शर्मनाक: ऑस्ट्रेलिया में कैसे चोरी हुई महात्मा गांधी की 420 Kg की कांस्य प्रतिमा? पैरों से काटकर ले गए चोर!

हाल के सालों में ऑस्ट्रेलिया में भारत-विरोधी और कट्टरपंथी गतिविधियों में बढ़ोतरी देखी गई है। इस घटना को खालिस्तानी समर्थकों और भारत-विरोधी तत्वों से जोड़कर देखा जा रहा है, जो पहले भी भारतीय दूतावासों और मंदिरों को निशाना बना चुके हैं

अपडेटेड Feb 03, 2026 पर 4:08 PM
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ऑस्ट्रेलिया में चोरी हुई महात्मा गांधी की 420 Kg की कांस्य प्रतिमा

ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न शहर से एक बेहद दुखद और हैरान करने वाली खबर सामने आई है। रोविल (Rowville) में 'ऑस्ट्रेलियाई भारतीय सामुदायिक केंद्र' के बाहर लगी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की आदमकद कांस्य प्रतिमा को अज्ञात चोरों ने चुरा लिया है। यह प्रतिमा भारत सरकार (ICCR) की ओर से ऑस्ट्रेलियाई भारतीय समुदाय को उपहार स्वरूप दी गई थी।

कैसे हुई चोरी?

'ऑस्ट्रेलिया टुडे' की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना सोमवार रात करीब 12:50 बजे की है। CCTV फुटेज में देखा गया है कि नकाबपोश चोर एक सफेद रंग की वैन में आए थे।


तीन अज्ञात अपराधियों ने 'एंगल ग्राइंडर' (लोहा काटने वाली मशीन) का इस्तेमाल कर 426 किलोग्राम भारी इस प्रतिमा को उसके फाउंडेशन से काट दिया।

सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों में देखा जा सकता है कि चोरों ने प्रतिमा को उसके टखनों (Ankles) के पास से काटा, जिससे स्टैंड पर केवल गांधी जी के पैर ही बचे रह गए।

पुलिस की जांच और चेतावनी

विक्टोरिया पुलिस की 'नॉक्स क्राइम इन्वेस्टिगेशन यूनिट' इस मामले की गहन जांच कर रही है। पुलिस ने इलाके के सभी स्क्रैप मेटल डीलरों (कबाड़ व्यापारियों) को सतर्क रहने की चेतावनी दी है।

उन्होंने कहा, "अगर कोई इस भारी कांस्य प्रतिमा को बेचने की कोशिश करता है, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।"

सामुदायिक ट्रस्ट के सदस्य संतोष कुमार ने बताया कि घटना की जानकारी पुलिस को दे दी गई है और CCTV फुटेज भी सौंप दी गई है।

प्रतिमा का इतिहास: पहले भी हुआ था हमला

इस प्रतिमा का उद्घाटन 12 नवंबर 2021 को ऑस्ट्रेलिया के तत्कालीन प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने किया था। दुख की बात यह है कि उद्घाटन के महज 24 घंटों के भीतर ही कुछ शरारती तत्वों ने इसमें तोड़फोड़ करने की कोशिश की थी।

ऑस्ट्रेलिया में बढ़ती भारत-विरोधी घटनाएं

हाल के सालों में ऑस्ट्रेलिया में भारत-विरोधी और कट्टरपंथी गतिविधियों में बढ़ोतरी देखी गई है।

इस घटना को खालिस्तानी समर्थकों और भारत-विरोधी तत्वों से जोड़कर देखा जा रहा है, जो पहले भी भारतीय दूतावासों और मंदिरों को निशाना बना चुके हैं।

जुलाई 2025 में भी मेलबर्न के 'श्री स्वामीनारायण मंदिर' में नस्लवादी नारे लिखे गए थे और तोड़फोड़ की गई थी। इसके अलावा, पास के एशियाई रेस्तरां पर भी इसी तरह के हमले हुए थे।

महात्मा गांधी की प्रतिमा की चोरी केवल एक धातु की चोरी नहीं है, बल्कि यह एक सांस्कृतिक और वैचारिक हमले के रूप में देखा जा रहा है। भारतीय समुदाय ने इस घटना पर गहरा दुख जताया है और दोषियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है।

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