बांग्लादेश में कौन बढ़ा रहा भारत विरोधी एजेंडा? हिंसा की भड़की आग से किसे फायदा...जानें इनसाइड स्टोरी

India-Bangladesh Tension : साल 2024 में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद से ही बांग्लादेश में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए थे और अब हिंसा का एक नया दौर शुरू हो गया है। ग्रेटर बांग्लादेश का सपना देखने वाले रेडिकल इस्लामिक नेता शरीफ उस्मानी हादी की मौत से नाराज लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। कुछ दिनों पहले हादी ने ग्रेटर बांग्लादेश का नया नक्शा खींचा था, जिसमें भारत के नार्थ-ईस्ट पर कब्जे की बात कही गई थी

अपडेटेड Dec 23, 2025 पर 5:06 PM
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बांग्लादेश में अंतरिम सरकार बनने के बाद से मोहम्मद यूनुस अक्सर भारत के खिलाफ बोलते नजर आए हैं।

1971 में जो देश भारत की वजह से अस्तित्व में आया, वही अब हमारे लिए सबसे बड़ा रणनीतिक संकट बनता नजर आ रहा है। बीते डेढ़ साल से जारी दोनों देशों के रिश्तों में उथल-पुथल पिछले 4-5 दिनों से और भी बदतर हो गई है।  फिलहाल बांग्लादेश में हिंसा बदस्तूर जारी है। ढाका से लेकर चटगांव तक भीड़ के प्रदर्शन और उससे जुड़ी हिंसा की खबरें सामने आ रही हैं। 12 दिसंबर को इंकलाब मंच के रेडिकल नेता उस्मान हादी को गोली मार दी गई थी। इसके बाद 18 दिसंबर को हादी का सिंगापुर में निधन हो गया और तब से लेकर अब तक बांग्लादेश में लगातार माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। इसके ठीक बाद चटगांव में एक हिंदू शख्स की लिंचिंग की घटना ने पूरी दुनिया को चौंका दिया। वहीं कट्टरपंथ की चपेट में पहुंचे बांग्लादेश में भारत के खिलाफ खूब जगर उगला  जा रहा है। आइए सिलसिलेवार ढंग से समझने की कोशिश करते हैं कि बांग्लादेश के हालात और वहां भारत के खिलाफ फैलते नफरत के बारे में।

शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद से शुरू हुआ खेल 

साल 2024 में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद से ही बांग्लादेश में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए थे और अब हिंसा का एक नया दौर शुरू हो गया है। ग्रेटर बांग्लादेश का सपना देखने वाले रेडिकल इस्लामिक नेता शरीफ उस्मानी हादी की मौत से नाराज लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। कुछ दिनों पहले हादी ने ग्रेटर बांग्लादेश का नया नक्शा खींचा था, जिसमें भारत के नार्थ-ईस्ट पर कब्जे की बात कही गई थी। इसी साल बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस चीन को यह सुझाव दिया था कि वह बांग्लादेश के जरिये भारत के ‘लैंडलॉक्ड’ नॉर्थईस्ट के साथ व्यापार करे। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए हादी ने भी भारत की ‘सेवन सिस्टर्स’ को निशाने पर लिया था। वहीं इस्मान हादी की हत्या के बाद बांग्लादेश में फैली इस नाराजगी का रुख भारत की तरफ मोड़ा जा रहा है। उसकीकी हत्या के लिए भारत पर आरोप लगाए जा रहे हैं...जो पूरी तरह से बेबुनीयाद नजर आते हैं।


मोहम्मद यूनुस का भारत विरोधी एजेंडा 

बता दें पिछले साल अगस्त में छात्रों के नेतृत्व में हुए एक विद्रोह के बाद बांग्लादेश की तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख़ हसीना को देश छोड़कर भागना पड़ा। शेख हसीना का लगातार 15 साल से चला आ रहा शासन ख़त्म होने के साथ ही बांग्लादेश में नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी। बांग्लादेश छोड़ने के बाद शेख़ हसीना ने भारत में शरण ली और वे तब से भारत में ही हैं। शेख हसीना के कार्यकाल में भारत और बांग्लादेश के रिश्ते काफी मबूत दिखते थे, उनमें पिछले डेढ़ साल में लगातार गिरावट आई है।

बांग्लादेश में अंतरिम सरकार बनने के बाद से मोहम्मद यूनुस अक्सर भारत के खिलाफ बोलते नजर आए हैं। इस साल के शुरुआत में मोहम्मद यूनुस ने चीन में भारत के खिलाफ एक ऐसा बयान दिया था जिससे काफी विवाद हुआ था। यूनुस ने कहा था किस भारत के पूर्वोत्तर के सातों राज्यों को लैंडलॉक्ड (ज़मीन से चारों ओर से घिरा) हैं और बांग्लादेश इस इलाके में समंदर का एकमात्र संरक्षक है। उन्होंने चीन को यह सुझाव दिया कि वह बांग्लादेश के ज़रिये भारत के ‘लैंडलॉक्ड’ नॉर्थईस्ट के साथ व्यापार करे। यूनुस की भारत विरोधी सोच का ही नतीजा है कि जिस देश ने पाकिस्‍तानी अत्‍याचार से मुक्‍त कराया, वहां भारत के खिलाफ जहर उगला जा रहा है।

चुनाव से पहले भयानक हिंसा 

फरवरी 2026 में बांग्लादेश में आम चुनाव का ऐलान किया जा चुका है। फिलहाल आम चुनाव से पहले यहां गंभीर अशांति का माहौल है। अक्सर देखा गया है कि पड़ोसी देशों में चुनाव के दौर में भारत विरोधी बयानबाजी तेज हो जाती है, जिसे राजनीतिक महत्वाकांक्षा रखने वाले लोग अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करते हैं और आमतौर पर इसका ज़्यादा नुकसान नहीं होता। लेकिन इस बार मामला गंभीर हो गया है। रीफ उस्‍मान हादी की हत्‍या के बाद से हालात और भी बिगड़ गए हैं। इसी माहौल के बीच भारतीय उच्चायोग पर खतरनाक हमला हुआ। अंतरिम सरकार इमन हालात से निपटने में पूरी तरह से विफल साबित हो रही है।

भारत के खिलाफ उगला जा रहा जहर 

बांग्लादेश में, भारत विरोधी एजेंडा इस कदर फैलाया जा रहा है कि, वहां सिलीगुड़ी कॉरिडोर को काटने और पूर्वोत्‍तर के 7 राज्‍यों को अलग करने के मंसूबे संजोये जा रहे हैं। यह कॉरिडोर पश्चिम बंगाल में है, जो भारत के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। सिलीगुड़ी कॉरिडोर एक पतला सा रास्ता है। यह सिर्फ 20-22 किलोमीटर चौड़ा है, जिसे 'चिकन नेक' भी कहा जाता है। यह भारत के मुख्य भूभाग को उत्तर-पूर्वी राज्यों से जोड़ता है।

बांग्लादेश के नेताओं को इन हिंसक प्रदर्शनों में यहां तक कहते सुना गया है कि, बांग्लादेश में शांति तभी आएगी जब भारत टुकड़ों में बंटेगा। ये बयान ऐसे समय आए जब ढाका पहले ही पाकिस्तान और चीन के करीब जा रहा। हाल के समय भारत के इन दोनों ही पड़ोसी देशों के बीच बैठकों और मुलाकातों का कई दौर चला है। ऐसे में ये चर्चा है कि पाकिस्तान का भी रोल बांग्लादेश में इस बिगड़ते माहौल के लिए अहम है। कहा तो यही जा रहा कि बांग्लादेश में इन हालात के लिए कट्टरपंथी सोच अहम वजह है। यही वजह है कि भारतीय विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश में बिगड़ते सुरक्षा माहौल पर गहरी चिंता जताई है।

किसे हो रहा है फायदा

ऐसे में अब सवाल उठता है कि बांग्लादेश के इस हालात से किसे फायदा हो रहा है?  इस सवाल के तह तक जाए तो उंगली स्वाभाविक रूप से दूसरे पड़ोसी देश की ओर जाती है। पाकिस्तान के लिए यह स्थिति अनुकूल मानी जा सकती है, क्योंकि बांग्लादेश में भारत के खिलाफ नकारात्मक माहौल बन रहा है। हालात ऐसे बनते जा रहे हैं जैसे ‘पूरब की ओर बढ़ने’ की बात ज़मीन पर उतर रही हो। जनरल असीम मुनीर ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत पर ‘पूरब से’ हमले की खुले तौर पर धमकी दिया था। हाल ही में लगभग 50 साल बाद पहली बार पाकिस्तानी नेवी का एक जहाज़ चटगांव पोर्ट पर आकर रुका था।  कुलमिलाकर बांग्लादेश के हालात भारत के लिए भी चिंता जनक बने हुए हैं।

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