ब्रिटेन में एंड्रयू माउंटबैटन-विंडसर को “सरकारी पद के दुरुपयोग” के शक में गिरफ्तार किया गया है। उन पर यह भी आरोप है कि उनके संबंध पहले से दोषी ठहराए जा चुके सेक्स अपराधी जेफ्री एपस्टीन से थे। एंड्रयू, किंग चार्ल्स III के छोटे भाई हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह फिलहाल थेम्स वैली पुलिस की हिरासत में हैं। हालांकि, ब्रिटेन के कानून के अनुसार पुलिस ने गिरफ्तार व्यक्ति का नाम आधिकारिक रूप से घोषित नहीं किया है। लेकिन उन्होंने “सरकारी पद के दुरुपयोग” की जांच शुरू करने की बात कही है, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि मामला एंड्रयू से जुड़ा है।
थेम्स वैली पुलिस के असिस्टेंट चीफ कॉन्स्टेबल ओलिवर राइट ने कहा, “पूरी जांच के बाद हमने सरकारी पद के दुरुपयोग के आरोप की जांच शुरू कर दी है। हम जांच की निष्पक्षता और ईमानदारी बनाए रखना चाहते हैं। हमें पता है कि इस मामले में जनता की बहुत रुचि है, और सही समय पर हम अपडेट देंगे।”
ब्रिटेन का कानून क्या कहता है?
ब्रिटेन में किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस के पास यह ठोस आधार होना चाहिए कि अपराध हुआ है और उस व्यक्ति को गिरफ्तार करना जरूरी है।
2013 में नए दिशा-निर्देश बनाए गए थे, जिनके अनुसार इंग्लैंड और वेल्स में पुलिस किसी भी गिरफ्तार व्यक्ति का नाम तब तक सार्वजनिक नहीं करेगी, जब तक उस पर औपचारिक आरोप तय न हो जाएं। सिर्फ खास हालात, जैसे किसी की जान को खतरा हो, तब नाम बताया जा सकता है।
ये नियम 2011 के “न्यूज ऑफ द वर्ल्ड” फोन हैकिंग विवाद के बाद बनाए गए थे। उस समय पत्रकारों पर मशहूर हस्तियों, नेताओं और एक मारी गई स्कूली लड़की मिल्ली डाउलर के फोन हैक करने के आरोप लगे थे। उस विवाद की जांच के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने लॉर्ड जस्टिस लेवेसन को नियुक्त किया था।
कुछ ब्रिटिश मीडिया संस्थानों ने इस नियम की आलोचना की है। उनका कहना है कि अगर आरोपी का नाम सार्वजनिक किया जाए, तो अन्य पीड़ित सामने आ सकते हैं। लेकिन अगर नाम गुप्त रखा जाए, तो पीड़ितों और मीडिया के लिए जानकारी जुटाना मुश्किल हो जाता है।
यह गिरफ्तारी उस समय हुई है, जब हाल ही में अमेरिका में “एपस्टीन फाइल्स” जारी की गई हैं। ब्रिटेन ने भी इस महीने एक बयान जारी कर कहा था कि वह एंड्रयू माउंटबैटन-विंडसर के खिलाफ किसी भी जांच में सहयोग देने को तैयार है।
बकिंघम पैलेस ने कहा था, “राजा ने शब्दों और अभूतपूर्व कदमों के जरिए यह साफ किया है कि उन्हें श्री माउंटबैटन-विंडसर के खिलाफ सामने आ रहे आरोपों को लेकर गहरी चिंता है।”