अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा युद्ध एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी सेना ने एक ऐसा 'सुसाइड मिशन' तैयार किया है, जो आधुनिक इतिहास का सबसे बड़ा सैन्य ऑपरेशन हो सकता है।
वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्लान का मकसद ईरान के अंदर घुसकर उसके संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) के भंडार को अपने कब्जे में लेना और उसे वहां से बाहर निकालना है।
क्या है ये 'हाई-रिस्क' ऑपरेशन?
यह कोई साधारण हवाई हमला या मिसाइल अटैक नहीं है। इस मिशन के तहत अमेरिकी सैनिकों को ईरान की सरजमीं के काफी अंदर तक उतरना होगा।
ईरान के पास मौजूद करीब 1,000 पाउंड (450 किलो से ज्यादा) रेडियोधर्मी पदार्थ (यूरेनियम) को जब्त करना।
इस ऑपरेशन के लिए हजारों अमेरिकी सैनिकों को ईरान के भीतर घुसना होगा। उन्हें वहां भारी खुदाई की मशीनें ले जानी होंगी और एक अस्थायी रनवे तैयार करना होगा।
इस रनवे का इस्तेमाल भारी मालवाहक जहाजों (Cargo Aircraft) के लिए किया जाएगा, जो उस यूरेनियम को लादकर ईरान से बाहर ले जाएंगे।
खतरे का खेल: हफ्तों तक चलेगा मिशन
सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह मिशन बेहद पेचीदा है। खुदाई करने और रनवे बनाने में कई हफ्ते लग सकते हैं। इतने लंबे समय तक दुश्मन के इलाके में रहना अमेरिकी सैनिकों को ईरानी हमलों के प्रति बेहद संवेदनशील बना देगा। ट्रंप ने इस यूरेनियम को "परमाणु धूल" (Nuclear Dust) का नाम दिया है और वह इसे हर हाल में खत्म करना चाहते हैं।
शांति का प्रस्ताव और '15 पॉइंट' की शर्त
हाल ही में अमेरिका ने ईरान के सामने युद्ध खत्म करने के लिए 15 सूत्रीय फॉर्मूला रखा था। इसकी सबसे बड़ी शर्त यही थी कि ईरान अपना पूरा यूरेनियम भंडार अमेरिका को सौंप दे।
युद्ध शुरू होने से ठीक पहले, ईरान इस बात पर राजी था कि वह यूरेनियम की शुद्धता (Enrichment Level) कम कर देगा, लेकिन वह इसे पूरी तरह सौंपने को तैयार नहीं था।
ट्रंप की डेडलाइन: "2 से 3 हफ्ते में खत्म होगी जंग"
अपने हालिया संबोधन में डोनाल्ड ट्रंप ने दोहराया है कि यह युद्ध बहुत जल्द खत्म होने वाला है। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिकी सेना अगले दो से तीन हफ्तों तक अपना ऑपरेशन जारी रखेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह "दो हफ्ते" वाला दावा असल में इसी गुप्त 'यूरेनियम जब्ती' मिशन की समयसीमा हो सकता है।
अगर अमेरिका इस मिशन में कामयाब होता है, तो वह बिना परमाणु बम गिराए ईरान की परमाणु शक्ति को हमेशा के लिए खत्म कर देगा। लेकिन अगर यह मिशन नाकाम रहा, तो यह एक बड़े क्षेत्रीय या वैश्विक युद्ध की चिंगारी बन सकता है।