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बांग्लादेश में कट्टरपंथियों को 'प्रोटेक्शन मनी' देने को मजबूर हिंदू, फिर भी पत्रकार की कर दी हत्या

Hindu Journalist Shot In Bangladesh: बर्फ बनाने की फैक्टरी के मालिक और नरैल से प्रकाशित होने वाले 'दैनिक बीडी खबर' नामक समाचार पत्र के कार्यवाहक संपादक 38 वर्षीय राणा प्रताप बैरागी की पांच जनवरी को दक्षिणी बांग्लादेश के जेस्सोर जिले में अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Jan 07, 2026 पर 2:28 PM
बांग्लादेश में कट्टरपंथियों को 'प्रोटेक्शन मनी' देने को मजबूर हिंदू, फिर भी पत्रकार की कर दी हत्या
पत्रकार राणा प्रताप बैरागी 'प्रोटेक्शन मनी' के नाम पर महीनों से कट्टरपंथी इस्लामी लोगों को अपनी सुरक्षा के लिए पैसे दे रहे थे

Hindu Journalist Shot In Bangladesh: एक रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश के जेस्सोर जिले में अपनी आइस फैक्ट्री के पास गोली मारकर हत्या किए गए पत्रकार राणा प्रताप बैरागी 'प्रोटेक्शन मनी' के नाम पर कट्टरपंथी इस्लामी लोगों को अपनी सुरक्षा के लिए पैसे दे रहे थे। टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) की रिपोर्ट के मुताबिक, रिश्तेदारों ने बताया कि 37 वर्षीय बैरागी ने अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगभग तीन लाख टका दिए थे। इसके बावजूद उनकी हत्या कर दी गई।

बर्फ बनाने की फैक्टरी के मालिक और नरैल से प्रकाशित होने वाले 'दैनिक बीडी खबर' नामक समाचार पत्र के कार्यवाहक संपादक 38 वर्षीय राणा प्रताप बैरागी की पांच जनवरी को दक्षिणी बांग्लादेश के जेस्सोर जिले में अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी।

पुलिस ने बैरागी को प्रतिबंधित 'पूर्वी बांग्ला कम्युनिस्ट पार्टी' का सक्रिय सदस्य बताते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि वह पार्टी के आंतरिक कलह का शिकार हुए। पुलिस ने बताया कि बैरागी के खिलाफ दो थानों में चार मामले दर्ज हैं। हालांकि, इन मामलों का विस्तृत डिटेल्स उपलब्ध नहीं है।

परिवार के एक सदस्य ने पत्रकारों को बताया कि अल्पसंख्यक खुद को 'आसान शिकार' जैसा महसूस करते हैं। उन्हें डर है कि वे अगला दिन देखने के लिए जीवित नहीं रहेंगे। बैरागी केशबपुर उपजिला के अरुआ गांव में काफी जाने-माने थे, जहां 100 से ज्यादा हिंदू घर हैं। वह एक आइस बनाने की फैक्ट्री चलाते थे। पत्रकार के तौर पर भी काम करते थे। राजनीतिक रूप से सक्रिय होने के कारण उन्हें अल्पसंख्यकों की आवाज माना जाता था। वह नियमित रूप से अधिकारियों के सामने उनकी समस्याओं को उठाते थे।

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