Google, Meta, TikTok को अपने प्लेटफॉर्म पर न्यूज के लिए चुकानी पड़ सकती है कीमत

दुनियाभर में फेसबुक, गूगल जैसी दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनियों के प्लेटफॉर्म पर खबरें आती हैं। यूजर्स सीधे इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए इन खबरों को पढ़ते हैं। इससे इन प्लेटफॉर्म्स का रेवेन्यू बढ़ता है, लेकिन इन न्यूज को तैयार करने वाले जर्नलिस्ट्स को इससे कोई फायदा नहीं होता है

अपडेटेड Apr 28, 2026 पर 12:00 PM
  • Follow Us On Google
  • Add as a Preferred Source on Google
इस कानून के लागू होने पर भारत सहित दुनियाभर में टेक्नोलॉजी कंपनियों पर ऐसी डील के लिए दबाव बढ़ सकता है।

ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने दुनिया की दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनियों को बड़ा झटका दिया है। उसने कहा है कि मेटा, अल्फाबेट (गूगल) और टिकटॉक अगर लोकल मीडिया आउटलेट्स के साथ डील नहीं करती हैं तो उन पर करोड़ों डॉलर का टैक्स लग सकता है। सरकार का मानना है कि ये कंपनियां अपने प्लेटफॉर्म पर लोकल मीडिया आउटलेट्स के न्यूज का इस्तेमाल करती हैं, जिसके लिए उन्हें पैसे चुकाने चाहिए। इस कानून के लागू होने पर भारत सहित दुनियाभर में टेक्नोलॉजी कंपनियों पर ऐसी डील के लिए दबाव बढ़ सकता है

रेवेन्यू पर 2.25 फीसदी टैक्स चुकाना पड़ सकता है

ऑस्ट्रेलिया सरकार ने जो प्रस्ताव तैयार किया है, उसमें बड़ी टेक्नोलॉजी को अपने लोकल रेवेनयू पर 2.25 फीसदी टैक्स चुकाना पड़ सकता है। अगर ये कंपनीयां लोकल मीडिया आउटलेट्स के साथ पेमेंट की डील कर लेती हैं तो उन्हें यह टैक्स नहीं चुकाना पड़ेगा। टेक्नोलॉजी कंपनियों पर टैक्स से जो पैसा आएगा, वह न्यूज कंपनियों को जाएगा। इसका इस्तेमाल ऑस्ट्रेलिया में पत्रकारिता को बढ़ावा देने के लिए होगा।


प्लेटफॉर्म पर न्यूज से टेक कंपनियों की बढ़ती है कमाई

कम्युनिकेशंस मिनिस्टर अनिका वेल्स ने न्यूज कॉन्फ्रेंस में कहा, "लोग सीधे फेसबुक, टिकटॉक और गूगल से खबरें पढ़ रहे हैं। हमारा मानना है कि बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों को उन पत्रकारों की कड़ी मेहनत का भुगतान करना चाहिए, जिनकी खबरों से इन टेक्नोलॉजी कंपनियों का रेवेन्यू बढ़ता है। इन प्लेटफॉर्म्स को मीडिया कंपनियों क साथ डील करनी चाहिए। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो उन्हें बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी।" अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी कंपनियों पर डिजिटल टैक्स लगाए जाने के खिलाफ हैं। उन्होंने डिजिटल टैक्स लगाने वाले देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी है।

ऑस्ट्रेलिया सरकार देश के हित में बना सकती है कानून

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथोनी अल्बानीज ने उसी न्यूज कॉन्फ्रेंस में कहा, "हम संप्रभु देश हैं। मेरी सरकार देश के हित में फैसले लेगी।" ऑस्ट्रेलिया सरकार ने जिस नए टैक्स कानून का प्रस्ताव तैयार किया है, वह नए फाइनेंशियल ईयर से लागू होगा, जो 1 जुलाई से शुरू हो रहा है। वेल्स ने कहा, "नए कानून (न्यूज मीडिया बार्गेनिंग) इनसेंटिव का मतलब है कि अगर अगर कोई प्लेटफॉर्म न्यूज पब्लिशर से डील नहीं करता है तो उस पर लगाए गए टैक्स के जरिए पैसा हमारे पास आएगा। हम इस पैसे को मीडिया कंपनियों को देंगे। यह पैसा मीडिया कंपनियों को उनके एंप्लॉयीज की संख्या के आधार पर मिलेगा।"

यह भी पढ़ें: India vs Pakistan: भारत का क्या ही मुकाबला करेगा पाकिस्तान! डिफेंस का ये आंकड़ा उड़ा देगा इस्लामाबाद के होश

नया कानून 2021 के पुराने कानून की जगह लेगा

सरकार ने कहा है कि नया कानून 2021 के कानून की जगह लेगा। पुराने कानून में टेक्नोलॉजी फर्मों को न्यूज कंटेंट के लिए पेमेंट करना जरूरी था। लेकिन, सरकार का कहना है कि पुराना कानून कारगर नहीं रह गया है। ऑस्ट्रेलिया सरकार के पुराने कानून के आने के बाद मेटा ने कुछ समय के यूजर्स को न्यूज आर्टिकल्स रीपोस्ट करने से रोक दिया था। लेकिन, उसने बाद कई ऑस्ट्रेलियाई मीडिया फर्मों से डील की थी, जो 2024 में एक्सपायर हो गईं।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।