Iran Crisis: अमेरिका और ईरान के बीच जारी सीजफायर अब पूरी तरह टूटने की कगार पर है। ईरान के साथ जारी शांति वार्ता में आए 'डेडलॉक' और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बेहद नाराज हैं। सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप अब ईरान के खिलाफ फिर से सशस्त्र सैन्य अभियान शुरू करने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। यानी एक बार फिर से खाड़ी में हमलों का नया दौर देखने को मिल सकता है।
ईरान के प्रस्ताव पर ट्रंप का गुस्सा
राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान द्वारा भेजे गए हालिया शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। ट्रंप ने तेहरान के जवाब को 'पूरी तरह से अस्वीकार्य' और 'मूर्खतापूर्ण' बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान बातचीत के दौरान बार-बार अपना रुख बदल रहा है और समय बर्बाद कर रहा है।
ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के नेतृत्व में दो गुट हैं- एक 'नरमपंथी' जो डील करना चाहते हैं और दूसरे 'पागल' जो युद्ध चाहते हैं।
पेंटागन और व्हाइट हाउस में छिड़ी बहस
सीएनएन (CNN) की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के खिलाफ अगले कदम को लेकर ट्रंप प्रशासन के भीतर ही दो फाड़ हो गए हैं। पेंटागन और प्रशासन के कुछ कट्टरपंथी अधिकारी तेहरान पर दबाव बढ़ाने के लिए 'सर्जिकल स्ट्राइक' या सैन्य ठिकानों पर हमले के पक्ष में हैं। वहीं कुछ अधिकारी अभी भी कूटनीति के जरिए रास्ता निकालने की वकालत कर रहे हैं।
वेंटिलेटर पर वैश्विक तेल सप्लाई
होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण दुनिया की तेल सप्लाई चेन बुरी तरह चरमराई हुई है। ईरानी हमलों के डर से कई जहाजों ने अपने ट्रैकर्स बंद कर दिए हैं, जिससे तेल की आवाजाही में भारी गिरावट आई है। तेहरान ने मांग की है कि अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाए और ईरान के तेल निर्यात को बहाल करे। साथ ही, लेबनान में इजरायली सैन्य अभियानों को रोकने की भी शर्त रखी गई है।
चीन दौरे से पहले बड़ा फैसला
डोनाल्ड ट्रंप इसी हफ्ते बीजिंग के दौरे पर जा रहे हैं, जहां वे राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलेंगे। जानकारों का मानना है कि ट्रंप चीन जाने से पहले ईरान पर कोई बड़ा हमला करने का फैसला शायद ही लें, लेकिन उन्होंने अपनी सुरक्षा टीम को हर स्थिति के लिए तैयार रहने को कहा है।
इस बीच अमेरिका ने उन कंपनियों और व्यक्तियों पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं जो चोरी-छिपे चीन को ईरानी तेल निर्यात करने में मदद कर रहे हैं।