पलक झपकते ही ट्रेन गायब, 2 सेकंड में पकड़ी 700 KMPH की स्पीड...चीन ने फिर रचा कीर्तिमान

इस टेस्ट में दिखाई गई इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एक्सेलेरेशन तकनीक का इस्तेमाल भविष्य में स्पेस और एविएशन जैसे क्षेत्रों में भी किया जा सकता है। इस उपलब्धि से वैक्यूम पाइपलाइन मैगलेव ट्रांसपोर्ट सिस्टम की संभावनाएं और मजबूत हो गई हैं

अपडेटेड Dec 27, 2025 पर 10:35 PM
Story continues below Advertisement
चीन ने एक ऐसा ट्रायल किया है जो दुनिया भर में ट्रेन के सफर में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।

चीन ने एक ऐसा ट्रायल किया है जो दुनिया भर में ट्रेन के सफर में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। चीन की नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नोलॉजी यानी एनयूडीटी (National University of Defense Technology) की रिसर्च टीम ने सुपरकंडक्टिंग मैग्लेव टेक्नोलॉजी में नया वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम किया है। चीन ने रेल तकनीक के क्षेत्र में एक नया विश्व रिकॉर्ड बना लिया है। हाल ही में किए गए एक टेस्ट में एक सुपरकंडक्टिंग मैगलेव ट्रेन ने सिर्फ़ दो सेकंड में 700 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ ली। इस तरह यह अब तक की सबसे तेज़ ट्रेन बन गई है।

2 सेकंड में पकड़ी 700 KMPH की स्पीड

यह परीक्षण नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने किया। टेस्ट 400 मीटर लंबे मैग्नेटिक लेविटेशन ट्रैक पर हुआ। इसमें करीब एक टन वज़न वाले एक वाहन को बेहद तेज़ रफ्तार तक पहुंचाया गया और फिर उसे सुरक्षित तरीके से रोक दिया गया। इस उपलब्धि को चीन की आधुनिक रेल तकनीक में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।


चीन ने फिर रचा कीर्तिमान

चीन के सरकारी ब्रॉडकास्टर CCTV द्वारा जारी वीडियो में ट्रेन इतनी तेज़ रफ्तार से गुजरती दिखाई देती है कि उसे साफ देख पाना मुश्किल हो जाता है। तेज़ी से निकलते समय वह अपने पीछे हल्की-सी धुंध जैसी एक पतली लकीर छोड़ जाती है। यह ट्रेन सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट की मदद से ट्रैक के ऊपर तैरती हुई चलती है। इसमें ट्रेन और ट्रैक के बीच कोई सीधा संपर्क नहीं होता, जिससे घर्षण लगभग खत्म हो जाता है और ट्रेन बहुत तेज़ गति से आगे बढ़ पाती है।

इस टेस्ट में दिखाई गई इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एक्सेलेरेशन तकनीक का इस्तेमाल भविष्य में स्पेस और एविएशन जैसे क्षेत्रों में भी किया जा सकता है। इस उपलब्धि से वैक्यूम पाइपलाइन मैगलेव ट्रांसपोर्ट सिस्टम की संभावनाएं और मजबूत हो गई हैं। इस सफलता के पीछे काम करने वाली टीम पिछले करीब दस साल से इस प्रोजेक्ट पर मेहनत कर रही है। इसी ट्रैक पर जनवरी महीने में यह टीम पहले ही 648 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार हासिल कर चुकी थी।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।