाएगी कि बांग्लादेश की जनता राजनीतिक स्थिरता और संवैधानिक बदलावों को लेकर क्या सोचती है।