Rooppur Nuclear Power Plant: बांग्लादेश ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और बिजली संकट से निपटने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल कर लिया है। मंगलवार को बांग्लादेश के पहले परमाणु ऊर्जा केंद्र, 'रूपपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र' में यूरेनियम ईंधन भरने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। 2,400 मेगावाट की क्षमता वाला यह प्रोजेक्ट न केवल देश के बिजली ग्रिड पर दबाव कम करेगा, बल्कि आधुनिक ऊर्जा क्षेत्र में बांग्लादेश की स्थिति को भी मजबूत करेगा।
ऊर्जा संकट से मिलेगी निजात
यह संयंत्र बांग्लादेश की बढ़ती ऊर्जा मांगों को पूरा करने में गेम-चेंजर साबित होगा। पूर्ण रूप से तैयार होने पर इस प्लांट की कुल क्षमता 2,400 मेगावाट होगी। सरकार के अनुसार, जब यह संयंत्र पूरी तरह चालू होगा, तो यह देश की कुल बिजली मांग का लगभग 10% हिस्सा पूरा कर सकेगा। प्रधानमंत्री के सूचना और प्रसारण सलाहकार जाहेद उर रहमान ने बताया कि इससे लगभग 20 लाख लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।
रूस के सहयोग से हासिल की उपलब्धि
रूपपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र बांग्लादेश की अब तक की सबसे बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजना है। इस $11 बिलियन की लागत वाले प्रोजेक्ट को रूस द्वारा वित्तपोषित किया गया है और तकनीकी सहायता भी रूसी विशेषज्ञों द्वारा दी जा रही है। इस परियोजना का निर्माण 2017 में शुरू हुआ था। ईंधन भरने के इस ऐतिहासिक अवसर पर बांग्लादेशी और रूसी अधिकारियों के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने भी वीडियो संदेश के जरिए बधाई दी।
निर्माण और उत्पादन का टाइमलाइन
संयंत्र के पूर्ण रूप से सक्रिय होने की प्रक्रिया चरणों में पूरी होगी:
यूनिट-1: पहली इकाई का निर्माण पूरा हो चुका है, जिससे अगस्त तक लगभग 300 मेगावाट बिजली ग्रिड को मिलने की उम्मीद है।
यूनिट-2: दूसरी इकाई का काम 2027 के अंत या 2028 की शुरुआत तक पूरा होने की संभावना है।
ईंधन लोडिंग के बाद अब 'कंट्रोल्ड न्यूक्लियर फिशन चेन रिएक्शन' की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिसके लिए कड़े सुरक्षा परीक्षण किए जा रहे हैं।
मिडिल ईस्ट संकट के बीच बढ़ती अहमियत
बांग्लादेश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए 95% तेल और गैस का आयात करता है, जो मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट से आता है। खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव के कारण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से होने वाली ऊर्जा सप्लाई बाधित हुई है। ऐसे संकट के समय में परमाणु ऊर्जा संयंत्र बांग्लादेश के लिए एक आत्मनिर्भर और स्थिर बिजली स्रोत के रूप में उभरेगा, जो गर्मियों के दौरान एयर कंडीशनर के अत्यधिक उपयोग से ग्रिड पर पड़ने वाले दबाव को कम करेगा।