नेपाल की बालेन शाह सरकार को बने हुए अभी कुछ ही दिन हुए हैं और सरकार एक फैसले को लेकर विवादों में भी घिर गई है। बालेन शाह सरकार का एक फैसले का काफी विरोध हो रहा है। बता दें कि, नेपाल के सीमावर्ती शहर बीरगंज में नए नियम को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। दरअसल नेपाल की बालेन शाह सरकार ने भारत से लाए जाने वाले 100 नेपाली रुपये से अधिक कीमत के सामान पर कस्टम ड्यूटी सख्ती से लागू करना शुरू कर दिया है, जिससे रोजमर्रा की खरीदारी प्रभावित हो रही है। वहीं नेपाली कांग्रेस ने सरकार के इस फैसले का खुलकर विोध किया है।
बालेन शाह सरकार के फैसले का भारी विरोध
बता दें कि, नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के आदेश के बाद नेपाल ने अपनी भंसार नीति यानि कस्टम ड्यूटी को सख्ती से लागू किया है।भारत से लाए जाने वाले सामान पर टैक्स की बात सुनते ही लोग भड़क गए और उन्होंने प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है। नेपाली कांग्रेस ने रविवार को सरकार से मांग की कि सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों पर लगाया गया नया कस्टम ड्यूटी का नियम तुरंत वापस लिया जाए। पार्टी ने अपने बयान में कहा कि सरकार का यह फैसला सामाजिक न्याय और देश की एकता के लिए ठीक नहीं है और इससे लोगों को परेशानी होगी।
सरकार ने अप्रैल 2026 के बीच से यह नियम लागू किया है कि सीमा के पास रहने वाले लोग अगर भारत से 100 नेपाली रुपये (NPR) से ज्यादा का सामान लाते हैं, तो उन्हें उस पर कस्टम ड्यूटी देनी होगी। नेपाली कांग्रेस का कहना है कि रोजमर्रा की जरूरत की चीजें—जैसे खाने-पीने का सामान, कपड़े और घर में इस्तेमाल होने वाली चीजों पर टैक्स लगाना सही नहीं है पार्टी ने सरकार से मांग की है कि इस फैसले को तुरंत वापस लिया जाए और जरूरी चीजों पर लगने वाला टैक्स भी कम किया जाए, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।
नेपाली कांग्रेस की नाराजगी
नेपाली कांग्रेस ने कहा है कि सरकार के ऐसे फैसले जनता के खिलाफ हैं और लोगों की मुश्किलें बढ़ाने वाले हैं। पार्टी का मानना है कि यह फैसला न तो व्यावहारिक है और न ही लोगों की स्थिति को समझकर लिया गया है। पार्टी ने कहा कि पहले से ही बढ़ती महंगाई के कारण लोग आर्थिक परेशानी झेल रहे हैं, और ऐसे में यह फैसला उनके लिए बड़ा झटका साबित होगा। नेपाली कांग्रेस के प्रवक्ता देवराज चालिसे के हस्ताक्षर वाले बयान में कहा गया है कि सीमा के पास रहने वाले लोग भारत से सस्ता सामान लाकर अपना गुजारा करते हैं। इस फैसले का सबसे ज्यादा असर गरीब और कम आय वाले लोगों पर पड़ेगा, खासकर दक्षिणी सीमा के पास रहने वाले किसान और मजदूर इससे प्रभावित होंगे।