US Israel Iran War: अमेरिकी खुफिया विभाग की एक नई रिपोर्ट ने वैश्विक राजनीति में खलबली मचा दी है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन दावों पर सवालिया निशान लग गए हैं, जिनमें उन्होंने ईरान की सैन्य शक्ति को पूरी तरह नष्ट करने की बात कही थी। खुफिया आंकड़ों के मुताबिक ईरान का मिसाइल नेटवर्क आज भी लगभग सुरक्षित है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि तेहरान की हाहाकारी ताकत कम नहीं हुई है।
न्यूज एजेंसी ANI और 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका और इजरायल के जॉइंट मिलिट्री ऑपरेशन, ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के बावजूद ईरान की मिसाइल क्षमता को वह नुकसान नहीं पहुंचा है जिसका दावा व्हाइट हाउस कर रहा था। खुफिया विभाग के क्लासीफाइड असेसमेंट ने ट्रंप प्रशासन के उन दावों को झुठला दिया है जिसमें ईरान की ताकत को तबाह बताया गया था।
खुफिया रिपोर्ट के 5 सबसे बड़े खुलासे
1. 90% अंडरग्राउंड सेंटर अभी भी एक्टिव
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के लगभग 90 प्रतिशत भूमिगत मिसाइल ठिकाने अब भी आंशिक या पूरी तरह से एक्टिव हैं। ट्रंप ने दावा किया था कि ये ठिकाने कुचल दिए गए हैं। लेकिन सैटेलाइट इमेजरी कुछ और ही कहानी कह रही है।
2. स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर फिर कंट्रोल
सामरिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के पास स्थित ईरान के 33 मिसाइल केंद्रों में से 30 पर ईरान ने दोबारा अपनी पहुंच बना ली है। अब केवल 3 ठिकाने ऐसे बचे हैं जहां ईरान की पहुंच नहीं है। इसका मतलब है कि ईरान इस समुद्री रास्ते पर कभी भी अपनी मिसाइलें तैनात कर सकता है।
3. मिसाइलों का जखीरा अब भी सुरक्षित
खुफिया रिपोर्ट बताती है कि युद्ध से पहले ईरान के पास जितनी मिसाइलें और लॉन्चर थे, उनका एक बड़ा हिस्सा आज भी बचा हुआ है। युद्ध से पहले के स्टॉक का लगभग 70 प्रतिशत (बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें) अभी भी ईरान के पास हैं। ईरान ने अपने 70 से 75 प्रतिशत मोबाइल मिसाइल लॉन्चर्स को सुरक्षित बचा लिया है।
4. मरम्मत और नई असेंबली शुरू
'द वॉशिंगटन पोस्ट' की एक रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि तेहरान ने न केवल क्षतिग्रस्त मिसाइलों की मरम्मत कर ली है। बल्कि उन मिसाइलों की असेंबली भी पूरी कर ली है जो युद्ध शुरू होने से पहले उत्पादन के करीब थीं।
5. अमेरिका के पास गोला-बारूद की कमी?
रिपोर्ट में अमेरिकी रक्षा हलकों में इस बात को लेकर भी चिंता जताई गई है कि ईरान के साथ संघर्ष में अमेरिका ने अपने हथियारों का भारी इस्तेमाल किया है। युद्ध के दौरान अमेरिका ने 1000 से अधिक टॉमहॉक मिसाइलें, 1300 पैट्रियट इंटरसेप्टर और 1100 लॉन्ग-रेंज स्टील्थ क्रूज मिसाइलें दागी थीं। इन भंडारों को फिर से भरने में अब अमेरिका को कई साल लग सकते हैं, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है।
यह रिपोर्ट पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के पब्लिक स्टेटमेंट्स पर भी सवाल उठा रही है। उन्होंने कहा था कि 28 फरवरी को शुरू हुए परेशन एपिक फ्यूरी के बाद ईरान की सेना अपंग हो गई है। लेकिन खुफिया रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि ईरान की मारक क्षमता अभी भी काफी मजबूत है।