जब मोसाद चुरा लाया ईरान का 500 kg न्यूक्लियर ब्लूप्रिंट, 50,000 डॉक्यूमेंट, 163 CD, 6 घंटे के ऑपरेशन की पूरी कहानी

इजरायल के 100 से ज्यादा हवाई और ड्रोन हमलों ने ईरान के न्यूक्लियर प्लांट, रिवोल्यूशनरी गार्ड के हेडक्वार्टर, मिसाइल डिपो और गुप्त खुफिया ठिकानों को खाक में मिला दिया। मरने वालों की संख्या 224 पार कर गई और कई हाई-सेक्योरिटी न्यूक्लियर साइट्स मलबे में तब्दील हो गईं। लेकिन यह हमला एक रात में तय नहीं हुआ था। इसकी बुनियाद तो सालों पहले रखी जा चुकी थी — एक ‘जेम्स बॉन्ड’ टाइप मिशन के साथ

अपडेटेड Jun 20, 2025 पर 12:55 PM
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Iran Israel War: जब मोसाद अंदर घुस कर चुरा लाया ईरान का 500 kg न्यूक्लियर ब्लूप्रिंट

13 जून की सुबह, जब दुनिया गहरी नींद में थी, इजरायल ने एक ऐसी कार्रवाई को अंजाम दिया जिसे उसने "जरूरत से पहले वाला हमला" करार दिया। लेकिन यह हमला कोई आम सैन्य ऑपरेशन नहीं था, यह एक सुनियोजित झटका था ईरान की सैन्य और परमाणु नींव पर। 100 से ज्यादा हवाई और ड्रोन हमलों ने ईरान के न्यूक्लियर प्लांट, रिवोल्यूशनरी गार्ड के हेडक्वार्टर, मिसाइल डिपो और गुप्त खुफिया ठिकानों को खाक में मिला दिया। मरने वालों की संख्या 224 पार कर गई और कई हाई-सेक्योरिटी न्यूक्लियर साइट्स मलबे में तब्दील हो गईं। लेकिन यह हमला एक रात में तय नहीं हुआ था। इसकी बुनियाद तो सालों पहले रखी जा चुकी थी — एक ‘जेम्स बॉन्ड’ टाइप मिशन के साथ।

जब Mossad ने चुरा लिया ईरान का न्यूक्लियर राज

31 जनवरी 2018 की रात, इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद के एजेंटों ने तेहरान के एक गुप्त गोदाम में घुसपैठ की। उनके पास था- सिर्फ 6 घंटे 29 मिनट का समय, हर एक सेकंड की प्लानिंग की गई थी। मिशन था- ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम की सच्चाई चुराना।


उन्होंने चुरा लिए 50,000 दस्तावेज, 163 CDs और करीब 500 किलो का न्यूक्लियर प्लान — जिसमें बम डिज़ाइन, वॉरहेड मेमो, मिसाइल फिटिंग के ब्लूप्रिंट और यहां तक कि खतरनाक ‘यूरोनियम ड्युटराइड’ का जिक्र भी था।

एजेंटों ने 32 तिजोरियों को पिघला देने वाली मशालों का इस्तेमाल करते हुए बमों के डिजाइन और वारहेड डेवलपमेंट से जुड़े बाइंडर्स को ज्यादा तरजीह दी। कुछ अलमारियां बिना खोले ही छोड़ दी गईं।

योजना बहुत सही और सटीक तरीके से बनाई गई थी। सिक्योरिटी गार्ड का रूटीन समझा गया। अलार्म सिस्टम को बिना छुए बंद किया गया। उन्होंने उन तिजोरियों को ढूंढा, जिनमें महत्वपूर्ण चीजें थीं।

मोसाद के अधिकारी ने इसे “Ocean’s 11” मूवी से भी ज्यादा सटीक ऑपरेशन बताया। ईरान को सुबह तक पता भी नहीं चला कि उसकी सबसे बड़ी कमजोरी अब इजरायल के हाथ लग गई है।

इस चोरी के बारे में सुबह तक किसी को भी पता नहीं चला। जब गार्ड ने दरवाजे टूटे और तिजोरियां खाली पाईं, तो ईरान ने एक बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू किया, लेकिन वो सब बेकार साबित हुई।

नेतन्याहू का खुलासा और परमाणु समझौता खत्म

इसके तीन महीने बाद, इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने पूरी दुनिया के सामने काले फोल्डर्स और डिस्क का ढेर लगाकर ऐलान किया — "ईरान झूठ बोल रहा है!"

उस दिन के बाद अमेरिका ने 2015 का परमाणु समझौता तोड़ दिया। पश्चिमी खुफिया एजेंसियों ने डॉक्युमेंट्स को असली और खौफना करार दिया। ईरान ने सब कुछ झूठ बताया, लेकिन सबूत चुप नहीं रहे।

इन दस्तावेजों में कथित तौर पर सीक्रेट टेस्टिंग, वारहेड को छोटा बनाने, और शाहब-3 मिसाइलों में न्यूक्लियर डिवाइस फिट करने का ब्लूप्रिंट दिखाया गया। इनमें से कुछ ईरान के संदिग्ध परमाणु हथियार- 'प्रोजेक्ट अमाद' से जुड़े थे।

खुल गया ईरान का पूरा न्यूक्लियर प्लान!

रिव्यू करने के बाद वेस्टर्न इंटेलिजेंसी एजेंसियां ​​काफी हद तक सहमत थीं। दस्तावेज असली और चिंताजनक थे और उन्होंने खुलासा किया कि ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाएं पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा एडवांस थीं।

सबसे गंभीर फाइलों में यूरेनियम ड्यूटेराइड का जिक्र था, जो सिर्फ न्यूक्लियर डिवाइस में ही इस्तेमाल होता है, और पर्चिन मिलिट्री बेस में एक सीक्रेट चेंबर के बारे में बताया गया, जहां परमाणु विस्फोटक टेस्ट किए जाने का शक था।

चोरी हुई फाइलों से पता चला कि ईरान 2015 के समझौते के बाद भी अपनी परमाणु जानकारी को सुरक्षित रख रहा था। उससे जुड़े मटेरियल को ऐसी जगहों पर ले गया, जो दुनिया की नजर से छुपे थे। साथ ही दस्तावेजों को अंतरराष्ट्रीय जांचकर्ताओं से छुपाया और टेस्टिंग साइट की योजना बनाई।

एक-एक करके मारे गए ईरानी वैज्ञानिक

पिछले कुछ सालों में, मोहसेन फखरीजादेह और मसूद अली मोहम्मदी सहित कई बड़े ईरानी परमाणु वैज्ञानिक सर्जिकल स्ट्राइकल या रहस्मय धमाकों और हमलों में मारे गए। इजरायल ने कभी भी आधिकारिक तौर पर इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन MOSSAD की छाया हर हत्या पर साफ दिखी।

जवाब में ईरान ने भी साइबर हमले, इजरायली राजनयिकों पर हमले और अपने मिडल ईस्ट नेटवर्क्स को सक्रिय कर दिया।

जून 2025: अब छिड़ गई खुली जंग

13 जून 2025 को, ईरान-इजरायल की ठंडी लड़ाई अब जलते अंगारों में बदल चुकी है। इजरायल के हमले के बाद ईरान ने भी जवाब में 100 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन इजरायली शहरों पर दाग दिए।

तेल अवीव समेत कई इलाकों में नागरिक इलाकों पर सीधा हमला हुआ। 14 लोगों की मौत और सैकड़ों घायल हुए। इजरायल की आयरन डोम डिफेंस सिस्टम के बावजूद कई मिसाइलें भीतर घुस आईं।

अमेरिका वो करने जा रहा है, जो दुनिया में कोई नहीं कर सकता... ईरान के सबसे मजबूत परमाणु ठिकाने पर हमले की हो रही तैयारी!

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