Iran-US Conflict: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को बेहद कड़े लहजे में चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा है कि अगर जल्द ही दोनों देशों के बीच शांति समझौता नहीं हुआ, तो ईरान को 'बहुत बुरा वक्त' देखना पड़ेगा। दूसरी तरफ, ईरान ने भी पलटवार किया है। उसका कहना है कि उसको अमेरिका पर भरोसा नहीं है जिससे बातचीत में दिक्कत आ रही है।
ट्रंप का अल्टीमेटम और ईरान का 'अविश्वास'
फ्रांसीसी ब्रॉडकास्टर BFMTV को दिए एक फोन इंटरव्यू में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, 'शांति समझौते पर पहुंचना खुद ईरान के हित में है, उन्हें इसे जल्द से जल्द समझना होगा।' इस चेतावनी पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने नई दिल्ली में कहा, 'ईरान को ट्रंप प्रशासन से बातचीत जारी रखने के संदेश मिले हैं, लेकिन वाशिंगटन के विरोधाभासी बयानों के कारण पाकिस्तान की मध्यस्थता में चल रही यह बातचीत उलझ गई है'।
अराघची ने बीजिंग से मिले राजनयिक समर्थन का स्वागत किया और भारत से भी अपील की कि वह क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए बड़ी भूमिका निभाए।
ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बगेर गालिबफ ने सोशल मीडिया पर साफ किया कि अमेरिका को ईरान के अधिकारों वाले '14-पॉइंट प्रपोजल' को स्वीकार करना ही होगा, वरना यह बातचीत पूरी तरह फेल हो जाएगी।
सीजफायर के बीच इजरायल ने लेबनान में किए भीषण हवाई हमले
एक तरफ अमेरिका-ईरान में जुबानी जंग जारी है, तो दूसरी तरफ जमीनी हालात बदतर होते जा रहे हैं। शुक्रवार को ही लेबनान और इजरायल के बीच संघर्ष विराम को 45 दिनों के लिए बढ़ाया गया था, लेकिन शनिवार को ही इस शांति समझौते की धज्जियां उड़ गईं। इजरायली वायुसेना ने दक्षिणी लेबनान में 24 से ज्यादा गांवों पर बमबारी की। सीमा से 50 किलोमीटर दूर स्थित गांवों को भी निशाना बनाया गया।
संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की शांति की अपीलों के बावजूद इजरायली हमलों के कारण लेबनानी नागरिक एक बार फिर बेरूत और सिडोन की तरफ भागने को मजबूर हैं।
लेबनानी अधिकारियों के मुताबिक, युद्ध शुरू होने से अब तक 2900 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें से 400 लोगों की जान तो सिर्फ इस 'शांति समझौते' के लागू होने के बाद गई है।
हिजबुल्लाह ने जताई नाराजगी
लेबनान के सशस्त्र संगठन हिजबुल्लाह ने अमेरिका समर्थित सुरक्षा तंत्र की योजना की कड़ी आलोचना की है। हिजबुल्लाह का कहना है कि यह लेबनान सरकार द्वारा इजरायल को दी जा रही 'मुफ्त की रियायत' है। स्थानीय नागरिकों का भी कहना है कि जब तक इजरायली बमबारी जारी है, तब तक इसे युद्धविराम कहना उनके जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।