अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर साइन किया। इसके तहत अमेरिका उन फार्मा कंपनियों की कुछ पेटेंटेड दवाओं पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है, जो आने वाले महीनों में ट्रंप प्रशासन के साथ "मोस्ट फेवर्ड नेशन" प्राइसिंग डील नहीं करने वाली हैं। वहीं जिन कंपनियों ने "मोस्ट फेवर्ड नेशन" प्राइसिंग डील पर साइन किए हैं और जो पेटेंटेड दवाओं और उनके इंग्रीडिएंट्स का प्रोडक्शन अमेरिका में ही करने के लिए वहां सक्रिय तौर पर फैसिलिटीज बना रही हैं, उन पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा।
इसके अलावा जिन कंपनियों के पास प्राइसिंग डील नहीं है, लेकिन वे अमेरिका में पेटेंटेड दवाओं और उनके इंग्रीडिएंट्स के प्रोडक्शन को लेकर फैसिलिटीज लगा रही हैं, उन पर 20 प्रतिशत का टैरिफ लगेगा। लेकिन 4 सालों में यह बढ़कर 100 प्रतिशत हो जाएगा। इस कदम का मकसद दवा बनाने वाली कंपनियों को अपना उत्पादन अमेरिका में शिफ्ट करने और अमेरिकी उपभोक्ताओं को सीधे कम कीमतों पर दवाएं उपलब्ध कराने के लिए मजबूर करना है।
कंपनियों के पास बातचीत करने के लिए अभी कुछ महीने बाकी
एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन के एक सीनियर अधिकारी का कहना है कि कंपनियों के पास 100 प्रतिशत टैरिफ लागू होने से पहले बातचीत करने के लिए अभी भी कुछ महीने हैं। बड़ी कंपनियों के लिए 120 दिन, और बाकी सभी के लिए 180 दिन। अधिकारी ने किसी भी ऐसी कंपनी या दवा का नाम नहीं बताया, जिस पर बढ़े हुए टैरिफ का खतरा हो। लेकिन यह जरूर बताया कि प्रशासन ने बड़ी दवा कंपनियों के साथ कीमतों को लेकर पहले ही 17 समझौते कर लिए हैं। इनमें से 13 समझौते साइन हो चुके हैं।
यह ऑर्डर ट्रंप के तथाकथित 'लिबरेशन डे' की पहली सालगिरह पर आया। इसी दिन अमेरिकी राष्ट्रपति ने दुनिया के लगभग हर देश से आने वाले आयात पर भारी-भरकम नए टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने जिन टैरिफ को रद्द किया, उनमें ये "लिबरेशन डे" टैरिफ भी शामिल थे।
मेटल इंपोर्ट के मामले में क्या बदला
इसके अलावा ट्रंप ने आयातित स्टील, एल्युमीनियम और तांबे पर अपने 50 प्रतिशत टैरिफ के बारे में एक अपडेट जारी किया है। सोमवार से इन धातुओं पर टैरिफ रेट्स "फुल कस्टम्स वैल्यू" के आधार पर तय की जाएंगी, यानि कि वह कीमत जो अमेरिकी ग्राहक नए आदेश के तहत विदेशी धातु खरीदते समय चुकाते हैं। पूरी तरह से स्टील, एल्युमीनियम और तांबे से बने उत्पादों पर ज्यादा देशों के लिए अमेरिका का 50 प्रतिशत टैरिफ जारी रहेगा।
लेकिन प्रशासन अब डेरिवेटिव धातुओं या तैयार माल पर टैरिफ की कैलकुलेशन का तरीका बदल रहा है। जिस उत्पाद में धातु का हिस्सा उसके कुल वजन के 15 प्रतिशत से कम होता है (जैसे परफ्यूम की बोतल का ढक्कन), उस पर अब केवल देश-विशेष टैरिफ ही लागू होंगे। लेकिन जिन उत्पादों में धातु का हिस्सा ज्यादा होता है, उन पर पूरी कीमत पर 25 प्रतिशत का टैरिफ लागू होगा।