भारत के खिलाफ WTO पहुंचा चीन, तीन महीने में की दूसरी बार शिकायत, जानें ड्रैगन के पेट में क्यों हो रहा दर्द?

चीनी मंत्रालय का कहना है कि भारत के ये टैरिफ और सब्सिडी अपने घरेलू उद्योगों को गलत तरीके से फायदा पहुंचाते हैं और इससे चीनी कंपनियों के हितों को नुकसान होता है। साथ ही, ये कदम WTO के नियमों के खिलाफ बताए गए हैं। बयान में चीन ने कहा, “हम एक बार फिर भारत से अपील करते हैं कि वह WTO के तहत अपनी जिम्मेदारियों का पालन करे और अपनी गलत नीतियों को तुरंत ठीक करे

अपडेटेड Dec 19, 2025 पर 6:45 PM
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चीन ने भारत के खिलाफ विश्व व्यापार संगठन (WTO) में मामला दर्ज किया है।

चीन ने भारत के खिलाफ एक बार फिर वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन का रुख किया है। शुक्रवार को जारी एक बयान में चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने बताया कि चीन ने भारत के खिलाफ विश्व व्यापार संगठन (WTO) में मामला दर्ज किया हैयह मामला सूचना और संचार तकनीक (ICT) उत्पादों पर भारत के टैरिफ और भारतीय फोटोवोल्टिक (सोलर) सब्सिडी को लेकर दायर किया गया है।

चीनी मंत्रालय का कहना है कि भारत के ये टैरिफ और सब्सिडी अपने घरेलू उद्योगों को गलत तरीके से फायदा पहुंचाते हैं और इससे चीनी कंपनियों के हितों को नुकसान होता है। साथ ही, ये कदम WTO के नियमों के खिलाफ बताए गए हैं। बयान में चीन ने कहा, “हम एक बार फिर भारत से अपील करते हैं कि वह WTO के तहत अपनी जिम्मेदारियों का पालन करे और अपनी गलत नीतियों को तुरंत ठीक करे।”

चीन के आरोप क्या हैं?

चीनी मंत्रालय का कहना है कि भारत के टैरिफ और सब्सिडी अपने घरेलू कंपनियों को फायदा पहुंचाते हैं। इससे चीनी उत्पादों के लिए अनुचित प्रतिस्पर्धा पैदा होती है। चीन का आरोप है कि ये नीतियां WTO के नियमों के खिलाफ हैं। खास तौर पर, यह नेशनल ट्रीटमेंट सिद्धांत और इंपोर्ट सब्स्टीट्यूशन सब्सिडी से जुड़े नियमों का उल्लंघन है, जो WTO में प्रतिबंधित हैं। चीन ने भारत से अपील की है कि वह WTO के तहत अपनी जिम्मेदारियों का पालन करे और इन गलत नीतियों को जल्द से जल्द ठीक करे।


यह पहली बार नहीं है जब चीन ने भारत के खिलाफ WTO का रुख किया हो। इससे पहले भी चीन ने भारत की इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और बैटरी सब्सिडी को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। उस समय भी चीन का कहना था कि भारत की नीतियां अपने घरेलू उद्योगों को गलत तरीके से फायदा पहुंचाती हैं और इससे चीनी कंपनियों के लिए भारतीय बाजार मुश्किल हो जाता है। चीन ने तब भी साफ किया था कि वह अपने घरेलू उद्योगों के हितों की रक्षा के लिए कड़े कदम उठाता रहेगा।

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