China US Tariff War: अमेरिकी दादागिरी के आगे नहीं झुकेगा चीन, ये हैं इसकी 5 सबसे बड़ी वजहें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी ने अब अमेरिका और चीन के बीच आर्थिक युद्ध का रूप ले लिया है। अगर दोनों देशों में टकराव बढ़ता है तो इसका असर चीन से ज्यादा अमेरिका पर पड़ेगा। चीन ने अमेरिका के टैरिफ के असर से बचने के लिए रास्ते तलाशने शुरू कर दिए हैं

अपडेटेड Apr 14, 2025 पर 12:04 PM
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चीन के राष्ट्रपति ने यह साफ कर दिया है कि वह ट्रंप की इस दादागिरी के आगे झुकने वाले नहीं हैं। स्थिति से निपटने के लिए चीन ने दूसरे विकल्पों पर काम करना शुरू कर दिया है।

डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद टैरिफ को लेकर जो रुख दिखाया था, उसने अब अमेरिका और चीन के बीच आर्थिक युद्ध का रूप ले लिया है। ट्रंप ने टैरिफ लगाया, फिर उसे 90 दिनों के लिए वापस लिया। लेकिन, चीन को उन्होंने किसी तरह की राहत नहीं दी। अमेरिका ने चीन के गुड्स पर 145 फीसदी टैरिफ लगाया है। जवाब में चीन ने अमेरिकी गुड्स पर 125 फीसदी टैरिफ लगाया है।

चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping ने यह साफ कर दिया है कि वह ट्रंप की इस दादागिरी के आगे झुकने वाले नहीं हैं। स्थिति से निपटने के लिए चीन ने दूसरे विकल्पों पर काम करना शुरू कर दिया है। अगर चीन की यह कोशिश सफल रहती है तो लंबी अवधि में चीन को सबसे बड़ी महाशक्ति बनने से कोई रोक नहीं पाएगा। उधर, अमेरिका को ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी की बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

चीन के अमेरिका के आगे नहीं झुकने की ये 5 सबसे बड़ी वजहें हैं:


1. चीन की जीडीपी में अमेरिकी निर्यात की ज्यादा हिस्सेदारी नहीं

चीन की जीडीपी में अमेरिकी निर्यात की सिर्फ 2 फीसदी हिस्सेदारी है। अमेरिका के टैरिफ बढ़ाने से चीन पर असर पड़ेगा, लेकिन यह असर इतना ज्यादा नहीं होगा कि चीन की इकोनॉमी गंभीर संकट में फंस जाए। ट्रंप के इस कदम से ज्याा मुश्किल अमेरिकी लोगों और अमेरिकी कंपनियों को आएगी जो लंबे समय चीन से आयातित सस्ते गुड्स पर निर्भर करती आई हैं। एक पूर्व इंडियन डिप्लोमैट ने बताया, "चीन काफी ज्यादा उत्पादन करता रहा है। यह ठीक वैसा ही है कि कोई उत्पादन कर रहा है और कोई उसका इस्तेमाल कर रहा है। सच तो यह है कि अमेरिका अगले 4 साल तक चीन के गुड्स का कोइ विकल्प नहीं तलाश पाएगा।"

2. लंबी अवधि के स्ट्रेटेजिक अलायंस

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने हमेशा इस बात पर जोर दिया है कि बीते 7 दशकों में चीन की बढ़ती ताकत किसी देश की दया की वजह से नहीं है। चीन ने कड़ी मेहनत की है। चीन ने सेमीकंडक्टर्स, क्लीन एनर्जी और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग जैसे संवेदनशील सेक्टर में अपनी मजबूत जगह बनाई है। वह टेक्नोलॉजी के मामले में आत्मनिर्भरता हासिल करने के रास्ते पर बढ़ रहा है।

3. चीन की सरकार का फोकस

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी और सरकार किसी कीमत पर किसी बाहरी शक्ति के आगे झुकने को तैयार नहीं हैं। अगर चीन अमेरिका के आगे झुकता है तो इसे सरकार की कमजोरी के रूप में देखा जाएगा, जिसे कम्युनिस्ट पार्टी कभी पसंद नहीं करेगी। अमरिका पहले भी कुछ खास देशों को डराता रहा है। लेकिन, वह कभी चीन पर दबाव बनाने में सफल नहीं हुआ है। इस बार भी उसके सफल होने के आसार नहीं लग रहे।

4. ग्लोबल इकोनॉमी में अपने रोल पर चीन को भरोसा

चीन को ग्लोबल इकोनॉमी में अपनी बड़ी भूमिका पर भरोसा है। चीन को दुनिया का मैन्युफैक्चरिंग हब मान जाता है। चीन का मानना है कि दुनिया को गुड्स एक्सपोर्ट करने में उसकी भूमिका इतनी ज्यादा है कि अमेरिकी अगर उसके गुड्स के लिए मुश्किल पैदा करता है तो चीन से ज्यादा खुद अमेरिका को नुकसान उठाना पड़ेगा। अमेरिका में इससे महंगाई बढ़ेगी, जिससे अमेरिकी लोगों को काफी मुश्किल होगी।

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5.चीन दूसरे देशों से सहयोग बढ़ाने पर दे रहा जोर

अमेरिकी टैरिफ से निपटने के लिए दुनिया के दूसरे देशों से सहयोग बढ़ाने पर फोकस कर रहा है। उसने इंडिया की तरफ भी दोस्ती का हाथ बढ़ाया है। चीन ने पिछले हफ्ते यूरोपीय यूनियन के साथ सहयोग बढ़ाने का ऐलान किया था। अमेरिका के बाद चीन यूरोप सबसे बड़ा आर्थिक क्षेत्र है। अगर चीन यूरोप के मार्केट में अपना एक्सपोर्ट बढ़ाता है तो उसे अमेरिकी टैरिफ का सामना करने में काफी मदद मिल जाएगी।

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