Azizur Rahman: बांग्लादेश में चुनाव से पहले हिंसा जारी, ढाका में पूर्व BNP नेता अजीजुर रहमान की गोली मारकर हत्या

Bangladesh Election: अजीजुर रहमान मुसाब्विर बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के स्वयंसेवक विंग, 'स्वैच्छासेवक दल' में ढाका मेट्रोपॉलिटन नॉर्थ के पूर्व महासचिव थे। उनकी हत्या को विपक्षी खेमे के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है

अपडेटेड Jan 08, 2026 पर 8:26 AM
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बांग्लादेश में फिलहाल चुनावी 'आचार संहिता' लागू है, फिर भी हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है

BNP leader Azizur Rahman Murder: बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनावों से पहले राजनीतिक हिंसा का दौर तेज हो गया है। बीते मंगलवार की रात राजधानी ढाका के व्यस्त मार्केट 'कारवान बाजार' में अज्ञात हमलावरों ने पूर्व BNP नेता अजीजुर रहमान मुसाब्विर की गोली मारकर हत्या कर दी। इस घटना ने देश में चुनावी सुरक्षा और राजनीतिक तनाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

भीड़भाड़ वाले इलाके में अचानक हुई ताबड़तोड़ फायरिंग

यह घटना रात करीब 8:30 बजे कारवान बाजार में 'सुपर स्टार होटल' के पास एक गली में हुई। हमलावरों ने मुसाब्विर को बेहद करीब से निशाना बनाया और उनके पेट में गोली मार दी। उन्हें पास के बीआरबी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस हमले में सूफियान ब्यापारी मसूद नामक एक अन्य व्यक्ति भी घायल हुआ है, जो वैन वर्कर्स यूनियन का महासचिव बताया जा रहा है। उसकी हालत फिलहाल स्थिर है।


कौन थे अजीजुर रहमान मुसाब्विर?

अजीजुर रहमान मुसाब्विर बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के स्वयंसेवक विंग, 'स्वैच्छासेवक दल' में ढाका मेट्रोपॉलिटन नॉर्थ के पूर्व महासचिव थे। उनकी हत्या को विपक्षी खेमे के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। हत्या की खबर फैलते ही कारवान बाजार इलाके में तनाव फैल गया। प्रदर्शनकारियों ने 'सार्क फाउंटेन' चौराहे को ब्लॉक कर दिया और जमकर नारेबाजी की, जिससे यातायात ठप हो गया।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सेना के जवानों को हस्तक्षेप करना पड़ा। देर रात करीब 10:30 बजे सेना ने प्रदर्शनकारियों को हटाकर रास्ता साफ कराया और पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया।

चुनावी माहौल के बीच बढ़ती अस्थिरता

बांग्लादेश में फिलहाल चुनावी 'आचार संहिता' लागू है, फिर भी हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। दिसंबर में इंकलाब मंच के नेता उस्मान हादी की हत्या हुई थी, और हाल ही में एक जुबो दल नेता को भी निशाना बनाया गया था। शेख हसीना के इस्तीफे के बाद से देश में एक संक्रमणकालीन दौर चल रहा है, और इन हत्याओं ने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और सुरक्षा पर दबाव बढ़ा दिया है।

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