Elon Musk: क्या ‘Grok’ ने ईरान‑इजरायल हमले की सही तारीख पहले से बता दी थी? मस्क का रिएक्शन हो रहा वायरल

Elon Musk: 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर संयुक्त हमला किया, जिसके बाद हालात अचानक तनावपूर्ण हो गए। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए बहरीन, कुवैत, कतर और यूएई पर हमले किए। इस बीच सोशल मीडिया पर एक अलग ही कहानी वायरल हो गई और दावा किया गया कि एलन मस्क के AI चैटबॉट ‘Grok’ ने इस हमले की तारीख पहले ही “भविष्यवाणी” कर दी थी।

अपडेटेड Mar 01, 2026 पर 9:20 PM
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दुनिया भर में वायरल हो रहा एक दावा यह है कि एलन मस्क की कंपनी xAI का एआई मॉडल Grok अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले की सटीक तारीख “28 फरवरी” पहले से बता चुका था। जब गुरुवार, 28 फरवरी को वास्तव में दोनों देशों ने ईरान पर संयुक्त हमला किया, तो विश्लेषकों और सोशल मीडिया यूजर्स ने यह दावा उठाया कि ग्रॉक ने भविष्य की घटना को लगभग सही तरीके से भांप लिया था। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम की जड़ एक मीडिया‑एक्सपेरिमेंट में छिपी हुई है, जिसमें ग्रॉक सिर्फ एक संभावना‑आधारित अनुमान दे रहा था, न कि गुप्त सैन्य जानकारी साझा कर रहा था।

जेरूसलम पोस्ट की एक्सपेरिमेंट क्या थी?

फरवरी 2026 में एक रिपोर्ट में बताया गया था कि 'द जेरूसलम पोस्ट' ने चार बड़े एआई मॉडल ChatGPT (OpenAI), Gemini (Google), Claude (Anthropic) और Grok (xAI) को एक ही प्रॉम्प्ट देकर पूछा था कि यदि अमेरिका या इजरायल ईरान पर हमला करे, तो यह किस तारीख के आसपास हो सकता है। सभी मॉडल्स को बार‑बार दबाकर “सिंगल डेट” देने के लिए मजबूर किया गया। इनमें से सिर्फ Grok ने बार‑बार 28 फरवरी का जवाब दिया, जबकि बाकी ने अलग‑अलग डेट्स (जैसे 1‑3 मार्च) बताईं।


कैसे लगा ये अनुमान?

Grok ने अपने उत्तर में खुद स्पष्ट किया था कि यह उसका एक हाइपोथेटिकल अनुमान है, जो वैश्विक राजनीतिक तनाव, डिप्लोमेटिक बैठकों और पिछले अनुभवों के आधार पर बनाया गया है। यह जरूरी नहीं था कि यह जानकारी किसी गोपनीय रणनीति से जुड़ी हो; बल्कि इसे इंटरनेट पर उपलब्ध डेटा और न्यूज पैटर्न से तार्किक रूप से संशोधित किया गया था। इसी वजह से विश्लेषकों का कहना है कि यह एक संयोग से ज्यादा एक सटीक गणना लगता है, न कि भविष्य की निश्चित भविष्यवाणी लगती है।

एलन मस्क की प्रतिक्रिया

जब इस अंतर के बावजूद Grok को “सटीक प्रेडिक्टर” के रूप में पेश किया गया, तो एलन मस्क ने ट्विटर जैसे प्लेटफॉर्म पर जवाब दिया कि यह एक मीडिया‑एक्सपेरिमेंट था और ग्रॉक का जवाब भी उसी ढांचे में दिया गया था। उन्होंने यह भी जोर दिया कि ऐसे टेक्नोलॉजी को राजनीतिक फोरकास्टिंग के उपकरण के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए, क्योंकि यह खतरनाक रूप से गलत धारणा फैला सकता है। इस चर्चा के बाद दुनिया भर के विशेषज्ञों ने जोर दिया कि एआई‑अनुमान और वास्तविक सैन्य योजनाएं दो अलग चीजें हैं, और उन्हें गलत तरीके से जोड़ने से राजनीतिक अफवाहें फैल सकती हैं।

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