Gold at Record High: पहली बार एक औंस गोल्ड की कीमत $5000 के पार पहुंची है। गोल्ड की चमक में यह तेजी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक नीतियों के चलते वैश्विक संबंधों में बनी अनिश्चितता के बीच निवेशकों के सरकारी सोवरेन बॉन्ड्स और करेंसी से बाहर निकलने के चलते आई है। इसके चलते गोल्ड एक हफ्ते में 8% से अधिक उछलकर प्रति औंस $5040 के भाव पर पहुंच गया। सोने में आई इस जबरदस्त तेजी के चलते पिछलेते दो वर्षों में इसकी कीमत दोगुने से भी अधिक हो चुकी है। गोल्ड की यह हालिया तेजी वर्ष 1979 के बाद से सबसे जोरदार तेज उछाल के साथ रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के बाद आई। इस साल गोल्ड 15% से अधिक ऊपर चढ़ चुका है।
गोल्ड ही नहीं, चांदी भी नए मुकाम पर
बढ़ते जियोपॉलिटिल खतरों और डॉलर की कमजोरी के चलते गोल्ड की मांग बेतहाशा बढ़ी है। अमेरिकी डॉलर के एक अहम इंडिकेटर में मई के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट आई, जिससे अधिकतर खरीदारों के लिए सोने-चांदी जैसे प्रेशस मेटल्स अधिक अफोर्डेबल हो गए हैं। इस दौरान सिर्फ गोल्ड ही नहीं, चांदी ने भी नया मुकाम हासिल किया और पिछले कारोबारी सत्र में यह प्रति औंस $100 के पार चला गया।
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक सिंगापुर में सुबह 8:12 बजे गोल्ड की कीमत 1% बढ़कर प्रति औंस $5,035.25 हो गई तो चांदी के भाव भी 2.2% बढ़कर $105.50 पर पहुंच गए। वहीं दूसरी तरफ प्लैटिनम की कीमत में मामूली गिरावट आई, लेकिन यह पहले रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया था, जबकि पैलेडियम के भाव ऊपर चढ़े हैं।
इस कारण बढ़ी रही Gold-Silver की चमक
जब मार्केट में घबराहट बढ़ती है तो गोल्ड की कीमतें तेजी से ऊपर चढ़ती है। इस समय मार्केट में वैश्विक पर जियोपॉलिटिकल टेंशन और अमेरिकी टैरिफ की आंच ने घबराहट बढ़ाई है। इसकी कीमतें ऐसे समय में ऊपर भागी है, जब करेंसी और सरकारी बॉन्ड्स, खासतौर से अमेरिकी गवर्नमेंट बॉन्ड और अमेरिकी ट्रेजरीज जैसे डॉलर वाले एसेट्स जैसे नॉन-इक्विटी एसेट्स टूटे हैं।
ऐसा नहीं है कि सिर्फ अमेरिकी में ही अनिश्चितता का माहौल है बल्कि एशिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में अस्थिरता के चलते पिछले हफ्ते जापान के लॉन्ग और अल्ट्रा-लॉन्ग बॉन्ड्स में भी भारी बिकवाली दिखी थी। सिर्फ जियोपॉलिटिक्स ही नहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ट ट्रंप की घरेलू नीतियां भी निवेशकों को परेशान कर रही है। सबसे अहम तो फिलहाल अमेरिकी फेड के अगले प्रमुख की नियुक्ति पर है कि किसे इसकी कमान मिलने वाली है। यह स्थिति तो तब है, जब अमेरिकी फेड के मौजूदा प्रमुख जेरोम पॉवेल के कार्यकाल के आखिरी दिनों में उन्हें पद से हटाने की बात लगातार ट्रंप कर रहे हैं।