Hasnat Abdullah: 'भारत विरोधी ताकतों को पनाह देंगे और सेवन सिस्टर्स को काट देंगे', बांग्लादेशी नेता ने भारत के खिलाफ उगला जगह

Bangladesh Leader Hasnat Abdullah: हसनत अब्दुल्ला ने ढाका के सेंट्रल शहीद मीनार में एक सभा को संबोधित करते हुए यह विवादास्पद टिप्पणी की। अब्दुल्ला ने कहा, 'हम अलगाववादी और भारत विरोधी ताकतों को पनाह देंगे और फिर हम सेवन सिस्टर्स को भारत से काट देंगे'

अपडेटेड Dec 16, 2025 पर 2:41 PM
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अब्दुल्ला का यह बयान भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव पैदा करने वाला है

National Citizen Party Leader: बांग्लादेश की नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के नेता हसनत अब्दुल्ला ने भारत को लेकर एक बेहद आपत्तिजनक बयान दिया है। अब्दुल्ला ने चेतावनी दी है कि ढाका, भारत के लिए शत्रुतापूर्ण ताकतों जैसे- अलगाववादी समूह को पनाह दे सकता है। इसके साथ ही भारत के 'सेवन सिस्टर्स' (पूर्वोत्तर राज्यों) को देश से काटने में मदद करेगा। अब्दुल्ला का यह बयान भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव पैदा करने वाला है।

'सेवन सिस्टर्स' को अलग करने की दी धमकी

हसनत अब्दुल्ला ने ढाका के सेंट्रल शहीद मीनार में एक सभा को संबोधित करते हुए यह विवादास्पद टिप्पणी की। अब्दुल्ला ने कहा, 'हम अलगाववादी और भारत विरोधी ताकतों को पनाह देंगे और फिर हम सेवन सिस्टर्स को भारत से काट देंगे।' इस बयान पर दर्शकों के एक वर्ग से जोरदार तालियां भी बजीं। बता दें कि 'सेवन सिस्टर्स' में अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा शामिल हैं। इनमें से चार राज्य असम, मेघालय, त्रिपुरा, और मिजोरम सीधे बांग्लादेश के साथ जमीनी सीमा साझा करते हैं, जो इस क्षेत्र की रणनीतिक संवेदनशीलता को दर्शाता है।


लंबे समय से पूर्वोत्तर में अलगाववादी समूहों का रहा है अतीत

भारत लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि पूर्वोत्तर में कई आतंकवादी और अलगाववादी समूह सक्रिय है, जिन्हें विदेशी सह मिली हुई है। त्रिपुरा के नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (NLFT) और ऑल त्रिपुरा टाइगर फोर्स (ATTF) जैसे समूहों को भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने बार-बार बांग्लादेश में स्थित शिविरों और हैंडलर्स से जोड़ा था। ये आतंकवादी हमलों के बाद सुरक्षा बलों से बचने के लिए बांग्लादेश पार कर जाते थे।

पूर्वोत्तर से परे, बांग्लादेश ने हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी (HuJI) और बाद में जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) जैसे इस्लामी चरमपंथी नेटवर्कों को भी आश्रय दिया था, जो पूर्वी भारत को प्रभावित करने वाले कट्टरता और रसद नेटवर्क को सुविधाजनक बनाने के लिए भारतीय एजेंसियों द्वारा चिह्नित किए गए थे।

2009 के बाद संबंधों में बदलाव

यह स्थिति 2009 में शेख हसीना के सत्ता में लौटने के बाद काफी बदल गई। उनकी सरकार ने भारत को निशाना बनाने वाले विद्रोही समूहों के खिलाफ एक बड़ा और निरंतर अभियान शुरू किया, जिसके बाद भारत-बांग्लादेश के सुरक्षा सहयोग में सुधार हुआ था।

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