ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने साफ कहा है कि उनका देश ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रही जंग में सीधे शामिल नहीं होगा। उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाया कि हालात चाहे कितने भी खराब क्यों न हों, ब्रिटेन इस संकट का सामना करने के लिए तैयार है। दरअसल, इस जंग की वजह से तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) अभी भी ब्लॉक है, जो दुनिया के लिए बेहद अहम तेल सप्लाई रूट है।
स्टार्मर ने यह भी बताया कि ब्रिटेन इस हफ्ते करीब 35 देशों के नेताओं की एक अहम बैठक आयोजित करेगा, जिसमें इस बात पर चर्चा होगी कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से कैसे खोला जाए। इस बैठक में फंसे हुए जहाजों और नाविकों की सुरक्षा, तेल और जरूरी सामान की सप्लाई बहाल करने जैसे मुद्दों पर बातचीत होगी।
स्टार्मर ने घोषणा की है कि विदेश सचिव यवेट कूपर होर्मुज जलडमरूमध्य में 'जहाजों की आवाजाही' को बहाल करने की योजनाओं पर चर्चा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय नेताओं के एक शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेंगी।
स्टारमर ने अपनी पिछली बातों को दोहराते हुए कहा कि UK मध्य-पूर्व के संघर्ष में शामिल नहीं होगा, और यह कि बढ़ती महंगाई से निपटने का सबसे अच्छा तरीका है तनाव कम करने की कोशिश करना और यह सुनिश्चित करना कि होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुल जाए। उन्होंने कहा कि उपलब्ध हर कूटनीतिक रास्ते को आजमाया जा रहा है।
हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि क्या आम लोगों को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में कोई बदलाव करना चाहिए, तो उन्होंने सीधा जवाब नहीं दिया।
वहीं इससे पहले ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने लोगों को ज्यादा से ज्यादा पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करने की सलाह दी थी।
स्टार्मर ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से जरूरी नहीं कि होर्मुज जलडमरूमध्य तुरंत खुल जाए। साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि ब्रिटेन अपने यूरोपीय सहयोगियों के साथ और मजबूत रिश्ते बनाएगा और NATO के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जारी रखेगा। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब डोनाल्ड ट्रंप ने NATO को “कमजोर” बताया था।
ट्रंप ने दी NATO से बाहर होने की धमकी
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में बड़ा बयान देते हुए कहा है कि वो अमेरिका को NATO से बाहर निकालने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। उन्होंने इस सैन्य गठबंधन को “कागजी शेर” यानी सिर्फ नाम का मजबूत बताया और कहा कि उन्हें पहले से ही इस पर भरोसा नहीं था।
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ब्रिटेन की सैन्य ताकत पहले जैसी नहीं रही। उन्होंने कहा कि यूके के पास अब मजबूत नेवी नहीं है और उसके एयरक्राफ्ट कैरियर भी ठीक से काम नहीं करते। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के बीच NATO की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
जब उनसे पूछा गया कि क्या वो भविष्य में NATO की सदस्यता पर दोबारा विचार करेंगे, तो ट्रंप ने साफ कहा कि यह सिर्फ सोचने की बात नहीं है, बल्कि इससे भी आगे की स्थिति है। उन्होंने यह भी कहा कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी NATO को कमजोर मानते हैं।
ट्रंप के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है, क्योंकि अगर अमेरिका NATO से अलग होता है, तो इसका सीधा असर यूरोप की सुरक्षा और वैश्विक शक्ति संतुलन पर पड़ सकता है।