अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए आज (14 जनवरी) का दिन काफी अहम हो सकता है। आज अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ पर फैसला सुना सकता है। अमेरिका सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर 9 जनवरी को फैसला सुनाने वाला था। लेकिन, उस दिन कोर्ट ने फैसला आगे के लिए टाल दिया था। ट्रंप ने पिछले साल अप्रैल में रेसिप्रोकल टैरिफ का ऐलान किया था। बाद में उन्होंने इस पर 90 दिनों के लिए रोक लगा दी थी। आखिर में 7 अगस्त से यह लागू हो गया था।
तीन अमेरिकी कोर्ट्स टैरिफ के खिलाफ फैसला दे चुके हैं
Donald Trump ने इंटरनेशनल इमर्जेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत टैरिफ लगाया है। इससे पहले अमेरिका के तीन कोर्ट्स ट्रंप के टैरिफ के खिलाफ फैसला दे चुके हैं। उन्होंने अपने फैसले में कहा था कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर दुनिया के देशों पर टैरिफ लगाया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का व्यापक असर हो सकता है। खासकर इसका असर अमेरिकी सरकार की पॉलिसी पर पड़ेगा।
टैरिफ के ऐलान के बाद कई देशों के साथ अमेरिका की डील
ट्रंप ने हालांकि, अप्रैल में टैरिफ के ऐलान के बाद से दुनिया के कई देशों के साथ ट्रेड डील की है। लेकिन, भारत के साथ अब तक ट्रेड डील नहीं हो सकी है। हालांकि, इस पर दोनों देशों के अधिकारी बातचीत कर रहे हैं। अगर सुप्रीम कोर्ट ट्रंप के टैरिफ के खिलाफ फैसला देता है तो इससे अमेरिकी राष्ट्रपति को बड़ा झटका लगेगा। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट को यह फैसला करना है कि ट्रंप क्या इमर्जेंसी पावर का इस्तेमाल आर्थिक मामलों के लिए कर सकते हैं।
भारत पर अमेरिका ने लगाया है 50 फीसदी टैरिफ
अमेरिका ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाया है। इसमें से 25 फीसदी टैरिफ रूस से तेल खरीदने के लिए पेनाल्टी के रूप में लगाया गया है। नवंबर में यह मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा। इस टैरिफ के विरोध में यह दलील दी गई है कि IEEPA के तहत ट्रंप को दूसरे देशों पर इतना ज्यादा टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है। दूसरे देशों पर टैरिफ लगाने का अधिकार सिर्फ अमेरिकी कांग्रेस को है। हालांकि, ट्रंप और उनके समर्थकों का कहना है कि अमेरिका राष्ट्रपति ने टैरिफ लगाने के लिए अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन नहीं किया है।
ट्रंप 500 टैरिफ लगाने के लिए बना रहे कानून
अमेरिकी राष्ट्रपति ने हाल में एक नए बिल को मंजूरी दी है, जिसके पारित होने पर उन्हें रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 फीसदी टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा। भारत और चीन रूस से क्रूड ऑयल खरीदते हैं। अमेरिका का मानना है कि भारत जैसे देशों के रूस से तेल खरीदने से उसे (रूस) पैसे मिलते हैं, जिसका इस्तेमाल वह यूक्रेन के खिलाफ युद्ध लड़ने के लिए करता है।