हवा और पानी में जहर, ऐसा मचेगा कहर... ईरान के न्यूक्लियर प्लांट पर हमला करना कितना खतरनाक, जानकर रूह कांप जाएगी

Iran Israel War News: इजरायल ने ईरान के नतांज, इस्फहान, अराक (जिसे खोंदाब भी कहा जाता है), कराज और तेहरान के न्यूक्लियर ठिकानों को निशाना बनाया है। इनमें यूरेनियम एनरिचमेंट प्लांट्स, हेवी वाटर रिएक्टर्स, और सेंट्रीफ्यूज बनाने वाली फैक्ट्रियां शामिल हैं। हालांकि, इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) ने बताया है कि जिन जगहों पर हमला हुआ, वहां रेडियोएक्टिव मटेरियल नहीं था

अपडेटेड Jun 20, 2025 पर 7:29 PM
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Iran Israel War: ईरान के न्यूक्लियर प्लांट पर हमला करना कितना खतरनाक, जानकर रूह कांप जाएगी

इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष में अब नया मोड़ आ गया है। इजरायल ने बीते दिनों ईरान के कई अहम परमाणु ठिकानों पर हमला किया है। इन हमलों को लेकर एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब तक तो रेडिएशन या बड़े नुकसान का खतरा नहीं है, लेकिन अगर इजरायल ने ईरान के बुशेहर न्यूक्लियर पावर प्लांट पर हमला कर दिया, तो यह एक बड़ा परमाणु हादसा बन सकता है। इससे न सिर्फ ईरान, बल्कि पूरे खाड़ी इलाके और लाखों लोगों की जिंदगी खतरे में पड़ सकती है।

अब तक क्या हुआ?

इजरायल ने ईरान के नतांज, इस्फहान, अराक (जिसे खोंदाब भी कहा जाता है), कराज और तेहरान के न्यूक्लियर ठिकानों को निशाना बनाया है। इनमें यूरेनियम एनरिचमेंट प्लांट्स, हेवी वाटर रिएक्टर्स, और सेंट्रीफ्यूज बनाने वाली फैक्ट्रियां शामिल हैं। हालांकि, इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) ने बताया है कि जिन जगहों पर हमला हुआ, वहां रेडियोएक्टिव मटेरियल नहीं था। इसलिए कोई रेडिएशन फैलने का खतरा नहीं है।


IAEA ने ये भी बताया कि अराक और खोंदाब के रिएक्टर्स अभी शुरू नहीं हुए थे। नतांज की फैसिलिटी जमीन के अंदर बनी हुई है, जो हमलों के असर को कम करती है। इसी वजह से अब तक के हमलों से बड़ी कोई परमाणु आपदा नहीं हुई है।

किस बात का सबसे ज्यादा खतरा है?

असल चिंता बुशेहर न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर है। यह ईरान (Iran) का इकलौता ऑपरेशनल न्यूक्लियर रिएक्टर है, जो खाड़ी के किनारे बसा है। अगर इस पर हमला होता है, तो वहां से रेडियोएक्टिव एलिमेंट वातावरण और समुद्र में फैल सकते हैं। इससे आसपास के देशों को बड़ा नुकसान होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि बुशेहर पर हमला करना "बेहद खतरनाक" और "बेवकूफी भरा" कदम होगा। अगर कोई मिसाइल रिएक्टर की दीवार को भेद देती है, तो लाखों लोगों की जान पर बन सकती है। रेडियोएक्टिव एलिमेंट समुद्री पानी को दूषित कर देंगे और हवा में भी जहर फैल जाएगा।

इंग्लैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल के प्रोफेसर पीटर ब्रायंट, जो रेडिएशन सुरक्षा और परमाणु नीति के विशेषज्ञ हैं, उनका कहना है कि अभी तक चिंता की कोई बड़ी बात नहीं दिखी है। उन्होंने बताया कि अराक साइट चालू नहीं थी और नतांज की फैसिलिटी जमीन के नीचे है, जहां से कोई रोडियोएक्टिव लीक नहीं हुआ है। उनके मुताबिक, कम स्तर के यूरेनियम से तब तक कोई खतरा नहीं होता, जब तक वह शरीर के अंदर न पहुंचे, जैसे सांस के जरिए या खाने के साथ।

लंदन के एक थिंक टैंक RUSI की वरिष्ठ शोधकर्ता डार्या डोल्जिकोवा ने कहा कि जिन प्लांट पर हमला हुआ है, वो न्यूक्लियर फ्यूल के शुरुआती चरणों से जुड़ी हैं, यानी जब यूरेनियम को रिएक्टर में इस्तेमाल के लिए तैयार किया जाता है। इन पर हमले से रेडियोएक्टिव खतरे से ज्यादा रासायनिक खतरा होता है। खासकर यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड (UF6) नाम की गैस पर चिंता जताई गई है, जो हवा में नमी के संपर्क में आकर जहरीला केमिकल बना सकती है।

उन्होंने कहा कि कितना नुकसान होगा यह मौसम और हवा की रफ्तार पर भी निर्भर करता है। अगर हवा कम चलेगी तो नुकसान पास के इलाके तक सीमित रहेगा, लेकिन तेज हवा में केमिकल ज्यादा दूर तक फैल सकते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ लीसेस्टर के साइमन बेनेट का मानना है कि अंडरग्राउंड परमाणु ठिकानों पर हमला होने पर भी वातावरण को ज्यादा नुकसान नहीं होगा, क्योंकि वो हजारों टन मिट्टी और कंक्रीट से ढंके होते हैं।

हालांकि, सभी विशेषज्ञ एक बात को लेकर चिंतित हैं — अगर ईरान के बुशेहर न्यूक्लियर प्लांट पर हमला होता है। मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रिचर्ड वेकफोर्ड ने कहा कि एनरिंचमेंट प्लांट पर हमला सिर्फ केमिकल खतरा पैदा करता है, लेकिन अगर बिजली बनाने वाले बड़े रिएक्टर को गंभीर नुकसान पहुंचा, तो हालात पूरी तरह बदल सकते हैं। रेडियोएक्टिव एलिमेंट हवा में या समुद्र में फैल सकते हैं।

कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के जेम्स ऐक्टन का कहना है कि बुशेहर पर हमला "एक भयानक परमाणु त्रासदी" बन सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अब तक इजरायल के हमलों से कोई बड़ा रेडियोएक्टिव असर नहीं हुआ है, क्योंकि यूरेनियम, जब तक रिएक्टर में नहीं जाता, तब तक ज्यादा रेडियोएक्टिव नहीं होता। हालांकि, उसकी रासायनिक स्थिति जैसे कि UF6 जहरीली जरूर होती है, लेकिन वो भी बहुत दूर तक नहीं फैलती।

यूनिवर्सिटी ऑफ लीसेस्टर के बेनेट का कहना है कि बुशेहर पर हमला करना इजरायल के लिए "बेहद मूर्खतापूर्ण" कदम होगा, क्योंकि रिएक्टर की दीवार अगर टूट गई तो रेडियोएक्टिव पदार्थ वातावरण में फैल जाएगा।

खाड़ी देशों को क्यों है डर?

खाड़ी देशों जैसे कि कतर, बहरीन, UAE, और कुवैत अपनी पीने के पानी की जरूरत पूरी तरह से समुद्र के पानी को मीठा बनाकर (desalination) करते हैं। अगर खाड़ी का पानी रेडियोएक्टिव हो गया, तो इन देशों को पीने का पानी मिलना बंद हो जाएगा। UAE में 80% से ज्यादा पानी इसी पर निर्भर करता है, जबकि बहरीन और कतर तो पूरी तरह इसी पर हैं।

अगर बुशेहर पर हमला होता है और वहां से रेडियोएक्टिव एलिमेंट समुद्र में फैलते हैं, तो इन देशों की जीवनरेखा खतरे में पड़ जाएगी। न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी अबू धाबी के प्रोफेसर निदाल हिलाल के अनुसार, “अगर कोई भी ऑयल लीक, प्राकृतिक आपदा या परमाणु हमला डेसिलेशन प्लांट को प्रभावित करता है, तो लाखों लोग एक झटके में पीने के पानी से वंचित हो सकते हैं।”

इजरायल क्या चाहता है?

इजरायल (Israel) का कहना है कि वो ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना चाहता है। ईरान इन आरोपों से इनकार करता रहा है और कहता है कि उसका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ ऊर्जा के लिए है। लेकिन इजरायल को शक है कि ईरान गुपचुप तरीके से परमाणु बम बनाने की तैयारी कर रहा है। इसी शक के चलते इजरायल लगातार ईरानी ठिकानों को निशाना बना रहा है।

फिलहाल, इंटरनेशनल एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। IAEA ने अभी तक किसी तरह के बड़े रेडिएशन खतरे से इनकार किया है, लेकिन वे लगातार निगरानी कर रहे हैं। कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ और थिंक टैंक यह भी कह रहे हैं कि परमाणु ठिकानों पर हमले रोकने चाहिए, नहीं तो यह एक भयानक त्रासदी में बदल सकता है।

संक्षेप में कहा जाए, तो इजरायल के अब तक के हमले ईरान की परमाणु क्षमताओं को नुकसान तो पहुंचा सकते हैं, लेकिन बुशेहर जैसे पावर प्लांट पर हमला पूरी दुनिया के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। अगर रेडिएशन फैला, तो ना सिर्फ ईरान, बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र में पानी, हवा और जिंदगी पर असर होगा। यही वजह है कि खाड़ी देश बेहद चिंतित हैं और दुनिया इस टकराव को टालने की अपील कर रही है।

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