First LNG Shipment Post-War: मिडिल ईस्ट में युद्ध शुरू होने के दो महीने बाद पहली बार एक राहत भरी खबर सामने आई है। LNG से लदा पहला जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर फारस की खाड़ी से बाहर निकल गया है। वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए यह एक बड़ी घटना है, क्योंकि पिछले दो महीनों से ईरान और अमेरिका की आपसी नाकाबंदी के कारण यहां का यातायात लगभग ठप पड़ा था।
Mubaraz टैंकर ने ऐसे पार किया होर्मुज
शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, 'Mubaraz' नामक टैंकर ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि को अंजाम दिया है। इस जहाज ने मार्च की शुरुआत में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दास द्वीप (Das Island) स्थित एडनॉक (ADNOC) की फैसिलिटी से कार्गो लोड किया था। ट्रैकिंग डेटा दिखाता है कि 31 मार्च के बाद इस जहाज ने पहचान छिपाने के लिए अपना सिग्नल भेजना बंद कर दिया था, लेकिन 27 अप्रैल को यह भारत के पश्चिमी हिस्से के पास फिर से दिखाई दिया। वर्तमान में यह जहाज चीन के एक टर्मिनल की ओर बढ़ रहा है और इसके 15 मई तक वहां पहुंचने की उम्मीद है।
युद्ध क्षेत्रों से गुजरते समय जहाजों द्वारा अपने ट्रांसपोंडर बंद करना एक सामान्य रणनीति है। 'Mubaraz' ने भी होर्मुज पार करते समय ऐसा ही किया ताकि वह रडार या हमलों की पकड़ में न आए। हालांकि, इसके मालिक 'एडनॉक' ने इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
भले ही 'Mubaraz' होर्मुज से सफलतापूर्वक निकल गया है, लेकिन अन्य देशों के लिए रास्ता अभी भी चुनौतीपूर्ण है। हाल ही में कतरी LNG ले जाने वाले कई जहाजों ने होर्मुज की ओर रुख किया था, लेकिन अमेरिका-ईरान तनाव को देखते हुए वे बीच रास्ते से ही वापस लौट गए। अप्रैल की शुरुआत में एक खाली LNG टैंकर के बाहर निकलने की खबर आई थी, लेकिन 'मुबारक' पहला ऐसा जहाज है जो ईंधन से लदा हुआ है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
होर्मुज दुनिया का सबसे व्यस्त ऊर्जा मार्ग है। दुनिया की कुल LNG सप्लाई का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। युद्ध के कारण पिछले दो महीनों से यहां ट्रैफिक शून्य के करीब पहुंच गया था। सप्लाई रुकने से वैश्विक बाजार में गैस की किल्लत बढ़ गई थी और कीमतें आसमान छूने लगी थीं।
ग्लोबल एनर्जी मार्केट के लिए जगी उम्मीद
इस सफल ट्रांजिट से उम्मीद जगी है कि आने वाले दिनों में अन्य कंपनियां भी जोखिम उठाकर सप्लाई शुरू कर सकती हैं। अगर यह रास्ता सुचारू होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में कमी आ सकती है और एशिया-यूरोप को ऊर्जा संकट से बड़ी राहत मिल सकती है।